कानपुर देहात हत्याकांड : गांव पहुंचे सगे भाइयों के शव, परिजनों ने किया अंतिम संस्कार से इन्कार 

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर देहात, अमृत विचार। सगे भाइयों की लाठी डंडों से पीट-पीटकर हत्या के मामले में तीसरे दिन उनका शव गांव पहुचते ही कोहराम मच गया। गांव में घटना को लेकर तनाव को देखते हुए कई थानो की फोर्स तैनात रही। अंतिम संस्कार के लिए परिजन तैयार नहीं हुए। पुलिस और प्रशासनिक अधिकारी देर रात तक वहां डंटे रहे। लाख मान मनौव्वल के बाद परिजन अंतिम संस्कार को राजी नहीं हुए। दोनों मृतकों के आश्रितों को प्रशासन की ओर से पांच- पांच लाख रुपये की आर्थिक मदद देने की बात कही गई लेकिन उन्होंने लेने से इन्कार कर दिया। मृतकों के आश्रितों को मुआवजा राशि एक- एक करोड़ रुपये देने और घायलों को दो- दो लाख रुपये की मांग की गई। 


निनाया शाहजहांपुर निवासी 58 वर्षीय रामवीर की गांव के ही मोहनलाल शुक्ला से कुछ जमीन को लेकर विवाद था। इसी विवादित जमीन पर रामवीर लोहार ने कालोनी बनाने के लिए निर्माण सामग्री एकत्र की थी। जबकि वहां मोहन लाल शुक्ला अपनी गाड़ी खड़ी करते थे। इसको लेकर गुरुवार रात में दोनों पक्षों में संघर्ष हो गया। इस दौरान पीट-पीटकर रामवीर व उनके 65 वर्षीय भाई सत्य नारायण की हत्या कर दी गई। जबकि रामवीर की पत्नी मधू, पुत्र सोनू व दीनू तथा पुत्री काजल भी घायल हो गए। मोहल्ले के लोगों के हस्तक्षेप पर हमलावर वहां से फरार हो गए। सूचना पर पहुंचे पामा चैकी इंचार्ज कौशल कुमार ने सभी घायलों को उनके परिजनों के साथ हैलट अस्पताल भेजा था। 

पुलिस ने पोस्टमार्टम रिपोर्ट के आधार पर हत्या की धारा बढ़ाकार आठ आरोपियों को गिरफ्तार किया था तीसरे दिन दोनों सगे भाइयो के शव गांव पहुंचते ही कोहराम मच गया। पुलिस फरार तीन आरोपियों के लिए दबिशें दे रही है। उधर रामवीर और उनके भाई सत्य नारायण का शव घर पहुंचा तो परिजनों में कोहराम मच गया। परिजनों ने आर्थिक मदद और नौकरी की मांग की और शव उठाने से मना कर दिया। जिससे अफसरों के हाथ पांव फूल गए। सूचना पर पहुंची एडीएम, एसडीएम, एएसपी ने करीब दो घंटे तक परिजनों को समझाया। सीओ अरुण कुमार सिंह ने बताया कि फरार अन्य आरोपियों कि तलाश की जा रही है, लेकिन परिजन अंतिम संस्कार को तैयार नहीं हुए। जिनका इलाज हैलट अस्पताल में चल रहा है। उन्हें देखने एडीजी आलोक सिंह व आईजी प्रशांत कुमार पहुंचे। परिजनों से मुलाकात की। उन्हें सुरक्षा का आश्वासन दिया।

पुलिस ने समझा दिया था
हैलट में भर्ती मृतक रामवीर की पत्नी मधु, बेटी काजल, बेटे मोनू व दीनू ने बताया कि दो-दो बार पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद भी गजनेर पुलिस आरोपियों पर कार्रवाई नहीं की। दोनों पक्षों को समझा कर शांत करा दिया था। इससे झल्लाए दूसरे परिवार ने पुलिस के जाते ही हमला कर दिया और पीट-पीट कर 65 वर्षीय सत्यनारायण और 58 वर्षीय रामवीर को मौत के घाट उतार दिया।

हम लोग निहत्थे ही लड़ रहे थे, सब था सुनियोजित  
परिजनों ने बताया कि आरोपी मोहन शुक्ला के परिवार के 10-12 लोगों ने पुलिस के जाते ही हमला कर दिया। हम लोग निहत्थे थे और उनके हाथों में कुल्हाड़ी, डंडा और लाठी थी। हम लोगों को विश्वास नहीं था कि वो लोग ऐसा कर सकते हैं। पूरे परिवार पर टूट पड़े। महिलाओं और बच्चों को भी नहीं बख्शा। बच्चे के पैर में कुल्हाड़ी मारा तो पैर कट गया। छोटा बेटा बचाने दौड़ा तो उसके लाठी मारकर हाथ तोड़ दिया और पैर में भी गंभीर चोट आई। उन लोगों का कहना था कि सब कुछ सुनियोजित था।
 
एक समय राहे जब एक थरिया में बैठ खात राहे
मधु का कहना था कि एक समय राहे कि जब पड़ोस में रहे वाले हत्यारे एक ही थरिया में बैठ के खाना खात राहें। कभी कोई काम-काज होता राहे तो सब एक साथ बैठ के खाना खाते राहें। कभी सोचा नहीं राहे कि ये हमार साथ ऐसा करिहें। अगर हमका भी ऐसा करना होत तो हमरे भी चार बच्चा हैं। सबका लाठी-डंडा लेकर बुला लेत। उई लोग भी तैयार करके हमला करत। पहले दिन जब पुलिस आई राहे तो उई लोगन ने गाली-गलौज देते हुए कहा राहे कि जमीन पर कब्जा करे आए हो। बताया कि कुछ ही देर बीता होगा कि पांच अक्तूबर की रात करीब ग्यारह बजे पुलिस के जाते ही आरोपी परिवार पर टूट पड़े। परिवार के युवक ने बताया कि पुलिस ने सिर्फ औपचारिकता की लेकिन कोई एक्शन नहीं लिया। पुलिस की लापरवाही नहीं होती तो आज परिवार के दो लोग जिंदा होते। परिजनों का आरोप है कि पुलिस ने विवाद के बाद दोनों पक्षों को समझौता कराने का प्रयास किया। दोनों लोग अपना देख लो और इसके बाद पुलिस चली गई।

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