रायबरेली में देश का सबसे बड़ा ड्राइविंग ट्रेनिंग और रिसर्च सेंटर बनकर तैयार

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आशीष दीक्षित/ रायबरेली, अमृत विचार। जिले में देश का सबसे बड़ा और प्रदेश का पहला ड्राइविंग ट्रेनिंग और रिसर्च सेंटर बनकर तैयार हो गया है। हरचंदपुर के दतौली में 20 करोड़ की लागत से आईटीडीआर बनकर तैयार है। दिवाली से पहले इसका शुभारंभ कर दिया जाएगा। टाटा मोटर्स के हाथ में इस सेंटर की कमान होगी। इस इंस्टीट्यूट में आवासीय सुविधा के साथ विभिन्न जलवायु और सड़क, पहाड़, नदी, घाटी की टर्फ कंडीशन के अनुसार वाहनों को चलाने का प्रशिक्षण दिया जाएगा। साथ ही हर तरह के इंजन की मरम्मत को लेकर तकनीकी की शिक्षा मिलेगी।

रायबरेली में प्रदेश का पहला आधुनिक सुविधाओं से लैस इंस्टीट्यूट ऑफ ड्राइविंग ट्रेनिंग एंड रिसर्च (आईटीडीआर) बनकर तैयार हो गया है। इस सेंटर पर ड्राइविंग की सारी विधा सिखाई जाएगी तथा लोगों को उसमें पारंगत किया जाएगा। आधुनिक सुविधाओं से लैस 12 एकड़ में बना यह इंस्टीट्यूट कुशल और अनुभवी वाहन चालक देगा, जिसके लिए इंस्टीट्यूट में बकायदा सिंगल लेन से लेकर 6 लेन तक की सड़कें बनाई गई हैं। प्रशिक्षण लेने वालों को वाहनों के सेल्फ मेंटेनेंस की ट्रेनिंग दी जाएगी। 

सांसद सोनिया गांधी के प्रयास से 2014 में जिले के हरचंदपुर विधानसभा क्षेत्र के दतौली गांव के पास आईडीटीआर की स्थापना के प्रक्रिया शुरू कराई गई थी। करीब 12 एकड़ जमीन मिलने के बाद शिलान्यास किया गया। यूपीगो को निर्माण एजेंसी नामित किया गया था। इस भवन का निर्माण वर्ष 2020 में ही हो जाना था लेकिन कोरोना चलते इसका निर्माण कार्य अधूरा रह गया था। अब यह बनकर तैयार हो गया है। इसके शुरू होने से जो निजी एजेंसी ड्राइविंग सिखाने का नाम पर मनमाना रुपया वसूल रही है उन पर भी लगाम लग जाएगी। इस पूरे सेंटर में हाईटेक व्यवस्था की गई है। हाई एक्शन कैमरे लगे हैं जो चालक की हर गतिविधि पर नजर रखेंगे। पहाड़ों पर वाहन कैसे चलाना है तथा नदी और घाटी के ऊबड़-खाबड़ और फिसलन भरे रास्तों पर कैसे वाहन चलाया जाए इसकी पूरा प्रशिक्षण दिया जाएगा। इस सेंटर के निर्माण में 3 करोड़ रुपये प्रदेश सरकार ने दिया है तो वहीं 17 करोड़ रुपये केंद्र सरकार ने दिए हैं। टाटा मोटर्स के हाथ में इस केंद्र के संचालन की जिम्मेदारी होगी। सेंटर पर टाटा मोटर्स ने प्रशिक्षण से जरूरी कई वाहन उपलब्ध करा दिए हैं। दो दिन पहले परिवहन आयुक्त चंद्र भूषण सिंह ने टाटा मोटर्स की टीम के साथ इसका निरीक्षण किया था और बताया था कि सेंटर बनकर तैयार है। दिवाली के पहले या यूं कहे कि नवंबर के पहले सप्ताह में इसका शुभारंभ कर दिया जाएगा।

मैकेनिकों को किया जाएगा तैयार
इस सेंटर पर वाहन मैकेनिकों को भी तैयार किया जाएगा। अभी हाल यह है कि कोई मैकेनिक दुकान खोल लेता है तो उसके पास हर वाहन के इंजन की मरम्मत का ज्ञान नहीं होता। पिछले पांच सालों में मोटर इंडस्ट्री में बहुत बड़ा बदलाव आ गया है। अब वाहनों के इंजन पूरी तरह से कंप्यूटराइज्ड हो गए हैं। जीपीएस सिस्टम भी लग गया है। ऐसे में इंजन को खोलना और उसकी मरम्मत करना हर मैकेनिक के हाथ में नहीं है। वाहन खराब होने पर लोगों को वाहन एजेंसी जाना पड़ता है। इस सेंटर में उन सारी विधाओं की जानकारी मिलेगी जो डिजिटल हो चुकी हैं।

आवासीय सुविधा से परिपूर्ण है परिसर  
यह सेंटर प्रदेश का पहला आधुनिक आईटीडीआर है। इसमें 72 आवासों की सुविधा होगी। अभी तक सबसे अधिक आवास पुणे आईटीडीआर में हैं लेकिन रायबरेली के सेंटर में आवासों की संख्या बहुत अधिक है। एक तरह से यह देश का सबसे बड़ा आईटीडीआर है। यह प्रदेश का पहला ट्रैफिक रिसर्च इंस्टिट्यूट है, जो आधुनिक सुविधाओं से लैस है। यह केंद्र और राज्य सरकार की संयुक्त परियोजना है। इसका संचालन पीपीपी मॉडल पर टाटा मोटर्स प्राइवेट लिमिटेड द्वारा किया जाएगा, जिसमें ट्रेनिंग मनोवैज्ञानिक तरीके से सिमुलेटर के जरिए प्रशिक्षण दिया जाएगा। - मनोज कुमार सिंह, एआरटीओ प्रवर्तन

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