घरेलू हिंसा अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करने के लिए एक्ट में परिभाषित विशिष्ट घटना होना आवश्यक
प्रयागराज। इलाहाबाद हाईकोर्ट ने घरेलू हिंसा से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए कहा कि केवल घरेलू संबंध होना ही पर्याप्त नहीं है बल्कि घरेलू हिंसा अधिनियम की धारा 3 के तहत परिभाषित घरेलू हिंसा की कोई विशिष्ट घटना होने पर ही व्यक्ति को घरेलू हिंसा का पीड़ित माना जा सकता है। उक्त टिप्पणी न्यायमूर्ति दिनेश पाठक की एकलपीठ ने घरेलू हिंसा की धारा 12 के तहत वीरेंद्र कुमार कुशवाहा व चार अन्य के खिलाफ दर्ज शिकायत के मामले में घरेलू हिंसा से महिलाओं की सुरक्षा अधिनियम, 2005 की धारा 23 के तहत सिविल जज, कौशांबी द्वारा पारित समन आदेश को चुनौती देने वाली याचिका पर सुनवाई के दौरान की।
मामले के अनुसार विपक्षी का विवाह याची के साथ वर्ष 2019 में हुआ था। घरेलू कलह के कारण विपक्षी ने घरेलू हिंसा की धारा 12 के तहत अपने पति और ससुराल वालों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई। ट्रायल कोर्ट ने याचियों के खिलाफ समन जारी किया और प्रोबेशन ऑफीसर को अपनी रिपोर्ट प्रस्तुत करने का निर्देश दिया। औपचारिक जांच के बाद रिपोर्ट प्रस्तुत कर दी गई, जिसके आधार पर एक पक्षीय आदेश पारित कर विपक्षी को अंतरिम भरण-पोषण प्रतिमाह 3000 देने का निर्देश दिया गया।
मौजूदा याचिका पर विचार करते हुए हाईकोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता द्वारा पति के परिवार के सभी सदस्यों के नाम उन्हें घरेलू हिंसा के तहत कानूनी प्रावधानों की जटिलता में फंसाने के लिए आकस्मिक तरीके से लिए गए हैं। यह अदालत की प्रक्रिया का दुरुपयोग करने के अलावा और कुछ नहीं है। केवल घरेलू संबंध के आधार पर घरेलू हिंसा का मामला दर्ज नहीं करवाया जा सकता है।
इसके लिए घरेलू हिंसा अधिनियम में परिभाषित किसी विशेष घटना का होना आवश्यक है। अंत में मामले की स्थितियों पर विचार करते हुए न्याय के हित में याचिका को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए याची को जिला अदालत के समक्ष अपना पक्ष रखने के लिए एक अर्जी दाखिल करने का निर्देश दिया है, साथ ही संबंधित न्यायालय को याची की अर्जी पर तीन सप्ताह के अंदर न्यायोचित फैसला करने का आदेश दिया है।
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