Kanpur में शोर बना रहा बहरा और बढ़ा रहा बीपी, रात के समय शांत क्षेत्र भी रहते अशांत, चौंकाने वाली रिपोर्ट आई सामने

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

शहर में शोर बना रहा बहरा और बढ़ा रहा बीपी।

शहर में शोर बना रहा बहरा और बीपी बढ़ा रहा। वहीं, रात के समय शांत क्षेत्र भी अशांत रहते है। इसके साथ ही पहले से तीन गुणा कान के रोगी बढ़ गए।

कानपुर, अमृत विचार। शहर के अस्पताल, स्कूल-कॉलेज और शिक्षण संस्थानों के आसपास का क्षेत्र दिन तो छोड़िए रात में भी अशांत रहता है। इन स्थानों पर शोर का स्तर मानक से काफी ज्यादा मिला है। इसी तरह आवासीय क्षेत्रों में भी रात के समय काफी शोर दर्ज हुआ है। यह रिपोर्ट उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड ने जारी की है। चिकित्सकों के मुताबिक बढ़ता ध्वनि प्रदूषण शहर में लोगों को परेशान करने के साथ तनाव और चिड़चिड़ापन दे रहा है। कान के मरीज तीन गुणा बढ़ गए हैं।

लोगों को पल्स रेट और बीपी बढ़ने की समस्या का भी सामना करना पड़ रहा है। 
उत्तर प्रदेश प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड द्वारा चार क्षेत्रों आवासीय, वाणिज्यिक, औद्योगिक और शांत क्षेत्र के आधार पर कानपुर में ध्वनि प्रदूषण का आकलन किया गया है। क्षेत्रीय प्रदूषण कार्यालय के विशेषज्ञों ने साउंड लेवल मीटर और मैनुअल नॉइस मॉनीटरिंग सिस्टम की मदद से इन क्षेत्रों में अध्ययन किया।  सुबह छह से रात 10 बजे और रात में 10 से सुबह छह बजे के बीच आंकड़े लिए गए।  

शहर में औसत ध्वनि प्रदूषण 

क्षेत्र           दिन                    रात 
आवासीय    60.37                45.02
वाणिज्यिक   70.21                53.76   
औद्योगिक    80.01               69.29
शांत         51.46               40.79

ध्वनि प्रदूषण का मानक 

क्षेत्र              दिन               रात 
आवासीय         55               45
वाणिज्यिक        65               55   
औद्योगिक         75                70
शांत              50                 40

सबसे ज्यादा हॉर्न का शोर रेलवे क्रासिंग पर कानफोड़ू
  
प्रदूषण बोर्ड अधिकारियों के मुताबिक शहर में सबसे ज्यादा शोर वाहनों के हॉर्न से है। यह स्थिति जाम में और विकराल हो जाती है। अनवरगंज-मंधना रेलवे लाइन पर एक दर्जन से अधिक रेलवे क्रॉसिंग है। यहां ट्रेनों की आवाजाही से वाहनों की लंबी लाइन लगती है। पहले निकलने और जल्दबाजी की होड़ में हॉर्न और हूटर का बेवजह उपयोग किया जाता है। इस रेलवे लाइन के किनारे आवासीय क्षेत्रों में ध्वनि प्रदूषण कानफोड़ू मिला है।  

यहां बज रही चेतावनी की घंटी

आवासीय :  गोविंद नगर, किदवई नगर, कर्रही रोड, गुजैनी, चिड़ियाघर रोड, नौबस्ता हमीरपुर रोड, लाल बंगला, गांधी ग्राम, सेवा ग्राम, घंटाघर, सिविल लाइंस, आर्य नगर। 

वाणिज्यिक : बिरहाना रोड, ग्वालटोली बाजार, हालसी रोड, गोविंद नगर, कल्याणपुर पनकी रोड, पी रोड, जरीब चौकी व गल्ला मंडी। 

औद्योगिक : दादा नगर, रूमा, जाजमऊ, पनकी क्षेत्र में दिन के समय वाहनों की आवाजाही से शोर का स्तर अक्सर खतरनाक हो जाता है।

 

तेज शोर या लंबे समय तक ध्वनि प्रदूषण के बीच रहने से सुनने की क्षमता प्रभावित होती है। यह प्रक्रिया कई दिनों तक रहने पर स्थिति और बिगड़ जाती है। अचानक से तेज आवाज होने पर कई मामलों में कान के पर्दे से खून निकलने लगता है। ज्यादातर लोगों को चक्कर आना और उल्टी की समस्या होती है। ध्वनि प्रदूषण की वजह से शहर में तीन गुणा कान के रोगी बढ़ गए हैं।-  डॉ. देवेंद्र लालचंदानी, वरिष्ठ नाक, कान, गला रोग विशेषज्ञ।  

अत्याधिक शोर से मानसिक उलझन बढ़ सकती है। यह हृदय रोगियों और ब्लड प्रेशर के मरीजों के लिए खतरनाक होता है। इसकी वजह से पल्स रेट और बीपी बढ़ जाता है। हार्ट अटैक आने की संभावना रहती है।- प्रो. नीरज कुमार, कार्डिक सर्जन, कार्डियोलॉजी इंस्टीट्यूट।

संबंधित समाचार