शाहजहांपुर: पंचायत राज विभाग में खत्म होगा भाई-भतीजावाद

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अब जिपं अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख, प्रधान रिश्तेदारों को नहीं दे सकेंगे ठेके

शाहजहांपुर, अमृत विचार। अब पंचायत राज विभाग में भाई-भतीजावाद खत्म होगा। अब जिला पंचायत अध्यक्ष, ब्लॉक प्रमुख और ग्राम प्रधान सहित अन्य विभागीय पदाधिकारी अपने रिश्तेदारों को ठेका नहीं दे सकेंगे। रिश्तेदारों से सामग्री भी नहीं ले सकेंगे। डीपीआरओ ने इसके लिए आदेश जारी कर दिया है।

रिश्तेदारों को ठेका देने वालों पर कार्रवाई की जाएगी। इस संबंध में जिले के सभी बीडीओ को आदेश भेज दिया गया है। अब अगर कोई विभाग से जुड़ा प्रधान व पंचायती राज विभाग में चुने गए जनप्रतिनिधि, पदाधिकारी और इनके अफसर या कर्मचारियों के नजदीकी रिश्तेदारों की फर्मों को केंद्रीय वित्त आयोग एवं राज्य वित्त आयोग के बजट से विभिन्न सामग्रियों की आपूर्ति का ठेका नहीं दिया जा सकेगा। अगर कोई ऐसा करता है तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।

डीपीआरओ घनश्याम सागर ने जिले के सभी बीडीओ को भेजे आदेश में कहा है कि सचिव पंचायतीराज विभाग की ओर से जिलाधिकारी को इस संबंध में शासनादेश भेजा गया है। जिसमें कहा गया है कि पंचायती राज विभाग से जुड़े पदाधिकारियों, कर्मियों या उनके नजदीकी रिश्तेदारों की बनाई गई फर्म को कार्य न करने दिया जाए। वित्त आयोग के अंतर्गत मैटेरियल, ईंधन, स्टेशनरी व अन्य सामग्री अथवा सेवाओं की आपूर्ति के लिए जिला पंचायत अध्यक्ष, जिला पंचायत कर्मचारी, जिला पंचायत राज अधिकारी,

क्षेत्र पंचायत प्रमुख, खंड विकास अधिकारी, सहायक विकास अधिकारी (पंचायत), प्रधान, ग्राम पंचायत सचिव, पंचायत सहायक, पंचायती राज विभाग के कर्मी और विभाग में संविदा कर्मियों के पारिवारिक सदस्यों व रिश्तेदारों द्वारा स्थापित फर्म/कंपनीज से वेंडर के रूप में कार्य नहीं लिया जाएगा। वित्त आयोग के अंतर्गत पीएफएमएस पर वेंडर के रूप में रजिस्टर्ड फर्म की पृष्ठभूमि की एक बार फिर से जांच कराई जाए। इन निर्देशों का कड़ाई से अनुपालन हो।

ये रिश्तेदार नहीं ले सकेंगे ठेका
रिश्तेदार का आशय स्पष्ट करते हुए आयुक्त ने पत्र में कहा है कि जिला पंचायत सेवा नियमावली-1970 के अनुसार पिता, पितामह, ससुर, चाचा, मामा, पुत्र, पौत्र, दामाद, भाई, भतीजा, भांजा, सगा चचेरा या ममेरा भाई, पत्नी का भाई, बहनोई, पति का भाई, पति, पति की बहन, पत्नी की बहन, पत्नी, पुत्री, पुत्रवधु, भाभी जो भाई या सगे चचेरे या ममेरे भाई की पत्नी हो, माता, सास, चाची और मामी शामिल हैं।

खेल किए जाने की आती हैं शिकायतें
ग्राम पंचायतों में इंटरलाकिंग, खड़ंजा, सीमेंटेड बेंच आदि के नाम पर हर वर्ष चार करोड़ से अधिक रुपये का भुगतान होता है। यह भुगतान सामग्री उपलब्ध कराने वाली फर्म पर होता है। सामग्री के भुगतान के नाम पर खेल किए जाने की शिकायतें समय-समय पर आती रहती हैं। एक ओर जहां फर्म संचालक ग्राम प्रधान, सचिव व अन्य अपने भाई, रिश्तेदार व परिवार के लोगों के नाम फर्म रजिस्टर्ड करके उसमें भुगतान कर रहे हैं, वहीं दूसरी ओर कई ऐसे संचालक हैं जो बिना जीएसटी जमा किए धनराशि को निकाल ले रहे हैं।

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