लखनऊ: संतान की आस में महिला डॉक्टर ने उठाया जान का खतरा!, बनीं मां, दुर्लभ बीमारी से थी पीड़ित, जच्चा-बच्चा दोनों स्वस्थ

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) के डॉक्टरों की मेहनत रंग लाई है। बेहतर इलाज के जरिये पैरॉक्सिस्मल नॉक्टर्नल हीमोग्लोबिनुरिया (पीएनएच) नाम की दुर्लभ बीमारी से पीड़ित महिला और उसके बच्चे की जान बचाने में कामयाबी हासिल की है। जच्चा और बच्चा दोनों स्वस्थ हैं। बताया जा रहा है कि लखनऊ में पहली बार ऐसा हुआ है जब इस बीमारी से पीड़ित एक महिला ने एक बच्ची को जन्म दिया और मां बेटी दोनों स्वस्थ हैं।

दरअसल, एसजीपीजीआई में हेमेटोलॉजी विभाग में पैरॉक्सिस्मल नॉक्टर्नल हीमोग्लोबिनुरिया (पीएनएच) नाम की बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज किया जाता है। डिपार्टमेंट ऑफ हेमेटोलॉजी विभाग के एसोसिएट प्रो. संजीव के मुताबिक इस बीमारी से पीड़ित मरीजों की नसों में खून का थक्का बनने की दिक्कत होती है। प्रेग्नेंसी के लिहाज से यह बीमारी बहुत ही गंभीर होती है। इस बीमारी से पीड़ित महिलाओं को गर्भधारण की सलाह नहीं दी जाती है,क्योंकि मां और बच्चे दोनों के जीवन को खतरा होता है। 

उन्होंने बताया कि इस बीमारी से पीड़ित एक महिला उनके विभाग में इलाज के लिए आई थीं। वह खुद भी एक डॉक्टर हैं। उन्होंने स्वयं इस बीमारी के साथ परिवार बढ़ाने की इच्छा जाहिर की थी। विभाग में उनका इलाज शुरू हुआ। सबसे पहले महिला को खून पतला करने की दवा दी गई, साथ में अन्य दवायें भी दी गईं। बीमारी पर नियंत्रण के बाद स्त्री रोग विशेषज्ञ की सलाह ली गई। जिससे महिला और उसके होने वाले बच्चे के जीवन को बचाया जा सके। प्रसवपूर्व सभी जांचे ठीक रहीं। निजी अस्पताल में 10 नवंबर को महिला ने 2.8 किलोग्राम वजन वाली एक स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। मां और शिशु दोनों स्वस्थ हैं। उन्होंने बताया कि लखनऊ में पीएनएच मरीज में सफल गर्भावस्था परिणाम का यह पहला मामला है। ऐसी उच्च जोखिम वाली गर्भावस्थाओं को हेमेटोलॉजिस्ट व प्रसूति रोग विशेषज्ञ की देखरेख की जरूरत होती है। 

पीएनएच एक दुर्लभ बीमारी

डॉ. संजीव ने बताया कि नसों में खून का थक्का बनना एक दुर्लभ बीमारी है। भारत में इसी बीमारी से पीड़ित मरीजों की संख्या 5 से 10 हजार के बीच होगी। उन्होंने यह भी बताया कि इस बीमारी की दवा भी हमारे देश में नहीं है। इसका इलाज सिर्फ बोन मैरो ट्रांसप्लांट हैं। उन्होंने बताया कि पीजीआई के लिए यह पहला मामला था। इस बीमारी से पीड़ित मरीजों का इलाज एसजीपीजीआई में किया जा रहा है, लेकिन प्रेग्नेंसी का कोई मामला इससे पहले नहीं आया था। 

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