फतेहपुर में बाढ़ : गंगा खतरे के निशार के पार, कटरी के गांवों की लोगों की बढ़ी धड़कनें, पढ़ें- पूरा अपडेट
फतेहपुर में बाढ़ का पानी लगातार बढ़ रहा है।
फतेहपुर में गंगा खतरे के निशान को पार कर गई। गंगा के बढ़ने से कटरी के गांवों के लोगों की धड़कनें बढ़ गई है।
फतेहपुर, अमृत विचार। जैसे जैसे गंगा का जलस्तर बढ़ता जा रहा है वैसे वैसे कटरीवासियों की परेशानी भी बढ़नी शुरू हो गई हैं। जिस गंगा की जलधारा से कटरी के लोग अटखेलियां करते हैं। उसके वेग को देखकर यह भी सहमते नजर आ रहे हैं। हाल यह है कि जिस रफ्तार से पानी बढ़ता जा रहा है। उसी गति से बाढ़ ग्रसित गांव, एक एक करके बाढ़ की गिरफ्त में आते जा रहे हैं।
अभी तक सात गांव ऐसे हैं। जिनके चारों तरफ पानी भर चुका है। घरों में भी जो दाखिल होना शुरू हो गया है। बाढ़ ग्रसित चालीस फीसदी गांव की खेती जलधारा की जद में आ चुकी है। जिस तरह पानी भर रहा है। उससे एक दो दिन में हालात और खराब हो सकते हैं।
अफसर आने की आहट से कुछ पाने की ललक
इस वक्त रोजाना कोई न कोई अफसर कटरी के हालात जानने को पहुंच रहा है। नेता भी पहुंचने शुरू हो गए हैं लेकिन अभी तक मददगार के रूप में ऐसा कोई चेहरा नहीं पहुंचा है जो कटरी की दो राहे पर फंसी जिंदगी के लिए रहनुमा बनकर उभरता नजर आया। कुछ खाद्य सामग्री मिलने की आस में अधिकारियों और स्वयं सेवी संस्थाओं का रास्ता देखते रहते हैं।
हाल यह है कि आपदा की घड़ी में मंडराए रोजी रोटी के संकट के बीच जिस तरह से कटरी वासियों का राशन कम होता जा रहा है और भूख बढ़ती जा रही है। उससे यहां की जीविका पर आगे और सवाल खड़े सकते हैं। उधर गंगा के पानी की तेज रफ्तार से कटरी के बच्चे और महिलाएं सहमी हुई हैं । फिलहाल बाढ़ तो स्थिर है लेकिन जितनी भी है कटरीवासियों का लगातार दर्द ही बढ़ा रही है । बेरी नारी निवासी रामहित का कहना है कि प्रशासन तो निरीक्षण करने आता है कि बाढ़ का पानी कहां तक पहुंचा लेकिन जहां तक पहुंचा वहां तक के लोगों को जुबानी राहत के सिवा अभी तक कुछ नहीं प्राप्त हुआ है।
कटरी में बाढ़ का अर्थ, गंगा का पानी बस्तियों तक पहुंचा
प्रशासन के दृष्टिकोण से प्राथमिकता यह है कि बाढ़ से कोई जनहानि न होने पाए। इसीलिए लेखपालों की 24 घंटे की ड्यूटी रहती है। पर्याप्त संख्या में नाविकों की ड्यूटी तहसील के आधिकारियों ने लगा रखी है। बाढ़ का पानी कुछ मजरों को छोड़कर हर जगह देखा जा सकता है हालांकि अभी डूबने जैसी स्थित कतई नहीं बनी है। बिंदकी फार्म, जाड़े का पुरवा, सदनहा, काली कुंडी, गंगा और पाण्डु नदी के पानी के मध्य में बसे हैं। ऐसे में देखा जाए तो करीब साठ फीसदी कटरी के हालात खराब हो चले हैं।
