बरेली: अफसरों के ''सफेद झूठ'' ने बुजुर्ग कमल मेहरा को पहुंचाया अस्पताल

बरेली: अफसरों के ''सफेद झूठ'' ने बुजुर्ग कमल मेहरा को पहुंचाया अस्पताल

बरेली, अमृत विचार। कुछ ही दिन पहले की बात है, जब पशुधन मंत्री के सामने अफसरों ने एलान किया था कि नगर निगम क्षेत्र में अब कोई छुट्टा गोवंशीय पशु नहीं बचा है। यह अलग बात है कि अफसरों का यह सफेद झूठ तब भी शहर की हर सड़क पर नजर आ रहा था और अब भी आ रहा है।

मंगलवार को इसी सफेद झूठ ने 75 साल के कमल चंद्र मेहरा को अस्पताल पहुंचा दिया। वह कुतुबखाना मंडी में सब्जी खरीद रहे थे, जब छुट्टा सांड़ ने उन पर हमला कर कई बार सींगों पर उठाकर जमीन पर पटक दिया। उनकी हालत चिंताजनक बताई गई है।

छुट्टा गोवंशीय पशु अब तक गांवों में ही फसलों को रौंद रहे थे, अब शहर के लिए प्रकोप साबित होने लगे हैं। मंगलवार को कमल टॉकीज के पास रहने वाले बुजुर्ग कमल चंद्र मेहरा इसका शिकार हो गए।

दोपहर दो बजे वह कुतुबखाना मंडी में सब्जी खरीद रहे थे, तभी पीछे से आए सांड़ ने उन पर हमला कर दिया। जब तक आसपास मौजूद लोगों ने उन्हें बचाने की कोशिश की, तब तक सांड़ ने उन्हें सींगों पर उठाकर दो-तीन बार नीचे पटक दिया।

कमल चंद्र मेहरा इतने में लहूलुहान होकर निश्चेत हो गए। सब्जी मंडी में भी अफरातफरी मच गई। दुकानदारों ने किसी तरह सांड़ को हांककर हटाया और कमल चंद्र को उठाकर जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों के मुताबिक कमल चंद्र की हालत चिंताजनक है। ऊपरी चोटों के अलावा शरीर में अंदरूनी चोटें होने का भी अनुमान है। उनकी गंभीरता का पता लगाने के लिए फिलहाल उनका एक्सरे कराया गया है।

लगातार हादसे, फिर भी हवाई दावों के सिवा कुछ नहीं गोवंशीय पशु सड़कों पर छुट्टा न घूमें, इसके लिए गोशालाओं के निर्माण पर करोड़ों खर्च किए जा रहे हैं, उनके चारा-पानी पर भी मोटा खर्च हो रहा है लेकिन इसके बावजूद सड़कों पर इन पशुओं की तादाद जस की तस है। बल्कि बढ़ती जा रही है।

हालत यह है कि अब हर मोहल्ले और कॉलोनी में छुट्टा पशुओं के झुंड दिखाई देना आम बात हो गई है। लगातार हादसे भी हो रहे हैं। पिछले साल गांव नगरिया विक्रम में रविंद्र की छुट्टा पशु के हमले में घायल होने के बाद मौत हो गई थी।

इसके बाद नरियावल में भी एक महिला को सांड ने उठाकर पटक दिया था। दो साल पहले सांड़ ने गणेशनगर में एक व्यक्ति पर हमला कर उसे जान से मार डाला था। इन हादसों के बावजूद नगर निगम और पशु पालन विभाग के अफसर हवाई दावों के सिवा कुछ नहीं कर रहे हैं।

मंत्री की घोषणा पर शुरू हुआ अभियान भी कागजों में

पशुधन मंत्री ने पिछले दिनों घोषणा की थी कि 31 दिसंबर तक अभियान चलाकर छुट्टा पशुओं को गोशालाओं में पहुंचाया जाएगा।

इसी घोषणा के तहत बरेली स्मार्ट सिटी को छुट्टा गोवंशीय पशुओं से मुक्त कराने के लिए नगर निगम में छह सदस्यीय समिति का गठन कर उसे गोआश्रय स्थलों की असलियत का जायजा लेने के लिए अधिकृत किया गया था।

दावा किया गया था कि समिति की ओर से तैयार की गई रिपोर्ट शासन को भेजी जाएगी लेकिन अब यह समिति कहां है और क्या कर रही है, किसी को पता नहीं है।

शर्म नहीं आती... सुनने के आदी हो चुके हैं अफसर
छुट्टा गोवंशीय पशुओं के बारे में जिले के अफसर सालों से फर्जी आंकड़ों पर आधारित रिपोर्ट के जरिए अपनी जवाबदेही से बचते आ रहे हैं। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह की बैठकों में कई बार अधिकारियों को फर्जी आंकड़े पेश करने पर डांट पड़ चुकी है।

पिछली बार तो बैठक में मंत्री ने जिले के एक वरिष्ठ अधिकारी को यह कहकर डांटा था कि बार-बार फर्जी आंकड़े पेश करने में शर्म नहीं आती, फिर भी अफसर इस कदर ऐसी डांट सुनने के आदी हो चुके हैं कि उनके रवैये में कोई बदलाव नहीं आ रहा है।

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