बरेली : संपत्ति का प्रयोग कॉमर्शियल लेकिन टैक्स आवासीय, अब नहीं चलेगा
अब दलालों की दाल गलना होगी मुश्किल, मुट्ठी गर्म करने वाले कर्मचारियों पर भी नजर
बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के टैक्स विभाग में चली रही अंधेरगर्दी अब आसान नहीं रही है। काॅमर्शियल प्रयोग कर आवासीय टैक्स अब नहीं चल पाएगा। जीआईएस सर्वे की वजह से दलालों की दाल गलना भी उतना आसान नहीं रहा है। इसके लिए टैक्स विभाग हर जोन में कुछ बड़ी संपत्तियों की जांच करा रहा है। साथ ही कहीं से गड़बडी मिलने पर उसकी भी जांच की जा रही है।
नगर निगम के सभी जोन में पूर्व के अफसरों ने स्वहित में निगम का लाखों का नुकसान किया। बड़ी संपत्ति का आकलन कम करके या उसकी वास्तविक नाप के अनुसार टैक्स नहीं लगाकर निगम को हानि पहुंचाने में संकोच नहीं किया। कई मामले सामने भी आए और संबंधित पर कार्रवाई भी की गई है लेकिन अब जीआईएस सर्वे के बाद यह काम मुश्किल होता जा रहा है। सर्वे के बाद हर जोन में 10- 10 संदिग्ध कामर्शियल संपत्तियों की जांच कराई जा रही है। इसमें शहर के नामी लोगों की भी संपत्तियां शामिल हैं।
कुछ लोगों की संपत्तियां ऐसी हैं जिनमें आईडी कोड जो दिया गया है वह सिस्टम में खुल नहीं रहा है। छह और सात अंकों वाली आईडी के बीच कुछ संदिग्ध आइडी ऐसी हैं जो चार अंकों की है। पॉश इलाके में संपत्ति है। टैक्स दाता का नाम और मोबाइल नंबर भी दर्ज है लेकिन टैक्स की रकम काफी कम है। राजेन्द्र नगर में व्यावसायिक काॅम्प्लेक्स हो या रामपुर रोड के कॉम्प्लेक्स जहां भी संपत्ति और टैक्स गणना में अंतर मिल रहा है उसकी जांच कराई जा रही है। इसके सकारात्मक परिणाम भी सामने आए हैं। आवासीय कालोनियों में खुले नर्सिंग होम को आवासीय में दर्ज कर वसूले जा रहे टैक्स को भी जांच के दायरे में लाया गया है।
सीटीओ पीके मिश्रा ने बताया कि निगम में इस तरह की धांधली की जानकारी मिलने पर उसकी सत्यता परखी जा रही है। कुछ शिकायतें तो सही मिली हैं लेकिन अधिकांश में जैसा बताया गया वैसा नहीं मिला है। सर्वे के बाद अब सब सामने आ जाएगा।
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