बरेली: चार-चार साल से लटके जमीनों के दाखिल-खारिज के केस, जिले की तहसीलों में 1,792 मामले लंबित

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मीरगंज, नवाबगंज और आंवला तहसीलों में लंबित हैं सर्वाधिक मामले

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बरेली, अमृत विचार। राजस्व रिकॉर्ड में जमीनों के दाखिल-खारिज (स्वामित्व परिवर्तन) की अधिकतम समय सीमा शासन की ओर से तो सिर्फ 45 दिन की तय की गई है लेकिन सिस्टम की सुस्ती इसे सालों तक खींच रही है। जिले के राजस्व न्यायालयों में डेढ़ हजार से ज्यादा मामले लंबित हैं जिनमें कई को तो चार-चार साल हो चुके हैं। सबसे ज्यादा खराब स्थिति मीरगंज, आंवला और नवाबगंज तहसील की है। उन जमीनों का भी दाखिल-खारिज कराने में लोगों के पसीने छूट रहे हैं जिनकी लाखों कीमत अदा कर उन्होंने बैनामा कराया है।

किसी भी जमीन की खरीद-फरोख्त होने के बाद राजस्व रिकॉर्ड में जमीन बेचने वाले का नाम हटाकर उसका स्वामित्व खरीदने वाले के नाम दर्ज किया जाता है। राजस्व विभाग में इसी को दाखिल-खारिज कहते हैं। जमीन की रजिस्ट्री के बाद दाखिल-खारिज कराना अनिवार्य है। शासन के नियमों के मुताबिक 45 दिन में यह प्रक्रिया पूरी हो जानी चाहिए। अक्सर किसी मामले में आपत्ति लगने पर कुछ समय बढ़ जाता है, लेकिन जिले में तमाम केस ऐसे हैं जिनमें लोग दाखिल-खारिज के लिए दो या चार साल से दौड़ लगा रहे हैं।

अगस्त 2023 में सदर तहसील में 106, बहेड़ी में 152, आंवला में 411, नवाबगंज में 386, फरीदपुर में 257, मीरगंज में 480 दाखिज खारिज के मामले अटके हुए थे। सभी तहसीलाें के राजस्व न्यायालयों में कुल मिलाकर दाखिल-खारिज की 1792 से ज्यादा फाइलें धूल फांक रहीं हैं। इनमें काफी फाइलें जो तीन से चार साल पुरानी भी हैं। परेशान लोग अफसरों के चक्कर काट रहे हैं लेकिन दाखिल-खारिज के मामले अटके हुए हैं।

कहते हैं... आपत्तियां सबसे ज्यादा सिरदर्द
राजस्व विभाग के अधिकारियों की सफाई है कि दाखिल-खारिज के मामलों में आपत्तियां सिरदर्द साबित होती हैं। ऐसी स्थिति में राजस्व न्यायालयों में सुनवाई की जाती है और मामला तारीख दर तारीख खिंचता रहता है। सुनवाई के दौरान भी कोई न कोई पेच फंस जाता है और मामले लंबे समय तक खिंच जाते हैं। कभी आपत्ति लगाने वाला हाजिर नहीं होता तो कभी कोई और कारण मामले को लंबा कर देते हैं। हालांकि अक्सर राजस्व अधिकारियों पर भी आरोप लगते रहते हैं।

अगस्त में 1,080 मामलों का निस्तारण
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक अगस्त में दाखिल-खारिज के 1080 मामलों का निस्तारण हुआ है। इनमें सदर में 219, बहेड़ी में 211, आंवला में 156, नवाबगंज में 196, फरीदपुर में 232, मीरगंज में 175 मामलों का निस्तारण किया गया।

जिन मामलों में आपत्ति नहीं लगती है ताे उनका 45 दिन की समय सीमा में ही निस्तारण राजस्व न्यायालय कर देती हैं। आपत्ति के कारण निस्तारण में समय लगता है। फिर भी कोशिश करते हैं कि कम से कम समय में मामलों का निस्तारण कर दिया जाए---दिनेश, एडीएम प्रशासन।

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