Kanpur: आधा दर्जन गांवों में नहीं जले चूल्हे… दो चचेरे भाइयों की ट्रेन से कटकर मौत का मामला, जा सकती थी तीसरे की भी जान
कानपुर में दो चचेरे भाइयों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी।
कानपुर में दो चचेरे भाइयों की ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। दोनों की मौत से गांव के भी करीब आधा दर्जन चूल्हे नहीं जले। परिजन के साथ गांव के लोग भी याद कर रोए।
कानपुर, अमृत विचार। सचेंडी में लाल शाह का पुरवा निवासी चचेरे भाई आशीष सिंह और सुभाष सिंह की शुक्रवार रात ट्रेन से कटकर मौत हो गई थी। वह दोनों अपने दोस्त वीरू सिंह के साथ घर लौट रहे थे। इस दौरान चचेरे भाई ईयरफोन लगाकर रेलवे पटरी पर क्रिकेट मैच देखने के लिए बैठ गए थे।
तभी झांसी लाइन पर कानपुर से झांसी की ओर जा रही तीन डिब्बों की मेडिकल ट्रेन की चपेट में आकर दोनों की मौत हो गई थी। घटना के समय दोस्त वीरू शौच क्रिया के लिए गया हुआ था, नहीं तो उसकी भी जान जा सकती थी। घटना के प्रत्यक्षदर्शी दोस्त वीरू पूरी तरह से दहशत में है। वह कुछ भी बोलने में असमर्थ है। इस दर्दनाक हादसे से दूसरे दिन आधा दर्जन गांवों में चूल्हे नहीं जले। पूरे गांव में रोने और सुबकने की आवाजें आती रहीं। दहशत में दोस्त घूम घूम कर घटना आने की कहीं बात।
परिजनों का कहना था कि जो तीसरा युवक वीरू सिंह आशीष सिंह और सुभाष सिंह के साथ लौट रहा था। वह घटना का प्रत्यक्षदर्शी है। पल भर में काल दोनों को लील गया। जिसके बाद वह बदहवास हो गया। उसने उस समय तो किसी तरह सूचना परिजनों को दी। लेकिन बाद में घूम-घूम कर वहीं घटना सामने याद आनी की वजह से कुछ नहीं बोल पाया।
परिजनों ने बताया कि दोनों बीएसी फस्ट ईयर के छात्र थे। साथ ही सुभाष आईटीआई कर रहा था। उन्होंने बताया कि दोनों अपने परिवारों की गरीबी दूर करना चाहते थे। इस लिए दिन रात सेना में जाने के लिए अग्निवीर भर्ती परीक्षा की तैयारी भी कर रहे थे। आशीष के परिवार में मां साधना व पिता बिंदा सिंह है। वह दोनों का इकलौता बेटा था।
परिवार में उनके पास कौड़ी भर जमीन है। मां का कहना था कि अब हम कइसे अपनी जिंदगी काटब। वहीं सुभाष सिंह के पिता राजेश सिंह विकलांग हैं। उसकी दो बहन पायल और डॉली है। परिजनों को हादसे में क्षतविक्षत शव भी देखने को नसीब नहीं हुए।
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