PM Modi In UP: .... तो अष्टाध्यायी की टीका में जीवन का जोखिम लिया जगद्गुरु ने, पहली बार कोई विद्वान कर सका यह काम

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प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी चित्रकूट के दौरे पर रहे।

जगद्गुरु रामभद्राचार्य की जिन पुस्तकों का प्रधानमंत्री विमोचन-लोकार्पण किया है, उसमें महर्षि पाणिनी रचित अष्टाध्यायी भी है। जगद्गुरु बताते हैं कि पहली बार कोई पाणिनी के इस ग्रंथ की टीका करने में सफल हो पाया है।

चित्रकूट, [विकास श्रीवास्तव]। जगद्गुरु रामभद्राचार्य की जिन पुस्तकों का प्रधानमंत्री विमोचन-लोकार्पण किया है, उसमें महर्षि पाणिनी रचित अष्टाध्यायी भी है। जगद्गुरु बताते हैं कि पहली बार कोई पाणिनी के इस ग्रंथ की टीका करने में सफल हो पाया है।

 गौरतलब है कि चित्रकूट दौरे के दौरान पीएम ने तुलसी पीठाधीश्वर जगद्गुरु रामभद्राचार्य की लिखी दो पुस्तकों रामानंदाचार्य चरितम् और भगवान श्रीकृष्ण की राष्ट्रलीला के साथ महर्षि पाणिनि रचित ग्रंथ अष्टाध्यायी की टीका यानी सरलीकरण व्याख्या का भी लोकार्पण किया। जगद्गुरु बताते हैं कि ऐसी मान्यता है कि जो भी इसका भाष्य लिखता है, उसकी मृत्यु हो जाती है।

जगद्गुरु ने बताया कि जयादित्य ने इसकी व्य़ाख्या करने की सोची, तो उनकी मृत्यु हो गई। महर्षि पतंजलि भी इसकी कुल तीन हजार सूत्रों की ही व्याख्या कर पाए। दयानंद सरस्वती आदि महान लोग भी इसका पूरा भाष्य नहीं लिख पाए। जगद्गुरु ने बताया कि जब उन्होंने इसका भाष्य लिखने का मन बनाया तो उनकी बड़ी बहन गीता देवी, जिन्हें प्यार से लोग बुआजी कहते थे, ने कहा कि गुरुजी कहीं आपके लिए यह घातक सिद्ध न हो।

पर जब उन्होंने इसके प्रति अपना दृढ़ संकल्प दिखाया तो बुआजी ने कहा कि गुरुजी आप लिखिए, आपकी मृत्यु मैं ले लूंगी। जगद्गुरु के अनुसार, वही हुआ। महज दो महीने बाद बुआजी की मृत्यु हो गई। जगद्गुरु ने बताया कि यह इतना महत्वपूर्ण ग्रंथ है कि इसका मूलाकार महज 25 पृष्ठों का है और उन्होंने जो व्याख्या की है, वह पुस्तक लगभग नौ हजार पृष्ठों की है। गौरतलब है कि जगद्गुरु अब तक 230 ग्रंथों को लिख चुके हैं। इनमें से नौ ग्रंथों का शुक्रवार को लोकार्पण- विमोचन किया गया।

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