बरेली: दिल को भी झटका... एक बिल्डिंग की पांच-पांच टैक्स आईडी

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Edited By Amrit Vichar
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नगर निगम में सैकड़ों की तादाद में ऐसे केस, लोगों को लगातार भेजे जा रहे हैं अलग-अलग आईडी से बिल

बरेली, अमृत विचार। नगर निगम के टैक्स विभाग की गड़बड़ियां लोगों को बेवजह चक्कर ही नहीं कटवा रहीं, उनके दिलोदिमाग को भी झटका दे रही हैं। किसी बिल्डिंग की तीन तो किसी के पांच फर्जी आईडी बनाकर एक के बाद एक टैक्स बिल जारी किए जा रहे हैं। कई ऐसे लोगों को भी बिल भेज दिए गए हैं जो पहले ही टैक्स जमा कर चुके हैं। कुल मिलाकर सैकड़ों की संख्या में ऐसे मामले हैं और कई तो सालों पुराने हैं। पीड़ित लोगों का आरोप है कि सारे प्रमाणों के साथ शिकायत करने के बावजूद नगर निगम में कोई सुनने को भी तैयार नहीं है।

नगर निगम के जोन-4 में आने वाले राजेंद्रनगर के मकान नंबर ए-252 के मालिक रिटायर्ड बैंक कर्मचारी राजेश भाटिया के मुताबिक उनकी टैक्स आईडी 064117 है। चालू वित्तीय वर्ष 2023-2024 का पूरा बिल वह नगर निगम में जमा कर चुके हैं लेकिन इसी पते पर दूसरी आईडी 123156 बनाकर उन्हें नोटिस जारी कर एक लाख से ज्यादा का बकाया दिखाया गया है। राजेश ने बताया कि डबल आईडी खत्म कराने के लिए वह कई दिनों से नगर निगम के बाबुओं और अफसरों के पास चक्कर लगा रहे हैं लेकिन कोई यह बताने को तैयार नहीं हैं कि उनकी फर्जी टैक्स आईडी कब और कैसे खत्म होगी।

जनकपुरी गुरुद्वारे के सामने रहने वाले भरत गाबा के मकान की तो पांच टैक्स आईडी बना दी गई हैं। भरत का कहना है कि उनका मकान नंबर 18 है, लेकिन नई-नई टैक्स आईडी में उनका पता ए-18 दिखाया जा रहा है। उन्होंने आरोप लगाया कि उनके घर के बाहर ही एक होटल है जहां नगर निगम कर्मचारियों ने ठिकाना बना रखा है। वहीं बैठकर सरकारी कामकाज भी निपटाया जाता है और लोगों के टैक्स बिलों में घालमेल किया जाता है।

परेशान लोगों का सवाल- जब सबकुछ कंप्यूटराइज्ड तो कैसे हो रहें हैं घपले
एक-एक इमारत की पांच-पांच तक आईडी बनाकर टैक्स बिल जारी कर दिए जाने से तमाम लोगों के होश उड़े हुए हैं लेकिन नगर निगम के अफसरों को इसकी कोई परवाह नहीं है। पीड़ित लोगों का कहना है कि वे जब भी नगर निगम या जोनल कार्यालय पहुंचते हैं, उन्हें यह कहकर समस्या जल्द ठीक होने का दिलासा दिया जाता है कि सबकुछ कंप्यूटराइज्ड हो चुका है, उनका अतिरिक्त बिल खुद खत्म हो जाएगा लेकिन इसके बाद रिमाइंडर नोटिस भेज दिया जाता है। सवाल है कि जब सबकुछ कंप्यूटराइज्ड है तो गड़बड़ी कैसे हो रही है। लोगों का आरोप है कि ये बिल मैनुअली तैयार कर उन्हें परेशान किया जा रहा है। कई फर्जी आईडी बरसों बाद भी खत्म नहीं हुई हैं।

... मगर जहां मेहरबानी, वहां टैक्स नाम का
साहूकारा में रहने वाले आशीष अग्रवाल ने दर्जी चौक के पास गली में बनाए गये अवैध होटल पर नगर निगम की ओर से लगाए गए नाममात्र के टैक्स के मामले में जनसुनवाई में नगर आयुक्त को पत्र सौंपा है। इसमें कहा गया है कि व्यावसायिक इमारत होने के बावजूद इस होटल पर घरेलू जितना टैक्स लगाया गया है। एक तरफ नगर निगम के अफसर टैक्स वसूली बढ़ाने के दावे कर रहे हैं, दूसरी तरफ खुद ही ऐसे मामलों की अनदेखी कर रहे हैं। उन्होंने कहा है कि यह होटल अवैध रूप से गली में बना है। फिर भी कई शिकायतों के बावजूद जांच तक नहीं की जा रही है।

बकायादारों को नोटिस भेजने की प्रक्रिया में जो डबल आईडी के प्रकरण सामने आ रहे हैं, उन्हें दिखवाया जा रहा है और जांच के बाद खत्म भी किया जा रहा है। किसी टैक्सदाता ऐसे प्रकरण से परेशान होने की जरूरत नहीं है- पीके मिश्रा, सीटीओ।

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