लखनऊ : SGPGI के प्रोफेसर राजकुमार बोले, कहा- मरीज के बेहतर इलाज के लिए ट्रॉमा में जरूरी है पीएमआर विभाग

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लखनऊ, अमृत विचार। जहां कहीं पर भी ट्रामा सेंटर स्थापित हो, वहां पर फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन सेंटर विभाग का होना भी अति आवश्यक है। ट्रामा के मरीज को गुणवत्तापूर्ण जीवन देने में यह विभाग ही काम करता है। यह बात रिसर्च में भी साबित हो चुकी है। यह कहना है संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान के प्रोफेसर राजकुमार का। वह शनिवार को एसजीपीजीआई के एपेक्स ट्रामा सेंटर में आयोजित वार्षिक सम्मेलन को संबोधित कर रहे थे।

यह वार्षिक सम्मेलन एसजीपीजीआई स्थित फिजिकल मेडिसिन और रिहैबिलिटेशन सेंटर और अवध एसोसिएशन ऑफ फिजिकल मेडिसिन के संयुक्त तत्वाधान में हुआ। प्रोफेसर राजकुमार ने कहा कि ट्रामा सेंटर में पीएमआर विभाग के होने से ट्रामा मरीज को एक छत के नीचे सभी प्रकार के पुनर्वास का लाभ मिल जाता है। जरूरत के हिसाब से उनका समुचित इलाज हो सकेगा। इसलिए सभी ट्रॉमा सेंटर में पीएमआर विभाग अवश्य होना चाहिए।

इस सम्मेलन के आयोजक सचिव डॉक्टर सिद्धार्थ राय ने बताया कि ट्रामा के मरीजों के शुरुआत के एक घंटे बहुत महत्वपूर्ण होते है, इसे गोल्डन आवर कहा जाता है। इसमें भी शुरुआत के 10 मिनट प्लेटिनियम पीरियड और ज्यादा ही महत्वपूर्ण होता है। इसी समय में यदि मरीज का उपचार शुरू कर दिया जाय तो उसके बचने की संभावना और सुधार होने की संभावना काफी बढ़ जाती है। इसलिए ट्रॉमा के केस में शीघ्र एम्बुलेशन बहुत महत्वपूर्ण है। इसी प्रकार रिहैबिलिटेशन कि शीघ्र शुरुआत करने से भी मरीज में ज्यादा गुणवत्ता पूर्ण सुधार होता है।

केजीएमयू के प्रो एके गुप्ता ने अस्पताल में रिहैबिलिटेशन विभाग स्थापित करने के लिए आवश्यक तकनीकी जानकारियां दीं। गोरखपुर एम्स से आए हुए डॉक्टर अमित रंजन ने रिहैबिलिटेशन के क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के महत्व को बताते हुए कहा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से हमको शीघ्र जानकारियां मिल तो जाती हैं लेकिन यह कई टेक्निकल बातों पर भी निर्भर करती है इसलिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस में सोच समझकर ही निर्णय लेने की जरूरत होती है।

केजीएमयू के डॉक्टर संजय सिंह में वर्चुअल रिहैबिलिटेशन के बारे में जानकारी साझा की। ट्रॉमा के बाद में अक्सर मरीजों में मानसिक विकार उत्पन्न हो जाते हैं कुछ मरीज तो मानसिक अवसाद के सभी ग्रसित हो जाते हैं। ट्रॉमा में मानसिक रूप से आने वाली दिक्कतों के विषय में पीजीआई के डॉक्टर रोमिल सैनी ने महत्वपूर्ण विचार साझा किए।

डा मधुकर दीक्षित ने ट्रामा के पेशेंट में फिजियोथेरेपी के महत्व को बताते हुए कहा की ट्रॉमा में सांस लेने की प्रक्रिया, खून के बहाव को रोकने, ट्रामा के बाद आने वाले विकृतियों से सुरक्षित रखने में फिजियोथेरेपी अहम भूमिका निभाती है। इस अवसर प्रो. रत्नेश कुमार, डॉ बृजेश त्रिपाठी सहित 150 चिकित्सक उपस्थित रहे।

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