Kanpur: ठेकेदारों, पार्षदों को सीधे फाइल दी तो जाएगी नौकरी, नगर आयुक्त ने अधिकारियों को जारी किए ये निर्देश
कानपुर में ठेकेदारों, पार्षदों को सीधे फाइल दी तो नौकरी जाएगी।
कानपुर में ठेकेदारों, पार्षदों को सीधे फाइल दी तो नौकरी जाएगी। नगर आयुक्त ने नगर निगम अधिकारियों को निर्देश जारी किए।
कानपुर, अमृत विचार। नगर निगम में भुगतान की फाइलों या पत्रों को सीधे ठेकेदार और पार्षदों को देने पर अधिकारियों की नौकरी पर भी गाज गिर सकती है। नगर आयुक्त शिवशरणप्पा जीएन ने नगर निगम अधिकारियों को आदेश देते हुए कहा कि यदि ऐसा पाया जाता है, तो फाइल पर आखिरी साइन करने वाले अधिकारी को ही दोषी मानते हुये उसपर दंडात्मक कार्रवाई की जाएगी।
नगर निगम में पिछले दिनों एक अफसर के फर्जी हस्ताक्षर पर भुगतान हो गया था। जिसके बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने भी कहा था कि नगर निगम अधिकारी ठेकेदारों और पार्षदों को बिना नियम के डायरेक्ट फाइलें दे देते हैं, और कहते हैं जाकर साइन करा लो तो भुगतान हो जाएगा। महापौर ने कहा था कि ऐसा नगर निगम में कभी नहीं देखा।
इसके साथ ही पत्रों को डाक द्वारा न देकर खुद अधिकारियों के पास जाकर उनपर हस्ताक्षर कराने की शिकायतें भी नगर आयुक्त के पास पहुंच रही थीं। जिसके बाद नगर आयुक्त ने गुरुवार को यह आदेश देते हुए कहा है कि कोई भी पत्रावली व फाइलों को किसी को हाथों-हाथ न दिया जाए। पत्रावलियों को विधिवत डाक में चढ़ाया जाए, और नियमानुसार ही संबंधित को ग्रहण कराई जाए।
उन्होंने कहा कि यदि अब नियम के विरुद्ध फाइलों या पत्रावलियों को दिया गया तो जिस अधिकारी का उसपर आखिरी हस्ताक्षर होगा उसे दोषी मानते हुए दंडात्मक कार्रवाई की जायेगी। उन्होंने इसके लिए अपर नगर आयुक्त प्रतिपाल सिंह को भी मॉनिटरिंग करने को कहा है।
कूड़ा गाड़ियों की जांच के नाम लीपापोती
बिना जांच किए वार्डों में भेजी गईं घटिया कूड़ा गाड़ियों को दम निकलने लगा है। एक महीने में ही गाड़ियों के रिम और टॉयर फट गए हैं। जो फिर से जोनल कार्यालयों में खराब होकर खड़ी होना शुरू गई हैं। बता दें कि, नगर निगम को स्वच्छ भारत मिशन के तहत 32 करोड़ रुपये मिले थे, जिसमें से आठ करोड़ रुपये से अधिकारियों ने कूड़ा ढ़ोने के लिए 1800 रिक्शा और 2500 हाथ कूड़ा गाड़ियों को खरीदा। कूड़ा रिक्शा की गुणवत्ता बहुत खराब थी, जिसपर हंगामें के बाद महापौर ने जांच बैठाई थी। लेकिन, यह जांच हवा हवाई साबित हुई। महापौर को बिना बताए ही अधिकारियों ने कूड़ा रिक्शा को वार्डों में भेज दिया, जो खराब होना शुरू हो गए हैं।
चेक रोका पर हस्ताक्षर किसने किए, पता नहीं
व्यक्तिगत शौचालय के निर्माण की फाइल में अफसर के फर्जी हस्ताक्षर कर जारी हुए भुगतान के बाद महापौर प्रमिला पांडेय ने चेक पर रोक तो लगा दी। इसके साथ ही योजना के तहत बने सभी शौचालयों की फाइलें भी तलब की, लेकिन नगर निगम की फाइल पर नगर स्वास्थ्य अधिकारी के फर्जी हस्ताक्षर किसने किया, यह अभी तक राज है। बता दें कि, स्वच्छ भारत मिशन के तहत वर्ष-2019 में व्यक्तिगत शौचालय बनाने का काम शुरू हुआ था। छह जोन में 600 से अधिक शौचालय बनाए जाने थे। उस दौरान हुए भ्रष्टाचार की वजह से तत्कालीन अधिकारियों ने ठेकेदारों के पेमेंट पर रोक लगा दी थी। जिसके बाद भी एक ठेकेदार माजिदा शबनम को आवंटित कार्य के बदले 3.76 लाख का भुगतान हो गया। जांच की गई तो पता चला की नगर स्वास्थ्य अधिकारी के हस्ताक्षर ही फर्जी हैं। जिसके बाद महापौर ने इस मामले में जांच बैठा दी लेकिन इस मामले में अभी कुछ हुआ नहीं है।
