प्रयागराज : चर्च को अवैध रूप से सील करने पर हाईकोर्ट ने की टिप्पणी, कहा - किसी को प्रार्थना करने से कैसे रोका जा सकता है
प्रयागराज, अमृत विचार। कौशांबी जिले में स्थित एक चर्च को सील करने के खिलाफ दाखिल जनहित याचिका पर सुनवाई करने के दौरान इलाहाबाद हाईकोर्ट ने कहा कि किसी को प्रार्थना करने के अधिकार का पालन करने से कैसे रोका जा सकता है।
उक्त मामले की सुनवाई मुख्य न्यायाधीश प्रीतिंकर दिवाकर और न्यायमूर्ति आशुतोष श्रीवास्तव की खंडपीठ के समक्ष हुई। याची आश्रय चैरिटेबल ट्रस्ट और उसके प्रबंध ट्रस्टी का दावा है कि कौशांबी जिले के मोहम्मदपुर गांव में चर्च की स्थापना की गई थी, जिसे झूठे आरोपों के आधार पर गैर कानूनी ढंग से सील कर दिया गया, जिससे भक्तों को अब हर रविवार प्रार्थना करने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ती है। इसके अलावा याची के अधिवक्ता ने तर्क दिया कि याची को कथित तौर पर धर्मांतरण कराने के आरोप में गिरफ्तार कर लिया गया था।
हालांकि अब उसे जमानत मिल चुकी है। इसके साथ ही याची के अधिवक्ता ने कोर्ट को यह भी बताया कि विवादित स्थान एक छोटा सा कमरा था, जहां समुदाय के सदस्य प्रार्थना करने के लिए एकत्र होते थे। राज्य की ओर से याचिका का विरोध करते हुए तर्क दिया गया कि छोटे जिलों में अक्सर छोटे कमरे लेकर धार्मिक गतिविधियों की आड़ में जबरन धर्मांतरण कराया जाता है। अंत में कोर्ट ने शपथ पत्रों के आदान-प्रदान के बाद मामले को सूचीबद्ध करने का निर्देश दिया।
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