Kanpur Central Station के प्लेटफॉर्म में अचानक दौड़ने लगे घोड़े, यात्रियों में मची अफरा-तफरी, ऐसे घुसे अंदर
कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म में दौड़े घोड़े।
कानपुर सेंट्रल स्टेशन के प्लेटफॉर्म में घोड़े के दौड़ने से यात्रियों में दहशत फैल गई। रेल प्रशासन की ओर से पूरे दिन जांच होती रही। सुरक्षा एजेंसियों को निर्देश दिए।
कानपुर, अमृत विचार। कानपुर सेंट्रल के एक नंबर प्लेटफॉर्म पर यात्रियों के बीच अचानक घोड़े दौड़ने लगे। पहले तो अचानक इस नजारे को देख यात्री कुछ समय के लिए कुछ समझ नहीं पाए, लेकिन घोड़ों के दौड़ते ही उनमें भगदड़ मच गई। यह घोड़े जीआरपी थाना की ओर बने गेट नंबर चार से प्लेटफॉर्म पर घुसे थे, आरपीएफ की ओर से इन्हें मुख्य निकासी द्वार से होकर निकाला जा सका। सेंट्रल पर घोड़े घुसने की घटना की जांच शुरू हो गई है।
शनिवार देर रात यात्री जब अपनी ट्रेन का इंतजार कर रहे थे तब अचानक घोड़े की नाल की टाप प्लेटफॉर्म पर सुनाई देने लगी। इसे देख यात्रियों में भगदड़ मच गई। कुछ परिवार घोड़ों से अपने बच्चों को बचा रहे थे तो कुछ अपने सामान को एक जगह से उठाकर दूसरी जगह ले जाने लगे। इस बीच घोड़ों के पैरों में रस्सी बंधा देख यात्री शांत हुए।
स्टेशन पर इस तरह की घटना पर आरपीएफ के कुछ सिपाहियों ने जब देखा तो उन्होंने घोड़ों को मुख्य निकासी द्वार के पास बने मेटल डिटेक्टर से बाहर निकाला। उधर प्लेटफॉर्म पर घोड़े घुसने की घटना को रेल प्रशासन की ओर से गंभीरता से लिया गया है। जीआरपी और आरपीएफ से पूरे घटनाक्रम की रिपोर्ट मांगी गई है। इसके अलावा सेंट्रल पर इस तरह की घटना दोबारा न होने के लिए कड़े इंतजाम किए जाने की भी बात कही गई है।
ऐसे घुसे घोड़े
सेंट्रल स्टेशन पर जीआरपी के पास बने गेट नंबर चार से घोड़ों ने प्लेटफॉर्म पर प्रवेश किया। गेट से घुसने के बाद यह घोड़े प्लेटफॉर्म नम्बर एक पर पहुंचे। इसके बाद सुरंग के रास्ते के बगल से होते हुए मुख्य निकासी द्वार तक पहुंचे। बीच में घोड़ों ने कई बार इधर-उधर जाने का प्रयास किया लेकिन पहले यात्रियों और फिर आरपीएफ के सिपाहियों ने इन्हें मुख्य द्वार पर बने मेटल डिटेक्टर से बाहर निकाला।
सेंट्रल पर ले चिड़ियाघर का मजा
सेंट्रल पर पहले ही कुत्ता, बंदर और टिकट बुकिंग काउंटर की ओर गाय घुसती यात्रियों को नजर आती थी। ऐसा पहली बार हुआ है जब प्लेटफॉर्म पर खुलेआम घोड़े प्लेटफॉर्म पर घुसे हैं। इस बीच यात्रियों के बीच चर्चा आम है कि सेंट्रल कुछ दिनों में चिड़ियाघर बन जाएगा। वह भी तब है जब सेंट्रल पर पुनर्विकास के लिए 866 करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं। इससे पहले बंदरों के आतंक से यात्रियों को बचाने के लिए थ्रीडी होल्डिंग का उपाय किया जा चुका है। इसके अलावा अभी भी रेल अधिकारी इसके उपाय तलाश रहे हैं।
