Kanpur: राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एचबीटीयू में 713 छात्र-छात्राओं को दी उपाधियां, बोली- गांव के छात्रों को यूनिवर्सिटी से जोड़ें
कानपुर में एचबीटीयू के छात्र-छात्राओं को राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने उपाधियां दी।
कानपुर में राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने एचबीटीयू में 713 छात्र-छात्राओं को उपाधियां दी। इसमें 47 मेधावियों को कुलाधिपति और कुलपति पदक से सम्मानित किया गया।
कानपुर, अमृत विचार। आज हमारे देश में टैलेंट है। तकनीक विकसित कर रहे हैं, फिर भी विदेश की ओर क्यों ध्यान दिया जा रहा है। आज देश की प्रतिभा को आगे ले जाया जा रहा है। गांव के बच्चों को यूनिवर्सिटी से जोड़ा जाए। यह बात राज्यपाल और कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने कही। वह शुक्रवार को हरकोर्ट बटलर टेक्निकल यूनिवर्सिटी (एचबीटीयू) के पांचवें दीक्षांत की अध्यक्षता कर रहीं थी।
उन्होंने कहा कि आज जो कार्यक्रम सबसे आखिरी में हुआ, बच्चों को स्कूल बैग दिया, फल दिए गए। यह उसी स्कूल के बच्चे हैं, जहां एचबीटीयू के कुलपति ने पढ़ाई की। ऐसे कार्यक्रमों में जब बच्चे जाते हैं तो उनको सीखने और आगे बढ़ने की सीख मिलती है। डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम के स्कूल और घर को देखने रामेश्वरम गए। उनका स्कूल छोटा सा था। टूटी फूटी बेंच थी।
उनके घर मे भी कोई सुविधा नहीं थी। फिर भी दुनिया का सबसे नामी वैज्ञानिक इस धरती से पैदा हुआ। छात्रों को दीक्षांत समारोह में मेडल मिला, इसके लिए बधाई। कल सीएसजेएमयू में चार पूर्व छात्र मिले। उन्होंने चंद्रयान मिशन में योगदान दिया है। उन लोगों ने छोटे छोटे स्कूलों, विश्वविद्यायलयों से पढ़ाई की। आज यही देश का नाम रोशन कर रहे हैं। नैक की ग्रेडिंग में पर्यावरण संरक्षण, क़्वालिटी बढ़ानी होगी।
नैक से ज्यादा एनआईआरएफ में अच्छा प्रदर्शन करना होगा। मैं आपको धीरू भाई अंबानी की बात बताना चाहती हूं। वह दस रुपये कमाते थे और पांच रुपये की चाय पीट थे। लोगों ने कहा कि वह दस रुपये में आधे पैसे क्यों खर्च करते हो। इस पर धीरू भाई ने कहा कि वह जहां जाकर चाय पीते हैं, वहां उनको बिजनेस में आगे आने और बढ़ने की जानकारी मिलती है।
इसी का नतीजा है कि आज रिलायंस दुनिया की नामी कंपनी है। आप लोग डिजाइन करते हैं इसका ध्यान रखने का जरूरत है। पुल बनाते हैं, ब्रिज बनाते हैं, सड़क निर्माण करते हैं, कभी स्कूल के टॉयलेट की डिजाइन बनाकर देखें। बच्चे क्या हाथ धो पा रहे हैं या नहीं। अस्पताल का डिजाइन करें। गुजरात मे पीडब्ल्यूडी मंत्री तो वहां काफी डिजाइन बदलवाई। चिनाब नदी पर दुनिया का सबसे बड़ा ब्रिज बन रहा है।
काशी में डिजाइन बना, इसको भारतीय छात्रों ने बनाया है। बिहार में कुछ दिन पहले बारिश और बाढ़ से पुल बह गया। इसलिए क्वालिटी जरूरी है। अगर कहीं पांच साल में 50 करोड का प्रोजेक्ट है, उसको देर करने में बढ़ कर 60 करोड़ लागत आ जाती है। वंदे भारत इसका उदाहरण है। नवाचार करते समय इसका ध्यान रखा जाए। आजकल हॉस्पिटल और वृद्ध आश्रम की संख्या बढ़ रही है।
आखिर क्यों? माता पिता का शोषण कर पढ़ाई करते हैं। मुझे यह चाहिए, मुझे वह चाहिए। क्या यही शिक्षा है। आप कहीं भी रहें यह प्रण करें कि माता पिता की सेवा करें। मैं जेल का निरीक्षण करने जाती हूं। वहां दहेज हत्या में सजा काट रहे हैं। यूपी के युवा संकल्प लें न दहेज लेंगे, न देंगे। एक जेल में माताओं के साथ 43 बच्चे घे। आखिर उनका क्या दोष है। मैं बच्चों को लेकर जाती हूं। बंदियों से बात करती हूं तो वह पश्चात करते हैं। आप जैसे युवाओं को संकल्प लेना होगा। कुलाधिपति ने कहा कि कुलपति प्रो.समशेर को भी जेल में जाना चाहिए, अपराध करके नहीं।
वहां के हालात देखें समारोह में 47 मेधावियों को कुलाधिपति और कुलपति पदक से सम्मानित किया गया। केमिकल विभाग के अभिषेक ओझा को कुलाधिपति स्वर्ण पदक, खुशी रस्तोगी को रजत पदक और देवांशी तिवारी को कांस्य पदक मिला। इस बार पदक पाने में छात्रों ने बाजी मारी है। कुल 47 पदकों में से 31 छात्रों और 16 छात्राओं को दिए गए। समारोह में 713 छात्र-छात्राओं को उपाधियां मिलीं।
मुख्य अतिथि के रूप में आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो. केके पंत, प्राविधिक शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिब एम देवराज, महापौर प्रमिला पांडेय, विधायक महेश त्रिवेदी, स्वप्निल वरुण, एमएलसी अरुण पाठक, मौजूद रहै।
कार्यक्रम में उच्च प्राथमिक विद्यालय रामनगर, कल्याणपुर और उच्च प्राथमिक विद्यालय सरैया, घाटमपुर के 15-15 छात्र-छात्राओं को पुस्तकों का वितरण किया गया। सबसे पहले एकेडमिक काउंसिल, एग्जीक्यूटिव कॉउंसिल के सदस्यों की शोभायात्रा निकाली गई। जल संरक्षण का कार्यक्रम हुआ। कुलपति प्रो.समशेर ने विश्वविद्यालय की रिपोर्ट पढ़ी। उन्होंने विश्वविद्यालय के भविष्य की प्लानिंग बताई।
आईआईटी रुड़की के निदेशक प्रो.केके पंत ने बताया कि उन्होंने1987 से यहीं से बीटेक किया। यहां पर प्रो.समशेर के नेतृत्व में विश्वविद्यालय में बेहतर कार्य हो रहा है। यूनिवर्सिटी में एनईपी, स्टार्टअप आदि के क्षेत्र का ध्यान रखा गया है। जब हम व्यावसायिक दुनिया की बात करते हैं तो उनसे संभावनाएं बहुत हैं। इसमें आपकी स्किल्स, बातचीत करने का तरीका, चुनौतियों को सहन करने की क्षमता आपको आगे ले जाएगा। समाज मे प्लास्टिक वेस्ट, पॉल्युशन आदि के लिए लोगों को जागरूक करना होगा।
इतिहास में प्रौद्योगिकी का समाज पर पहले इतना प्रभाव नहीं पड़ा, जितना अभी है। हर किसी को नई और अनोखी चुनौतियों का सामना करना पड़ता है। जब हम बात विकास की करते हैं तो विरोधाभास का संतुलन बनाना पड़ता है। इसलिए नई नई तकनीक सीखना जरूरी है। चैट जीपीटी, आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस इसका उदाहरण हैं।
यह नई पीढ़ी के लिए बदलाव वाला समय है। नई टेक्नोलॉजी में काफी फ्लेक्सिबिलिटी है। इसका क्षेत्र भी काफी बड़ा है। फ़ूड, एनर्जी के बीच संतुलन रखना चाहिए। सफलता काफी कॉपी पेस्ट नहीं होती है। हमेशा समझिए मैं ग्रेट हूं,लेकिन आगे वाला भी ग्रेट है। स्मार्ट सिटी, मेक इन इंडिया, रूरल डेवलपमेंट, चंद्रयान मिशन पर ध्यान देना होगा।
