बरेली: कच्चे बिलों पर 50 फीसदी कारोबार...पक्के बिल देने वाले परेशान, जानिए मामला

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Edited By Amrit Vichar
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शॉपिंग मॉल और गिनेचुने शोरूम छोड़कर ज्यादातर दुकानों पर कच्चे बिल पर खरीदफरोख्त होने से करोड़ों का टैक्स घाटा भी

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बरेली, अमृत विचार। पक्के बिलों पर वैध कारोबार करने वाले शहर के व्यापारी कच्चे बिलों पर चल रहे कारोबार को लेकर काफी परेशान हैं। उनका कहना है कि जिले भर में 50 फीसदी से भी ज्यादा कारोबार इसी ढंग से हो रहा है और इसका खामियाजा उन्हें भुगतना पड़ रहा है। अवैध ढंग से कारोबार करके सरकार को करोड़ों का नुकसान पहुंचाने वाले कारोबारी ग्राहकों को कच्चे बिल पर सस्ते में माल देने का झांसा देते हैं, इसी वजह से टैक्स भरने वाले व्यापारियों को कारोबार में नुकदान उठाना पड़ता है।

पिछले दिनों टैक्स चोरी रोकने के लिए राज्य कर विभाग की विशेष अनुसंधान शाखा यानी एसआईबी की टीम ने शहर से देहात तक ताबड़तोड़ छापे मारे थे। इस दौरान कई प्रतिष्ठानों पर टैक्स चोरी पकड़ी गई थी। विभाग की ओर से व्यापारियों को सचेत किया गया था कि ग्राहकों को पक्का बिल दें और दुकानों में रखे स्टॉक और खरीद-फरोख्त का रिकॉर्ड को भी अपडेट रखें।

इसके बाद भी कोई खास बदलाव नहीं आया। खुद व्यापारियों का आरोप है कि जिले में ज्यादातर व्यापारी जीएसटी नियमों का पालन नहीं कर रहे हैं। इससे सरकार को तो राजस्व की क्षति हो ही रही है, उनका कारोबार भी पिछड़ रहा है।

हर व्यापार में गोलमाल, जीएसटी की अदायगी के बगैर खरीद-फरोख्त
जिले में किराना व्यापारी, हार्डवेयर, जनरल स्टोर्स, सर्राफा, लोहा, सीमेंट, कपड़ा, केमिस्ट, ऑटो पार्ट्स की छोटी बड़ी हजारों दुकानें हैं। इन पर हर दिन 50 हजार रुपये से लेकर पांच लाख रुपये तक का कारोबार होता है। ज्यादातर व्यापारी ग्राहकों को कच्चा बिल थमाकर खिसका देते हैं।

शादी के सीजन में सबसे ज्यादा खेल होता है। फर्नीचर, बर्तन, कपड़े का काफी कारोबार तो बिना बिल के ही हो जाता है या साधारण बिल बनाकर दे दिया जाता है। इन बिलों पर जीएसटी का नंबर ही नहीं होता, न ही जीएसटी जोड़ा जाता है। मॉल, शोरूम और बड़ी दुकानों पर ही जीएसटी जुड़ा हुआ बिल दिया जा रहा है।

इस तरह होता है खेल...
जीएसटी काउंसिल ने 50 हजार रुपये से ज्यादा कीमत के माल की खरीदफरोख्त पर ई-वे बिल जेनरेट करना अनिवार्य किया है। 24 घंटे के अंदर ई-वे बिल निरस्त कराने का विकल्प भी कारोबारियों को दिया गया है। इसका उपयोग टैक्स चोरी के लिए खूब हो रहा है। बताया जाता है कि माल व्यापारी और कारोबारी के गोदाम में पहुंचने के बाद ई-वे बिल कैंसिल हो जा रहा है। इसकी वजह से पूरा का पूरा माल ही दो नंबर का हो जा रहा है।

फायदे में हैं नंबर दो वाले...
जिले में कच्चे बिल पर बड़े पैमाने पर व्यापार हो रहा है। इसका नुकसान नंबर एक में कारोबार करने वाले व्यापारियों को हो रहा है। ग्राहकों की ओर से पक्का बिल न मांगना भी बड़ा कारण है कि इन कारोबारियों को टैक्स चोरी का मौका मिलता है--- राजेश जसौरिया, व्यापारी नेता।

कच्चे बिल पर व्यापार वहीं कर सकता है, जो टैक्स की चोरी करके माल मंगाता हो। जो व्यापारी जीएसटी देकर माल मंगाएगा, वह टैक्स की चोरी क्यों करेगा। क्योंकि वह तो टैक्स देकर माल मंगा रहा है। ग्राहकों को भी पक्का बिल मांगना चाहिए--- मनोज मंगल, सीए।

अयूब खां चौराहे के पास एक ऑटो पार्ट्स की दुकान से करीब पांच हजार रुपये का सामान मंगलवार को खरीदा। जब बिल देने की बात कही तो उसने कागज पर सामान और उसकी धनराशि लिखकर दे दी। भुगतान ऑनलाइन खाते में किया---सचिन, ग्राहक।

व्यापारियों के साथ बैठक की जा रही हैं। उन्हें सचेत किया जा रहा है कि पारदर्शिता के साथ कारोबार करें। कच्चे बिल पर व्यापार की शिकायत फिलहाल नहीं हैं। अगर इस तरह का कोई मामला आता है तो जांच कराकर कार्रवाई की जाएगी---ओपी चौबे, अपर आयुक्त ग्रेड-1, राज्य कर विभाग।

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