Kanpur News: हैलट में कम पड़े बेड, रिपोर्ट नहीं आने से इलाज में देरी, इतने मरीज पहुंच रहे रोजाना

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के हैलट अस्पताल में वायरल बुखार के मरीज रोजाना पहुंच रहे है।

कानपुर के हैलट अस्पताल में वायरल बुखार के मरीज रोजाना पहुंच रहे है। हैलट में बेड की कमी होने पर कुछ मरीजों को प्रमुख अधीक्षक के कार्यालय के बाहर रुकना पड़ा।

कानपुर, अमृत विचार। वायरल बुखार व डेंगू की वजह से शहरी व ग्रामीण दोनों ही क्षेत्र के लोग परेशान हैं। दोनों के लक्षण सामान्य होने से डॉक्टर अपने अनुभव से मरीजों का इलाज कर रहे हैं। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज से भेजे गए मरीजों के सैंपल की रिपोर्ट नहीं आने से मरीजों को आराम मिलने में देरी हो रही है। हैलट में बेड की कमी होने पर कुछ मरीजों को प्रमुख अधीक्षक के कार्यालय के बाहर रुकना पड़ा।

जिले में डेंगू के साथ ही हाई ग्रेड वायरल बुखार तेजी से लोगों में फैल रहा है। हैलट अस्पताल की मेडिसिन ओपीडी में शनिवार को साढ़े तीन सौ से अधिक मरीज इलाज कराने को पहुंचे। इनमे से हर तीसरा मरीज बुखार, खांसी, गले में संक्रमण, जोड़ों में दर्द, कमजोरी, पेट व सिर में दर्द जैसी समस्या से ग्रस्त था। बाल रोग में भी बुखार से ग्रस्त बच्चों को संख्या अधिक रही।्र

 उर्सला, केपीएम और कांशीराम संयुक्त अस्पताल में भी मरीजों की काफी भीड़ रही। जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के डॉक्टरों ने वायरल की पहचान के लिए 14 दिन पहले डेंगू और हाई ग्रेड बुखार वाले रोगियों के सैंपल लखनऊ स्थित केजीएमयू भेजे थे, लेकिन  सैंपलों की रिपोर्ट अभी तक नहीं आ सकी है। ऐसे में डॉक्टरों के लिए मरीजों का इलाज कर पाना मुश्किल हो रहा है।

शनिवार को हैलट अस्पताल की इमरजेंसी में 38 मरीज भर्ती किए गए।  शुक्रवार रात को वार्ड में मरीजों की संख्या अधिक होने पर तीमारदार उनको स्ट्रेचर से प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह के कार्यालय के पास ले गए। जानकारी होने पर प्रमुख अधीक्षक व कैंपस प्रभारी डॉ.अनुराग राजौरिया मौके पर पहुंचे और मरीजों को भर्ती कराया।

स्क्रब टायफस की जांच को गए है सैंपल

जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के माइक्रो-बायोलॉजी विभाग ने केजीएमयू ने स्क्रब टायफस की जांच के लिए दो सितंबर को 21 सैंपल भेजे थे। मेडिसिन विभाग के आचार्य डॉ. एसके गौतम ने बताया कि जो भी मरीज तेज बुखार के आ रहे हैं। उन्हें तुरंत भर्ती किया जा रहा है, क्योंकि कई मरीजों में डेंगू, मलेरिया व हाई ग्रेड फीवर के मिश्रित लक्षण देखने को मिल रहे हैं। लेकिन यह नहीं कहा जा सकता कि सही बीमारी क्या है और कौन सा वायरस प्रभावी है। यह रिपोर्ट आने पर स्पष्ट होगा। संचारी रोग के नोडल अधिकारी व वरिष्ठ फिजीशियन डॉ. बीपी प्रियदर्शी के मुताबिक जिन मरीजों में तेज बुखार की समस्या है, उनको लिवर से संबंधित समस्या हो रही है।

 

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