बरेली: कानून-व्यवस्था की ड्यूटी के बोझ से परेशान पुलिस महकमे के खिलाड़ी
शब्या सिंह तोमर, बरेली, अमृत विचार। खेलों में अपने प्रदर्शन से अपने अफसरों का सिर ऊंचा करने वाले पुलिस महकमे के खिलाड़ी अपनी सुविधाओं का ख्याल न रखे जाने की वजह से निराश हैं। खिलाड़ी के तौर पर महकमे में भर्ती होने के बावजूद उन पर न सिर्फ आम पुलिस कर्मियों की तरह ड्यूटी का बोझ है बल्कि दूरदराज थानों में तैनाती कर नियमित रूप से प्रैक्टिस करने की सुविधा भी छीन ली गई है।
बरेली के पुलिस महकमे में फिलहाल 27 पुरुष और 15 महिला खिलाड़ियों की तैनाती है। इन खिलाड़ियों की प्रमुख समस्या है कि महकमे की ओर से न उन्हें बेहतर डाइट के लिए कोई सुविधा दी जा रही है न प्रशिक्षण के लिए। तैनाती करने में भी यह ख्याल नहीं रखा जाता कि उन्हें प्रैक्टिस के लिए पर्याप्त समय मिल पाए। इनमें से ज्यादातर की तैनाती दूरदराज के थानों में है जहां न्यूनतम आठ घंटे की ड्यूटी के बाद प्रैक्टिस करना संभव नहीं हो पाता। ये खिलाड़ी चाहते हैं कि शेड्यूल के अनुसार उन्हें प्रैक्टिस का मौका दिया जाए।
मुश्किलों में भी बेहतरीन प्रदर्शन
मुख्य कोच के अनुसार इस साल अब तक बरेली पुलिस के महिला-पुरुष खिलाड़ियों की टीमों ने अलग-अलग खेलों में हिस्सा लेकर कई मेडल और पुरस्कार जीते हैं। इसमें फुटबॉल, हॉकी, वालीबॉल, हैंडबॉल, टेबल टेनिस, पंचिंग सलात, ताइक्वांडो और आर्म रेसलिंग में पहला स्थान पाया है। बॉक्सिंग और और क्रॉस कंट्री में बरेली पुलिस को दूसरा स्थान मिला है।
मायूसी... अच्छे प्रदर्शन के बावजूद सुविधाओं का कोई ख्याल नहीं
सिपाही कटार भाटी ने कुछ महीने पहले महाराष्ट्र में हुई अखिल भारतीय पावरलिफ्टिंग प्रतियोगिता में दूसरा और महिला सिपाही डॉली ने पंचिंग सलात प्रतियोगिता में तीसरा स्थान प्राप्त किया। दोनों खिलाड़ियों का दावा है कि उन्होंने कभी किसी प्रतियोगिता में विभाग को खाली हाथ नहीं लौटने दिया है, फिर भी पुलिस लाइन से काफी दूर उनकी तैनाती होने के कारण आने-जाने में काफी समय बर्बाद होता है। आठ घंटे की ड्यूटी 10-11 घंटे तक में तब्दील हो जाती है और उन्हें अभ्यास के लिए पूरा समय नहीं मिल पाता है।
डाइट अपने खर्च पर, कोच भी स्थाई नहीं
महिला और पुरुष दोनों खिलाड़ियों का कहना है कि उन्हें सेहत दुरुस्त रखने के लिए कोई विशेष आहार नहीं मिल पाता है। उन्हें खुद अपनी जेब से खर्च करना पड़ता है। कोच और पीटीआई भी तब नियुक्त किया जाता है, जब कोई टूर्नामेंट होता है। एकल प्रतिस्पर्धा के लिए खिलाड़ी अकेले स्पोर्ट्स कंट्रोल बोर्ड के शेड्यूल पर अभ्यास करते हैं। कभी किसी खिलाड़ी को चोट लग जाए तो समय पर डॉक्टर भी उपलब्ध नहीं होते।
आपबीती... खिलाड़ियों की ही जुबां से
बाधा दौड़ और आर्म रेसलिंग की खिलाड़ी महिला सिपाही वंदना के मुताबिक उनकी तैनाती फिलहाल मेरठ में है, उनका चयन यूपी टीम में इंडिया पुलिस के लिए हुआ है। जब वह बरेली में तैनात थी तो थाने में ड्यूटी के कारण प्रैक्टिस नहीं कर पा रही थीं। पुलिस लाइन में ड्यूटी होने पर उन्हें ड्यूटी के साथ प्रैक्टिस का समय मिल जाता है। वंदना ने बताया कि खिलाड़ियों की नियुक्ति करने के बाद विभाग उनकी प्रैक्टिस का ख्याल नहीं रखता देता है, उन्हें खुद किसी तरह समय निकालना पड़ता है।
नाम न छापने का आग्रह करते हुए एक महिला सिपाही ने बताया कि वह सौ मीटर रिले और खो-खो में 16 मेडल जीत चुकी हैं। इस समय उनकी तैनाती काफी दूर एक थाने में है, जहां से पुलिस लाइन के स्पोर्ट्स ग्राउंड पहुंचने में अच्छा-खासा समय लग जाता है। कुछ दिन बाद एथलेटिक्स प्रतियोगिता होनी है जिसे अभ्यास के लिए समय न मिलने की वजह से पाने के कारण उन्हें छोड़ना पड़ेगा। यह भी मुश्किल है कि हमें अपनी तैयारी और डाइट का खर्च खुद उठाना पड़ रहा है।
एथलेटिक्स के एक पुरुष सिपाही खिलाड़ी ने भी नाम न छापने का आग्रह करते हुए बताया कि थाने में लगातार ड्यूटी के कारण उनकी प्रैक्टिस नहीं हो पा रही है। इसका असर उनके प्रदर्शन पर पड़ रहा है।
कोई प्रतिस्पर्धा होती है तो खिलाड़ियों को अभ्यास करने का समय दिया जाता है। बाकी दिनों में वे तैनाती पर रहते हैं। मैं और सहायक कोच उप निरीक्षक दुष्यंत सिंह खिलाड़ियों को गहन अभ्यास कराते हैं। खिलाड़ियों ने कई प्रतियोगिताओं में अच्छा प्रदर्शन कर बरेली पुलिस को मेडल और शील्ड भी दिलाई हैं। - प्रदीप कसाना, मुख्य कोच
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