ऐतिहासिक फैसला

ऐतिहासिक फैसला

दशकों से चली आ रही बहस पर विराम लगाते हुए उच्चतम न्यायालय की संविधान पीठ ने सोमवार को 1947 में भारत संघ में शामिल होने पर जम्मू और कश्मीर को विशेष दर्जा प्रदान करने वाले अनुच्छेद 370 के प्रावधानों को निरस्त करने के मौजूदा सरकार के फैसले को सही ठहराया है। साथ ही शीर्ष अदालत ने चुनाव आयोग को 30 सितंबर 2024 तक जम्मू-कश्मीर में चुनाव कराने के लिए कदम उठाने का निर्देश दिया। सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद कई अहम सवालों का जवाब मिल गया है। अपने फैसले में सीजेआई ने कहा कि भारत का संविधान संवैधानिक शासन के लिए एक पूर्ण संहिता है।

अनुच्छेद 370 असममित संघवाद की विशेषता थी न कि संप्रभुता की। उन्होंने कहा कि विलय पत्र के निष्पादन और 25 नवंबर, 1949 की उद्घोषणा जारी होने के बाद, जिसके द्वारा भारत के संविधान को अपनाया गया था, जम्मू-कश्मीर के पूर्ववर्ती राज्य ने संप्रभुता का कोई तत्व/ बरकरार नहीं रखा है। ध्यान रहे 5 दिसंबर 2019 को जम्मू कश्मीर में आर्टिकल 370 को खत्म कर दिया गया था। जिसके बाद प्रदेश को दो केंद्र शासित राज्य जम्मू कश्मीर और लद्दाख में बांट दिया गया था। केंद्र सरकार के इस फैसले को विपक्षी दलों और कई याचिकाकर्ताओं ने चुनौती दी थी। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कहा कि अनुच्छेद 370 को निरस्त करने पर सुप्रीम कोर्ट का फैसला ऐतिहासिक है।

उन्होंने कहा कि न्यायालय ने एकता के मूल सार को मजबूत किया है जिसे हम, भारतीय होने के नाते सभी से ऊपर मानते हैं और संजोते हैं।
आज का फैसला सिर्फ कानूनी फैसला नहीं है; यह आशा की किरण है, उज्ज्वल भविष्य का वादा है और एक मजबूत, अधिक एकजुट भारत के निर्माण के हमारे सामूहिक संकल्प का प्रमाण है। उधर जैसे ही फैसले की खबर आई पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी (पीडीपी) की प्रमख महबूबा मुफ्ती ने फैसले को भारत की अवधारणा की विफलता बताया। नेशनल कांफ्रेंस के उपाध्यक्ष उमर अब्दुल्ला ने  कहा कि वह फैसले से निराश हैं, लेकिन निरुत्साहित नहीं हैं। जबकि सॉलिसिटर जनरल तुषार मेहता ने कहा कि सरकार ने इतिहास में की गई संवैधानिक भूल को आखिरकार सुधार लिया है।

इसका श्रेय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह को जाता है। एक देश, एक विधान, एक निशान का सपना साकार हुआ है। जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को  मुख्य धारा से जोड़ देश के अन्य राज्यों के बराबर लाकर खड़ा किया है। अगस्त 2019 में अनुच्छेद 370 के निरस्त होने के बाद पिछले साढ़े चार वर्षों में घाटी समृद्ध हुई है। वास्तव में आर्टिकल 370 अब इतिहास बन चुका है।