लखनऊ: नियामक आयोग ने बिजली दर व स्लैब परिवर्तन पर की जनसुनवाई
लखनऊ, अमृत विचार। नियामक आयोग ने गुरुवार को बिजली दर व स्लैब परिवर्तन के मुद्दे पर जनसुनवाई की। दक्षिणांचल, पश्चिमांचल व केस्कों की जनता के साथ हुई सनुवाई में दरों में 16 प्रतिशत की कमी व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की एमसीजी खत्म करने की मांग उठी। उपभोक्ता परिषद ने इसका समर्थन करते हुए आंकड़े पेश कर …
लखनऊ, अमृत विचार। नियामक आयोग ने गुरुवार को बिजली दर व स्लैब परिवर्तन के मुद्दे पर जनसुनवाई की। दक्षिणांचल, पश्चिमांचल व केस्कों की जनता के साथ हुई सनुवाई में दरों में 16 प्रतिशत की कमी व वाणिज्यिक उपभोक्ताओं की एमसीजी खत्म करने की मांग उठी। उपभोक्ता परिषद ने इसका समर्थन करते हुए आंकड़े पेश कर बिजली कम्पनियों द्वारा दरें बढ़ाने के तर्क की हकीकत उजागर की।
वीडियो कॉन्फ्रेसिंग के माध्यम से हुई जनसुनवाई में आम जनता के साथ जन प्रतिनिधियों ने हिस्सा लिया। सभी की एक ही मांग की थी कि दरों में कमी होनी चाहिए। पहले से ही दरें काफी बढ़ी हुई हैं। सुनवाई के दौरान यह बात सामने आयी कि बिजली कम्पनियां महंगी बिजली की खरीद न करें क्योंकि इसका सहारा लेकर निगम बिजली दरों में साल दर साल बढ़ोतरी का तर्क पेश करता रहता है।
विद्युत नियामक आयोग में आयोग चेयरमैन आरपी सिंह सदस्यगण केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की उपस्थित में हुई जनसुनवाई के दौरान राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने दरें कम करने के लिए कई दस्तावेज व आंकड़े प्रस्तुत किए। उन्होंने कहा कि यदि बिजली कम्पनियां सही आंकड़े पेश करें तो दरों में 16 प्रतिशत की कमी आसानी से की जा सकती है। घरेलू उपभोक्ताओं के फिक्स चार्ज और वाणिज्यिक उपभोक्ताओं के मिनिमम गारण्टी चार्ज यानि एमसीजी को समाप्त किया जाए।
वर्मा ने कहा कि उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर करीब 13,337 करोड़ रुपया निकल रहा है जिसका लाभ उन्हें दिया जाना चाहिए। उन्होंने बिजली कम्पनियों के स्लैब परिवर्तन को असंवैधानिक बताते हुये खारिज करने की मांग की। उपभोक्ता परिषद ने आरोप लगाया कि बिजली कम्पनियों ने 6 प्रतिशत वितरण हानियों को बढ़ाकर 3500 करोड़ का अतिरिक्त गैप निकाला है जो गलत है। सुनवाई के दौरान तीनों निगम की ओर से एआरआर पर प्रजेन्टेशन भी दिए गए।
निजी कम्पनी को दे रहे सस्ती बिजली
गौरतलब है कि दक्षिणांचल निगम 5.26 रुपये प्रति यूनिट की बिजली खरीद कर टोरेंट को 4.45 रुपये प्रति यूनिट में बेच रहा है। इससे विभाग को हर साल करीब 162 करोड़ रुपये का नुकसान हो रहा है। इस प्रकार के नुकसान वाले टोरेन्ट के अनुबन्ध को जल्द से जल्द खारिज किया जाए। टोरन्ट को भी टैरिफ प्रस्ताव के तहत ही बिजली दी जानी चाहिए ताकि विभाग को हानि न हो।
महंगी बिजली खरीद से हो रहा घाटा
उपभोक्ता परिषद ने कहा जिस घाटे के नाम निजीकरण की प्रक्रिया शुरू की गयी है उसका मुख्य कारण एमओयू रूट के तहत महंगी बिजली खरीदना है। आरोप लगाया कि पूर्वांचल कम्पनी का निजीकरण करके एक नये घोटाले को जन्म दिया जा रहा है जिसका खामियाजा भविष्य में जनता को भुगतना पड़ेगा। जिस उदय योजना के नाम पर वितरण हानियों के कमी के लिये अनुबन्ध किया गया अभियन्ताओं को लाखों का इनाम बांटे गए अब सुधार के नाम पर घोखा दिया जा रहा है।
