बरेली: बिना पूछे सीटें लॉक करने की मिलीं 21 शिकायतें
बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध बरेली और मुरादाबाद मंडल में कई महाविद्यालय अभ्यर्थियों से पूछे बिना ही सीटें लॉक कर रहे हैं। इससे अभ्यर्थी अपने पसंदीदा महाविद्यालय में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। अब तक रुविवि प्रशासन के पास 21 शिकायतें आ चुकी हैं, जिनकी सीटें महाविद्यालयों ने …
बरेली, अमृत विचार। महात्मा ज्योतिबा फुले (एमजेपी) रुहेलखंड विश्वविद्यालय से संबद्ध बरेली और मुरादाबाद मंडल में कई महाविद्यालय अभ्यर्थियों से पूछे बिना ही सीटें लॉक कर रहे हैं। इससे अभ्यर्थी अपने पसंदीदा महाविद्यालय में प्रवेश नहीं ले पा रहे हैं। अब तक रुविवि प्रशासन के पास 21 शिकायतें आ चुकी हैं, जिनकी सीटें महाविद्यालयों ने अनलॉक कराई हैं। इनमें से नौ मामले सिर्फ बरेली कॉलेज के हैं, जहां छात्र प्रवेश तो बरेली कॉलेज में लेना चाहते थे लेकिन उनकी सीटों को लॉक अन्य महाविद्यालयों ने कर दिया था।
ऑनलाइन प्रवेश की प्रक्रिया शुरू होने से पूर्व ही रुविवि की कुलसचिव डा. सुनीता पांडेय ने पत्र जारी किया था। इस पत्र में विश्वविद्यालय से संबद्ध सभी महाविद्यालयों के प्राचार्यों को निर्देशित किया था कि वे अभ्यर्थियों की इच्छा के बिना, धोखे या फिर जबरदस्ती से अपने महाविद्यालय में प्रवेश न करें। उन्होंने यह भी कहा था कि कुछ महाविद्यालयों ने छात्र-छात्राओं की मर्जी के बिना प्रवेश सुनिश्चित हो जाने का मैसेज भेजा था।
कुलसचिव ने स्पष्ट किया था इस तरह का कार्य रुविवि की ओर से जारी किए गए निर्देशों की अवमानना की श्रेणी में आता है और ऑनलाइन प्रवेश के लिए दिए गए निर्देशों का पालन न करने वाले महाविद्यालयों के खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
रुविवि के निर्देश देने के बावजूद महाविद्यालय मनमानी करने से बाज नहीं आ रहे हैं।
सूत्रों की मानें तो सैकड़ों की संख्या में छात्र-छात्राओं की मर्जी के बिना ही महाविद्यालयों ने उनकी सीटें लॉक कर दी हैं। अब रुविवि प्रशासन ऐसे सभी छात्र-छात्राओं के बारे में सूचनाएं एकत्र कर रहा है, जिससे उनकी सीटें अनलॉक की जा सकें।
“रुविवि की ऑनलाइन प्रवेश प्रक्रिया में छात्रों की मर्जी के बिना महाविद्यालयों द्वारा सीटें लॉक करने की सूचना आ रही है। ऐसे जो भी एडमिशन हुए हैं, उनकी जानकारी जुटाई जा रही है। इसके बाद विवि प्रशासन द्वारा उनकी सीटें अनलॉक कराई जाएंगी साथ ही उन महाविद्यालयों से स्पष्टीकरण भी मांगा जाएगा।” —डा. अमित सिंह, मीडिया प्रभारी, रुहेलखंड विश्वविद्यालय
