लखनऊ : अंग प्रत्यारोपण करा चुके मरीज डॉक्टर की सलाह को न करें नजरअंदाज
लखनऊ, अमृत विचार। जिस भी व्यक्ति का अंग प्रत्यारोपण (organ transplant) हुआ हो, उन्हें अपने डॉक्टर की हर सलाह माननी चाहिए। डॉक्टर की सलाह न मानना अपने जीवन को खतरे में डालना है। लापरवाही से आर्गन ट्रांसप्लांट कामयाब नहीं होता है। इस बात की जानकारी यूएसए स्थित पिट्सबर्ग विश्वविद्यालय के पैथोलोजिस्ट प्रोफेसर परमजीत रंधावा ने दी। वह मंगलवार को संजय गांधी स्नातकोत्तर आयुर्विज्ञान संस्थान (एसजीपीजीआई) में मंगलवार को "ट्रांसप्लांट पैथोलॉजी में अपडेट” विषय पर आयोजित सीएमई के दौरान दी।

उन्होंने बताया कि डॉक्टर की सलाह न मानने पर ही अंग प्रत्यारोपण सफल नहीं होता है और कुछ समय बाद ही अंग प्रत्यारोपण करा चुके शख्स के अंग एक बार फिर काम करना बंद कर देते हैं।
प्रोफेसर परमजीत रंधावा ने बताया कि शरीर का कोई अंग जब खराब होने लगता है तो उसके लक्षण बहुत बाद में दिखाई पड़ते हैं, जब लक्षण दिखाई पड़ते हैं, तब तक बहुत देर हो चुकी होती है। ऐसे में समय-समय पर डॉक्टर की सलाह और पैथालॉजी जांच जरूरी होती है। जिससे गंभीर बीमारियों से बचा जा सकता है।

इस अवसर पर एसजीपीजीआई के पैथालॉजी विभाग के प्रो. मनोज जैन ने बताया कि अंग प्रत्यारोपण में बायोप्सी जांच अहम भूमिका निभाती है। इस जांच से प्रत्यारोपित अंग के रिजेक्शन अथवा उसमें हो रहे संक्रमण का पता चलता है। समय-समय पर जांच होने से डॉक्टर सही इलाज कर सकते हैं। इससे अंग प्रत्यारोपण की सफलता दर भी बढ़ती है। यही वजह है कि भारत में कोविड-19 के बाद अंग प्रत्यारोपण की संख्या में 27 प्रतिशत की वार्षिक वृद्धि हुई है। राष्ट्रीय अंग और ऊतक प्रत्यारोपण संगठन (NOTTO) के आंकड़ों के अनुसार, पहली बार वर्ष 2022 में 15,000 से अधिक प्रत्यारोपण किए गए। पिछले कुछ वर्षों में स्टेट ऑर्गन एंड टिश्यू ट्रांसप्लांट (एसओटीटीओ) भी काफी सक्रिय हो गया है। उन्होंने बताया कि इस कार्यक्रम में 140 पैथोलॉजिस्ट शामिल हुये और आर्गन ट्रांसप्लांट में बायोप्सी और अन्य जांचों की जरूरत पर जानकारी साझा की।
सीएमई में डॉ. विनीता अग्रवाल, आयोजन अध्यक्ष डॉ. सीमा शर्मा शामिल रहीं।
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