Kanpur IIT की निगरानी में खड़े होंगे खेती के स्टार्टअप, प्रारंभिक चरण में पाचं-पांच करोड़ रुपये का बजट होगा जारी
कानपुर आईआईटी की निगरानी में खड़े होंगे खेती के स्टार्टअप।
कानपुर आईआईटी की निगरानी में खेती के स्टार्टअप खड़े होंगे। कानपुर, अयोध्या, मेरठ और बांदा के कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि इंक्यूबेशन हब बनेंगे। किसानों के आइडिया और उत्पादों को कंपनी बनाने के स्तर तक पहुंचाने में मदद मिलेगी।
कानपुर, अमृत विचार। प्रदेश को एक ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लिए कृषि क्षेत्र को भी बढ़ावा दिया जा रहा है। इसी दिशा में प्रदेश सरकार ने कानपुर, अयोध्या, मेरठ और बांदा के कृषि विश्वविद्यालयों में कृषि इंक्यूबेशन एंड स्टार्टअप सेंटर बनाने का निर्णय लिया है। इसके लिए प्रारंभिक चरण में पांच-पांच करोड़ रुपये बजट जारी होगा। सेंटरों को संचालित करने और छात्रों व किसानों के आइडिया और उत्पादों को कंपनी बनाने के स्तर तक पहुंचाने में आईआईटी कानपुर सहयोग करेगा।
आईआईटी कानपुर में पिछले दिनों उत्तर प्रदेश कृषि प्रौद्योगिकी मंथन नामक कार्यशाला में चंद्रशेखर आजाद कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, अयोध्या के आचार्य नरेंद्र देव यूनिवर्सिटी ऑफ एग्रीकल्चर एंड टेक्नोलॉजी, मेरठ के सरदार वल्लभ भाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय और बांदा के कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के विशेषज्ञों ने भाग लिया था।
कार्यशाला में अपर मुख्य सचिव देवेश चतुर्वेदी, कृषि सचिव डॉ. राजशेखर, कृषि अनुसंधान और शिक्षा विभाग के विशेष सचिव अजय कुमार द्विवेदी, आईआईटी कानपुर के स्टार्टअप इनोवेशन इंक्यूबेशन सेंटर के इंचार्ज प्रो. अंकुश शर्मा ने सेंटरों को लेकर रूपरेखा तैयार की थी। प्रो. अंकुश शर्मा ने बताया कि आईआईटी के स्टार्टअप इनोवेशन एंड इंक्यूबेशन सेंटर से बड़ी संख्या में शिक्षा, स्वास्थ्य, कृषि, तकनीक क्षेत्र में स्टार्टअप हो चुके हैं।
आइडिया और उत्पाद किए जाएंगे सुरक्षित
सीएसए कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय के निदेशक शोध डॉ. पीके सिंह के मुताबिक कृषि छात्रों में स्टार्टअप करने की बहुत क्षमता है। उनके अच्छे आइडिया को बौद्धिक संपदा अधिकार के अंतर्गत सुरक्षित किया जाएगा। उत्पाद और रचनात्मक मॉडल पेटेंट कराने की प्रक्रिया होगी। विश्वविद्यालय के अंतर्गत 22 जिले आते हैं। यहां के किसान अलग-अलग उत्पाद तैयार कर रहे हैं। उनको नवाचार से प्रोत्साहित किया जाएगा। सरकार से आर्थिक मदद मिलने पर उनको आगे बढ़ने में मदद मिलेगी।
एआई और मशीन लर्निंग की जरूरत
सीएसए के मीडिया प्रभारी डॉ. खलील खान ने बताया कि कृषि में रोबोटिक्स और ड्रोन का इस्तेमाल पहले ही हो रहा है। अब फसलों की देखभाल, कीटों के हमले से बचाव, मौसम के अनुरूप पानी और कीटनाशकों के छिड़काव के लिए आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और मशीन लर्निंग से लैस उपकरणों की जरूरत पड़ रही है। प्रदेश में नए हब खुलने से कृषि इंजीनियरिंग कॉलेज के छात्रों को कंपनी बनाने में मदद मिलेगी।
