बरेली : बिथरी पुलिस की गलत रिपोर्ट पर एसपी, सीओ और इंस्पेक्टर कोर्ट में तलब
मामला लघुवाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत के संज्ञान में आया
बरेली, अमृत विचार। थाना बिथरी चैनपुर पुलिस को विधिक जानकारी का अभाव है। आए दिन अदालत गलत एफआईआर लिखने पर चेताती है मगर बिथरी पुलिस गलती को सुधारने के बजाए लगातार गलती कर थाने के साथ-साथ अधिकारियों की भी फजीहत करवाने से बाज नहीं आ रही है। बुधवार को फिर ऐसा ही एक मामला लघुवाद न्यायाधीश रवि कुमार दिवाकर की अदालत के संज्ञान में आया। कोर्ट ने एसपी सिटी राहुल भाटी, सीओ थर्ड आशीष प्रताप सिंह, थानाध्यक्ष बिथरी चैनपुर अश्वनी कुमार को नोटिस भेज तलब किया है।
31 अगस्त को ग्राम सहजनपुर में भंडारे में हुए विवाद में वादी रमेश चंद्र की तहरीर पर एसएसपी के आदेश पर बिथरी चैनपुर थाने में योगेंद्र, प्रेमपाल, सिन्धू, नन्हीं देवी, छक्कन, निर्दोष आदि के विरुद्ध हत्या की कोशिश समेत गंभीर धाराओं में रिपोर्ट दर्ज हुई थी। जब कोर्ट के समक्ष एफआईआर और तहरीर पेश हुई तो न्यायाधीश ने पाया कि आईपीसी की धारा 397 तब लगती है, जब लूट या डकैती करते समय अपराधी किसी घातक आयुध का प्रयोग करेगा, या किसी व्यक्ति को घोर हानि कारित करेगा या किसी व्यक्ति की मृत्यु करने का प्रयत्न करेगा, जिसमें धारा 307 समाहित है। पुलिस ने मामले में आईपीसी की 397 और 307 दोनों धाराओं को एक साथ लगा दिया। थाने के मोहर्रिर ने गलत धारा में मुकदमा तो दर्ज किया ही, उस पर थाना प्रभारी अश्वनी कुमार ने हस्ताक्षर भी किए।
अपने अधीनस्थों पर पर्यवेक्षण ठीक नहीं
कोर्ट ने टिप्पणी की कि चूंकि संपूर्ण थाने की जिम्मेदारी थानाध्यक्ष की होती है। थानाध्यक्ष ने रूटीन तरीके से चिक पर साइन करके पेशी को भेज दिया। सीओ आशीष प्रताप सिंह भी पेशी क्लर्क के द्वारा जैसे ही कोई रिपोर्ट की जाती है उस पर हस्ताक्षर कर देते हैं उनके द्वारा न्यायिक मस्तिष्क का प्रयोग नहीं किया जाता है। आदेश में अदालत ने उल्लेख किया कि वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों का कर्तव्य और दायित्व होता है कि वह अपने अधिनस्थों पर उचित पर्यवेक्षण बनाए रखें। ऐसा प्रतीत होता है अधिकारियों द्वारा विधिक कार्यों में कोई रुचि नहीं ली जा रही है और उसे एक रूटीन कार्य माना जा रहा है।
कोर्ट ने एसपी सिटी राहुल भाटी को नोटिस भेज तलब किया है कि कारण स्पष्ट करें कि गलत धारा में एफआईआर लिखने के कारण कोर्ट यह क्यों न माने की कि उनको विधिक जानकारी का अभाव है और क्यों न निष्कर्ष निकालें कि आपका अपने अधीनस्थों पर पर्यवेक्षण ठीक नहीं है। स्पष्ट करें कि आपके विरुद्ध कार्रवाई के लिए शासन को भेजा जाए। कोर्ट ने एसपी और सीओ को 4 सितंबर को तलब किया है। वहीं इंस्पेक्टर से 5 सितंबर को स्पष्टीकरण मांगा है। आदेश की एक प्रति एडीजी बरेली जोन को भी भेजी गयी है।
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