हाल-ए-हैलट: मेरे चेले से दवा खरीदो वर्ना ऑपरेशन नहीं… परेशान होकर तीमारदार मरीज को वापस ले जा रहे घर

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर के हैलट अस्पताल में सेंटिग-गेंटिग का खेल जारी है।

कानपुर के हैलट अस्पताल में सेंटिग-गेंटिग का खेल जारी है। सेंटिंग वाले मेडिकल स्टोर से दवा न लाने पर ऑपरेशन नहीं किया। परेशान होकर परिजन मरीज को वापस घर ले जा रहे थे।

कानपुर, अमृत विचार। उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक व जीएसवीएम मेडिकल कॉलेज के प्राचार्य प्रो. संजय काला की सख्ती के बाद भी हैलट में लूट-घसोट और कमीशनखोरी रुक नहीं रही है। आरोप लगाया गया कि पथरी से पीड़ित एक मरीज का ऑपरेशन इसलिए नहीं किया जा रहा है, क्योंकि उनके तीमारदार ने डॉक्टर के बताए मेडिकल स्टोर से दवा नहीं ली। मरीज एक माह से बीमारी से परेशान है। बता दें कि डॉक्टर के बताए मेडिकल स्टोर से दवा लाने पर मोटा कमीशन मिलता है।

कानपुर देहात के पुखरायां निवासी इंतजाम की पत्नी राबिया (50) दोनों किडनी में पथरी की समस्या से पीड़ित हैं। इंतजाम ने बताया कि नौ सितंबर को हैलट की ओपीडी में डॉ.विनय कुमार को दिखाया। डॉक्टर ने जांचों के लिए कई बार बुलाया। 11 अक्टूबर को वार्ड नंबर पांच के बेड नंबर 45 पर पत्नी को भर्ती किया।

आरोप है कि देर रात करीब डेढ़ बजे डॉक्टर ने एक पर्चे पर दवा लिखी, जिसमें मेडिकल स्टोर वाले का मोबाइल नंबर लिखते हुए कहा था कि पेट्रोल पंप के पास वाले मेडिकल स्टोर से ही दवा लाना। वहां पर दवा करीब 14 हजार रुपये की होने की वजह से उन्होंने दवा नहीं ली और दूसरे मेडिकल स्टोर से वही दवा करीब 45 सौ रुपये में लाकर जेआर को दे दी।

आरोप है कि सेटिंग वाले मेडिकल स्टोर से दवा न लाने पर जूनियर डॉक्टरों ने ऑपरेशन थियेटर से पत्नी को बाहर कर दिया। तब से वह इलाज के लिए भटक रहे हैं। बीते बुधवार की देर रात करीब तीन बजे कॉडियोलॉजी में जांच कराने भेजा। लेकिन गुरुवार को ऑपरेशन नहीं किया।

गुरुवार को हैलट अस्पताल की अव्यवस्था से तंग आकर उन्होंने अमृत विचार संवाददाता से अपना दर्द बताया। संवाददाता ने जानकारी ली और मामला हैलट अस्पताल के प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह को बताया। प्रमुख अधीक्षक ने पीड़ित को कार्यालय बुलाया और इलाज का अश्वासन दिया। 

जेआर को लगाई फटकार 

प्रमुख अधीक्षक डॉ.आरके सिंह ने पीड़ित की पूरी बात सुनी। डॉ.विनय कुमार को कॉल की, लेकिन फोन नहीं लगा। इसके बाद उन्होंने आरोपी जेआर से पूछताछ की। जेआर अधीक्षक को संतोषजनक जवाब नहीं दे सका, जिसके बाद उन्होंने जेआर को फटकार लगाई। साथ ही शुक्रवार को डॉ.विनय कुमार समेत पूरी टीम को मामले के संबंध में कार्यालय तलब किया। 

पर्चे पर दवा के साथ लिखा था ग्लब्स भी 

जेआर ने पर्चे पर करीब 22 दवाएं बाहर से लाने को लिखीं, जबकि कई दवाएं हैलट में मौजूद हैं। सर्जिकल ग्लब्स व बीटाडीन तक पर्चे पर लिख डाला। प्रमुख अधीक्षक का कहना है कि पर्चे पर लिखी राइटिंग किसकी है, इसकी जानकारी की जाएगी। पर्चे पर लिखी कई चीजें हैलट में होने बावजूद बाहर से क्यों मंगाई गईं, इस संबंध में जेआर से पूछताछ की जाएगी।

कमीशन का है खेल सारा 

हैलट अस्पताल के बाहर मौजूद मेडिकल स्टोर के संचालकों व कुछ डॉक्टरों के बीच तगड़ी सेटिंग है। मरीज को चाहे कुछ भी हो, लेकिन ऐसे डॉक्टरों को अपने मोटे कमीशन से मतलब होता है। कमीशन के लालच में ऐसे डॉक्टर हैलट में दवाएं होने के बावजूद बाहर स्थित मेडिकल स्टोरों की महंगी दवाएं लिखते हैं। साथ ही मरीजों को मेडिकल स्टोरों का पता बताने का भी काम करते हैं कि फलां मेडिकल स्टोर से ही दवा लाना। ओपीडी में भी दिनभर दवा कंपनी के प्रतिनिधि मंडराते रहते हैं जो डॉक्टरों को अपनी कंपनी की दवा लिखने के बदले कमीशन देते हैं। इसके अलावा कुछ डॉक्टरों की सेटिंग निजी पैथोलॉजी में भी होती है, जहां वह मरीजों को जांच के लिए भेजते हैं।

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