Kanpur: लाला लाजपतराय को श्रृद्धांजलि से शुरू हुआ दक्षिण एशिया बिरादरी सम्मेलन, ओडिशा और दक्षिण भारत के कलाकारों ने सांस्कृतिक रंग में डुबोया
कानपुर में लाला लाजपतराय को श्रृद्धांजलि से शुरू हुआ दक्षिण एशिया बिरादरी सम्मेलन।
कानपुर में लाला लाजपतराय को श्रृद्धांजलि से शुरू हुआ दक्षिण एशिया बिरादरी सम्मेलन। नेशन फर्स्ट का भाव रखें, सांस्कृतिक विविधता विश्व गुरू का मंत्र। ओडिशा और दक्षिण भारत के कलाकारों ने सांस्कृतिक रंग में डुबोया।
कानपुर, अमृत विचार। दक्षिण एशिया बिरादरी का 33वां सम्मेलन का दूसरा दिन राष्ट्र निर्माण के लिए सांस्कृतिक चेतना जाग्रति पर चर्चा के साथ शुरू हुआ। सबसे पहले अमर शहीद लाला लाजपतराय की पुण्यतिथि के पर शास्त्री भवन खलासी लाइन में लगी उनकी प्रतिमा पर माल्यार्पण करके आगंतुकों भावभीनी श्रृद्धांजलि दी। इस मौके पर लाला जी के व्यक्तित्व और कृत्रित्व पर वक्ताओं ने प्रकाश डाला।
बिहार से आए गांधीवादी विचारक अशोक भारत ने कहा कि अनेकता में एकता न केवल आज के भारत के बल्कि पूरे विश्व की आवश्यकता है। इसके बिना वैश्विक ढांचा एक परिवार के रूप में विकसति नहीं हो सकता है। उन्होंने कश्मीर से कन्याकुमारी, भारत माता एक हमारी। कानपुर हो या गुवाहटी, अपना देश अपनी माटी नारे का उद्घोष करके माहौल राष्ट्रीय भावना से ओतप्रोत कर दिया।

उन्होंने कहा कि भारत को विश्वगुरू बनाने के लिए विविधता पूर्ण संस्कृति, सामाजिक ताना-बाना, सहजीवन व सांझी विरासत को समृद्ध करते हुए नेशन फर्स्ट का भाव रखना होगा। प्रगतिशील भारत निर्माण का यही मूल मंत्र है। साहित्यकार प्रो. शिवकुमार दीक्षित ने कहा कि लाला लाजपतराय के साथ स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान और बाद में न्याय नहीं हुआ।
उनका राष्ट्र निर्माण का मॉडल स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद लागू किया गया होता तो आज जो भ्रमपूर्ण स्थिति दिखती है वह न होती। दीक्षित ने कहा कि देश की सभ्यता संस्कृति पर लालाजी के स्वदेशी विचार, बेबाक टिप्पणी करने वाला कोई नेता आज नही दिखता। सब अपने-अपने टुकड़े के सपनों का भारत बनाने में लगे हैं। लाल, बाल, पाल अलग राज्यों से आते थे पर देश उन्हें एक ही मानता था।
दक्षिण एशिया बिरादरी के महासचिव दीपक भाई ने कहा कि मानवता हमारा राष्ट्रधर्म होना चाहिए। आर्थिक युग में और बाजारवाद का दौर भीतर की भावनाओं के खत्म कर रहा है। इसे हर हाल में बचाना है। बाद में लाला लाजपतराय 2023 का सम्मान पंजाब के पूर्व डीजीपी डा.डीआर भट्टी को तथा महिलाओं में यह सम्मान एकता मिश्रा को दिया गया। यह सम्मान दीपक भाई ने प्रदान किया।
वक्ताओं में डॉ परमजीत सिंह मान (पंजाब), डॉ.चितरंजन साहनी (ओडिशा), पुडुचेरी से श्रीआधवन ने अपने विचार रखे। देर शाम केडीएमए सभागार में दक्षिण एशिया बिरादरी सम्मेलन में प्रतिनिधियों सांस्कृतिक विविधता की प्रस्तुति दी। धन्यवाद लोक सेवक मंडल के स्थानीय शाखा के महामंत्री नौशाद आलम मंसूरी ने दिया। कार्यक्रम की अध्यक्षता बिरादरी के अध्यक्ष डॉ सत्यपाल ने की। डॉ.वीएन सिंह, रामकिशोर वाजपेयी, आरके जेना, मधुसूदन दास, धर्मेंद्र भाई आदि प्रमुख रूप से सक्रिय रहे।
