बरेली: तकी मियां के कलाम को गाने के रूप में पेश कर दी अकीदत

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Edited By Amrit Vichar
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बरेली, अमृत विचार। खानकाह-ए-नियाजिया के सूफी बुजुर्ग हजरत शाह मोहम्मद तकी अजीज मियां नियाजी की लिखा कदीमी कलाम रिमझिम-रिमझिम इन दिनों ओटीटी प्लेटफार्म और सोशल मीडिया पर खूब पसंद किया जा रहा है। एक दिन पहले खानकाह से अकीदत रखने वाले गायक जीशान खान की आवाज में इसे रिलीज किया गया है। खानकाह के प्रबंधक शब्बू मियां नियाजी ने जीशान और उनकी टीम को मुबारकबाद दी है। राग शहाना मलहार के इस गीत को नौजवान पीढ़ी तक पहुंचाने के लिए वेस्टर्न टच दिया गया है।

गायक जीशान खान बताते हैं कि हजरत शाह मोहम्मद तकी अजीज मियां की एक मकबूल किताब राज-ए-नियाज सालों से उनके पास थी। इस किताब में तकी मियां ने कव्वाली, नातें, सावन और होरी शैली में कई कलाम लिखे हैं। उनके पिता उस्ताद मकबूल हुसैन भी एक क्लासिकल गायक हैं।

असल में इस गाने की कंपोजीशन 11 साल पहले हो चुकी थी। साल 2012 में मेक मलहार फेस्टिवल मुंबई के दौरान बारिश का राग गाना था। लिहाजा पिता के कहने पर कुछ नया बनाने की सोची। इस बीच हजरत तकी मियां नियाजी की रिमझिम रिमझिम बंदिश पर नजर गई। इसको कंपोज किया गया और गाया, लेकिन अब इसका फ्यूजन वर्जन नौजवानों के लिए तैयार किया है। मशहूर संगीतकार अभिजीत हेगड़े पाटिल ने इसे संगीत दिया है। हजरत शाह नियाज बेनिया और हजरत नसीर मियां नियाजी का कलाम भी इस गाने में शामिल किया गया है।

सूफियों के राज सूफी ही जानते हैं
मशहूर वाइस ओवर आर्टिस्ट परिमल अलोक के वाइस ओवर से गाना शुरू होता है। स्वाति मारवाल ने बैकअप वोकल किया है। सावन, स्पोटीफाइ, गाना डॉट कॉम जैसे ओटीटी प्लेटफार्म पर यह गाना मौजूद है। जीशान बताते हैं कि वह खुद नहीं जानते कि यह गाना कैसे बन गया। सूफियों का यह कलाम है और सूफियों के राज तो सूफी जानते हैं। उनका मानना है कि यह गाना सिर्फ हजरत तकी मियां की प्रेरणा से ही बनकर तैयार हुआ है। वह कहते हैं कि हजरत के उर्स में उन्होंने यह बंदिश गाई थी। ऐसा लगता है कि उनकी हाजिरी कबूल हो गई और यह गाना बन गया।

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