Kanpur News: कीटनाशक दवा से गर्भवतियों का बढ़ रहा बीपी, शोध के लिए प्रो.गरिमा गुप्ता को मिला राष्ट्रीय पुरस्कार
कानपुर में कीटनाशक दवा से गर्भवतियों का बीपी बढ़ रहा।
कानपुर में कीटनाशक दवा से गर्भवतियों का बीपी बढ़ रहा है। शोध के लिए प्रो.गरिमा गुप्ता को राष्ट्रीय पुरस्कार मिला। मातृ गर्भावस्था में पेस्टिसाइड्स के प्रभाव पर शोध किया था।
कानपुर, [विकास कुमार]। हवा व पानी में मौजूद कीटनाशक कण, फल व सब्जियों में पड़ने वाली कीटनाशक दवा गर्भवतियों के लिए काफी नुकसानदेह है। इस वजह से गर्भवतियों में ब्लड प्रेशर बढ़ने की समस्या हो रही है, जिसका असर मां व बच्चे दोनों पर पड़ता है। यह शोध करने पर जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सह आचार्य प्रो. गारिमा गुप्ता को पुरस्कार मिला है। यह देश का पहला शोध बताया जा रहा है।
फल व सब्जियों में कीड़े लगने से रोकने के लिए उनमें कीटनाशक दवा का छिड़काव किया जाता है, जिसके कण हवा व पानी में भी मिल जाते हैं। न दिखाई देने वाले यह कण लोगों के शरीर में खानपान के माध्यम से अंदर प्रवेश करते हैं, जिससे कई तरह की बीमारियों से लोग ग्रस्त हो जाते हैं। यह कीटनाशक सबसे ज्यादा गर्भवातियों को प्रभावित करते हैं, जिससे उनमें हाई ब्लड प्रेशर की समस्या हो जाती है।
इस संबंध में जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की सह आचार्य प्रो. गारिमा गुप्ता ने एक साल में 60 गर्भवतियों पर मातृ गर्भावस्था में पेस्टिसाइड्स के प्रभाव कैसे पड़ता है, इस पर शोध किया। प्रो. गरिमा गुप्ता ने बताया कि गर्भावस्था के समय कीटनाशक दवा का पास होना या संपर्क में आना काफी खतरनाक होता है।
खून में कीटनाशक का स्तर अधिक होने से गर्भवती में प्रीकलैंपशिया और इक्लैंपशिया ( गर्भवती में बीपी का अधिक बढ़ना) की समस्या अधिक रूप से देखी जाती है। 60 महिलाओं में शोध करने पर सभी का ब्लड प्रेशर कीटनाशक की वजह से हाई निकला है, जो बच्चे व मां दोनों के लिए काफी खतनाक होता है। ऐसे में बचाव बहुत जरूरी है।
यह शोध करने पर प्रो. गरिमा को फेडरेशन ऑफ ऑब्स एंड गायनी समिति द्वारा राष्ट्रीय पुरस्कार एफओजीएसआई मोविकॉल अवार्ड 2023 से सम्मानित किया गया। अवार्ड के लिए देश के कई जगहों से अन्य शोध भेजे गए थे, जिनमें जीएसवीएम का शोध चयन हुआ।
कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला ने बताया कि मातृ गर्भावस्था में पेस्टिसाइड्स के प्रभाव पर विस्तार से अध्ययन किया गया है। साथ ही महत्वपूर्ण जानकारी दी गई है। यह शोध गर्भवतियों पर ध्यान देने का प्रयास करता है, जिन्हें कृषि उत्पादों से संपर्क होता है और उनके स्वास्थ्य पर कैसे प्रभाव पड़ता है। कॉलेज का पहला शोध है।
बच्चे के विकास पर पड़ता असर
प्रो. गरिमा गुप्ता ने बताया कि कीटनाशक दवा हवा, पानी व खाने के माध्यम से गर्भवती के शरीर में जाती है, जिससे बच्चे के विकास पर काफी असर पड़ता है। इसके बाद बच्चे व मां की जान को भी खतरा होता है। कीटनाशक का अनुवांशिक स्तर पर भी दुष्प्रभाव पड़ता है।
वहीं, जिन महिला को पहले से बीपी की समस्या होती है, उनमे यह समस्या और बढ़ भी सकती है। इसलिए सब्जियों को अच्छे से गर्म पानी में धोकर साफ करने की सलाह दी जाती है। शोध में प्रो. गारिमा के साथ आचार्य डॉ. रेनू गुप्ता, सह आचार्य डॉ.पाविका, डॉ.आलोक राघव, स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष प्रो. नीना गुप्ता आदि का सहयोग रहा।
