बदायूं: अपहरण करके हत्या करने के आरोपी तीन सगे भाइयों को उम्रकैद
शुक्रवार को न्यायाधीश ने सुनाया फैसला, तीनों पर 16-16 हजार रुपये डाला जुर्माना
बदायूं, अमृत विचार। डीजीपी के निर्देश पर चलाए जा रहे ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत पुलिस की कुशल पैरवी से तीन सगे भाइयों को सजा मिली है। अपहरण और हत्या के आरोपी तीन सगे भाइयों को विशेष न्यायाधीश इसी एक्ट अखिलेश कुमार ने उम्रकैद की सजा सुनाई है। साथ ही 16-16 हजार रुपये जुर्माना भी डाला है।
कोतवाली दातागंज क्षेत्र के गांव करीमगंज निवासी गंगा सिंह पुत्र श्याम बिहारी यादव ने 11 अगस्त 2011 को रिपोर्ट दर्ज कराई थी। उन्होंने बताया था कि उनका बेटा संतराम और गांव निवासी रविंद्र व फकीरी भैंस खरीदने का काम करते हैं। रविंद्र पर संतराम के 35 हजार रुपये उधार थे।
संतराम ने कई बार उससे रुपये मांगे लेकिन वह आनाकानी करता रहा। 10 अगस्त 2011 की सुबह करीब 10 बजे रविंद्र उसके घर आया। संतराम से भैंस खरीदने के लिए साथ चलने को कहा। घर पर कोतवाली उझानी क्षेत्र के गांव अल्लापुर निवासी रिश्तेदारों के आने के वजह से वह नहीं गए। शाम लगभग 5 बजे तीन सगे भाई जुगेंद्र, रविंद्र और वीरेंद्र पुत्र फकीरी सड़क पर खड़े मिले। संतराम ने घर चलने को कहा तो रविंद्र ने कहा कि तुम लोग चलो हम थोड़ी देर में आएंगे।
जिसके बाद शाम 6 बजे गांव निवासी मनीष पुत्र किशन पाल ने फोन करके उसकी मां से बात कराई। कहा कि वह कुछ देर के बाद आएगा। जिसके बाद संतराम वापस नहीं आए। और न ही वह तीनों भाइयों वापस लौटकर आए। परिजनों ने इधर-उधर तलाश किया लेकिन संतराम का कहीं कुछ पता नहीं चला। अगले दिन सुबह उठे तो पता चला कि रविंद्र के परिजन अपने घर में ताला लगाकर भाग गए हैं।
संतराम के परिजनों को आंशका हुई। परिजनों को संतराम को लेकर अनहोनी की आशंका हुई। वह तहरीर देने कोतवाली दातागंज जा रहे थे। इसी दौरान पता चला कि थाना मूसाझा क्षेत्र में किसी युवक का शव मिला है। परिजन मौके पर पहुंचे तो शव पोस्टमार्टम हाउस पर होने का पता चला।
परिजन पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे और संतराम के रूप में शिनाख्त की। मुकदमा दर्ज होने के बाद तत्कालीन प्रभारी निरीक्षक देवेंद्र सिंह ने विवेचना की। कोर्ट में चार्जशीट दाखिल की। न्यायालय में रविंद्र, जोगेंद्र, वीरेंद्र पुत्र फकीरी के खिलाफ अपहरण करके हत्या करने का मुकदमा चलाया गया।
न्यायाधीश ने पत्रावली पर उपलब्ध साक्ष्य का अवलोकन किया। वहीं ऑपरेशन कन्विक्शन के अंतर्गत इस मुकदमा को चिंह्नित किया गया। पुलिस के मॉनीटरिंग सेल और पैरोकार हेड कांस्टेबल सुभाष कुमार ने सशक्त पैरवी की। न्यायाधीश ने ने तीनों भाइयों को दोषी पाते हुए सजा सुनाई है।
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