Mulayam Singh 1st Death Anniversary: कानपुर से ही नेता जी मुलायम सिंह यादव बने थे धरती पुत्र... की थी ये घोषणा
कानपुर से ही नेता जी मुलायम सिंह यादव धरती पुत्र बने थे।
कानपुर से ही नेता जी मुलायम सिंह यादव धरती पुत्र बने थे। नेताजी ने ही आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त किया था। कानपुर में 25 जुलाई 1993 में व्यापारियों के सम्मेलन में घोषणा की थी।
कानपुर, [विकास कुमार]। समाजवादी पार्टी के संरक्षक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव का कानपुर से गहरा नाता रहा। कानपुर से ही उनको पहली बार धरती पुत्र और भूमि पुत्र के नाम से पुकारा गया, जिसके बाद प्रदेश व देश में वह इस नाम से जाने जाने लगे थे। नेताजी ने मुख्यमंत्री बनने पर आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त कर कानपुर समेत प्रदेश के व्यापारियों को काफी राहत पहुंचाने काम किया था। मुलायम सिंह यादव की पहली पुण्य तिथि (10 अक्टूबर) पर शहर के नेताओं ने उनसे जुड़ी यादें ताजा कीं।
समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता व राष्ट्रीय महासचिव सुरेंद्र मोहन अग्रवाल उर्फ बाबू जी ने बताया कि वह नेताजी के साथ करीब 30 साल से जुड़े थे और उनका और मुलायम सिंह यादव के बीच बड़े व छोटे भाई जैसे संबंध था। सपा संस्थापक मुलायम सिंह यादव ने सरकारी कार्यालयों में अंग्रेजी में कामकाज बंद करने की घोषणा फूलबाग में 25 मार्च वर्ष 1990 में की थी। तब वह मुख्यमंत्री थे और डॉ. राम मनोहर लोहिया स्मारक समिति के बैनर तले फूलबाग में आयोजित कार्यक्रम में शामिल हुए थे।
इसके बाद मुलायम सिंह यादव ने आवश्यक वस्तु अधिनियम धारा 3/7 और चुंगी समाप्त करने का वादा 25 जुलाई वर्ष 1993 को लाजपत भवन में व्यापारियों की सभा में किया था। नेताजी ने कहा था कि जैसे ही सरकार बनेगी सभी समस्याएं निस्तारित होंगी। चाहे उनकी बातें टेप कर ली जाएं। सरकार बनते ही सबसे पहले नेताजी ने आवश्यक वस्तु अधिनियम को समाप्त कर दिया था।
मिला धरती पुत्र व भूमि पुत्र का नाम
मुलायम सिंह यादव को धरती पुत्र और भूमि पुत्र का नाम कानपुर से ही मिला था। यह नाम देने वाले उनके जिगरी दोस्त पूर्व विधायक श्याम मिश्र थे। कानपुर आने पर नेताजी और श्याम दद्दा रिक्शे में बैठकर शहर घूमकर हालचाल लेते थे और एक साथ बैठकर खाना खाते थे। नेताजी जब भी कानपुर आते तो श्याम मिश्र और मेहरबान सिंह का पुरवा में चौधरी हरमोहन सिंह यादव से जरूर मिलते थे। सपाइयों के मुताबिक जनवरी 2007 में श्याम मिश्र की मृत्यु होने पर बतौर मुख्यमंत्री प्रोटोकॉल को तोड़ते हुए वे कानपुर आए थे।
रक्षा मंत्री बनने पर शहीदों के लिए लिया था अहम फैसला
सपा जिलाध्यक्ष हाजी फजल महमूद ने बताया कि उत्तर प्रदेश के तीन बार मुख्यमंत्री रहे मुलायम सिंह यादव वर्ष 1996 से 1998 तक देश के रक्षा मंत्री रहे। रक्षा मंत्री बनने पर मुलायम सिंह यादव ने शहीद होने वाले जवानों के शवों को सम्मानजनक उनके घर भेजने का फैसला लिया था। नेता जी के इस निर्णय से पहले तक शहीद होने वाले जवानों की सिर्फ टोपी ही उनके घर भेजी जाती थी। नेताजी के इस फैसले का पूरे देश स्वागत हुआ था।
प्रधानमंत्री की दौड़ में सबसे आगे थे मुलायम सिंह
समाजवादी पार्टी को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के इरादे से मुलायम ने केंद्र की राजनीति का रुख किया था। वर्ष 1996 में मुलायम सिंह यादव 11वीं लोकसभा के लिए मैनपुरी सीट से चुने गए। उस समय केंद्र में संयुक्त मोर्चा की सरकार में वह भी शामिल थे। इसके बाद वह देश के रक्षामंत्री बने थे। हालांकि, यह सरकार बहुत लंबे समय तक चली नहीं। इसके बाद मुलायम सिंह यादव को प्रधानमंत्री बनाने की भी बात चली थी। प्रधानमंत्री पद की दौड़ में वे सबसे आगे खड़े थे, लेकिन लालू प्रसाद यादव और शरद यादव ने उनके इस इरादे पर पानी फेर दिया था। इसके बाद चुनाव हुए तो मुलायम सिंह संभल से लोकसभा में वापस लौटे। असल में वह कन्नौज भी जीते थे, लेकिन वहां से उन्होंने अपने बेटे अखिलेश यादव को सांसद बनाया था।
