Flood In Kanpur: गंगा का जलस्तर हुआ कम पर ग्रामीणों की मुसीबतें बरकरार, बाढ़ के बाद बढ़ा बीमारियों का खतरा
कानपुर में बाढ़ के बाद बढ़ा बीमारियों का खतरा।
कानपुर में बाढ़ के बाद बढ़ा बीमारियों का खतरा। बच्चों के शरीर में चकत्ते, फुंसी और खुजली की समस्या हो रही है।
कानपुर, अमृत विचार। गंगा का जलस्तर धीरे-धीरे घटने से कटरी के बाढ़ प्रभावित गांवों से भी पानी उतरने लगा है। इसी के साथ बीमारियां फैलने का खतरा मंडरा रहा है। फिलहाल चर्म रोग और पेट के रोग का प्रकोप तो हो चुका है।
बाढ़ प्रबावित गांवों में चौतरफा गंदगी फैली है। बच्चों के शरीर में चकत्ते और फुंसी पड़ने से संक्रमण फैलने की शुरुआत हो गई है। इसी के साथ गांवों में संक्रामक बीमारियों का खतरा बढ़ गया है। इसे देखते हुए प्रशासन ने गांवों में सफाई कर्मियों की संख्या बढ़ा दी है। दवा का छिड़काव कराया गया है। इधर, पानी कम होने से पलायन कर गए ग्रामीण भी धीरे-धीरे वापस लौटने लगे हैं, लेकिन वे गांव नहीं जाकर राहत शिविर में रुके हैं।
बैराज और कटरी से जुड़े बाढ़ प्रभावित गांवों में पानी तेजी से घट रहा है। पानी कम होने से गंदगी सामने आ गई है, जिससे बीमारियां फैलने की शुरुआत हो गई है। इसकी चपेट में बच्चे और बुजुर्ग आ रहे हैं। बच्चों के शरीर में चकत्ते, फुंसी और खुजली की शिकायत हो रही हैं। बड़े पेट के रोग से पीड़ित हैं। प्रशासन ने सोमवार को बाढ़ प्रभावित गांवों में स्वास्थ्य शिविर लगाकर ग्रामीणों को दवा वितरित की।
गांवों में दवा का छिड़काव भी कराया गया है, ताकि बीमारी को फैलने से रोका जा सके। गंदगी की वजह से गांवों में मच्छर आने से ग्रामीणों को और भी परेशान झेलनी पड़ रही हैं। चैनपुरवा से राकेश निषाद का कहना है कि मच्छर की वजह से ठीक से सो नहीं पा रहे हैं। गांव में कई तरह के जहरीले कीड़े आ गए हैं। रात में चलना खतरनाक है, कोई भी कीड़ा काट सकता है। महेश निषाद का कहना है कि पानी तो कम हो रहा है, लेकिन मुश्किल कम नहीं हो रही है। बीमारी फैलने का डर सता रहा है।
हैजा, मलेरिया, टाइफाइड और डेंगू भी फैल सकता
चिकित्सकों के मुताबिक बाढ़ के बाद हैजा, मलेरिया, टाइफाइड और चर्म रोग जैसी बीमारियां फैलने की संभावना रहती है। इसकी वजह यह है कि बाढ़ के उतरे पानी में मच्छर और कीड़े बड़ी मात्रा में पनपते हैं। इससे वेक्टर-बॉर्न डिजीज यानी कीड़े-मकोड़े, जीव-जंतुओं से फैलने वाली बीमरियां जैसे डेंगू, मलेरिया, चिकनगुनिया आदि पनप सकती हैं। इसी तरह वॉटर-बॉर्न डिजीज यानी रुके हुए पानी से पैदा होने वाली बीमारियां, जैसे कालरा, टाइफाइड, जॉन्डिस आदि का संक्रमण हो सकती है।
आज खतरे के निशान से नीचे आ सकता जलस्तर
गंगा का जलस्तर अभी खतरे के निशान से 55 सेंटीमीटर ऊपर है, लेकिन मंगलवार सुबह तक जलस्तर काफी कम होने की उम्मीद हैं। इसकी वजह यह है कि अब पीछे से ज्यादा पानी नहीं छोड़ा जा रहा है। सोमवार को लगातार चौथे दिन हरिद्वार और नौरौरा से कम पानी छोड़ा गया है। इससे उम्मीद है कि मंगलवार को गंगा का जलस्तर खतरे के निशान के नीचे आ जाएगा।
शुक्लागंज की ओर छोड़ा चार लाख क्यूसेक पानी
गंगा बैराज के सभी गेट खुले है। सोमवार को बैराज से करीब चार लाख क्यूसेक पानी शुक्लागंज की ओर छोड़ा गया। इससे शुक्लागंज गेट पर जलस्तर 113.05 मीटर पहुंच गया है। संभावना जताई जा रही है कि दो से तीन दिन में वहां पर भी गंगा का जलस्तर चेतावनी बिंदु के नीचे पहुंच जाएगा।
