अल्पसंख्यक अधिकार दिवस पर बोले अनीस मंसूरी- मुस्लिमों के साथ हो रहा भेदभाव, सुरक्षा दे सरकार
लखनऊ, अमृत विचार। अल्पसंख्यक अधिकार दिवस के अवसर पर सोमवार को राजधानी लखनऊ के लालबाग स्थित पसमांदा मुस्लिम समाज कार्यालय में संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस मौके पर पसमांदा मुस्लिम समाज के राष्ट्रीय अध्यक्ष व पूर्व मंत्री अनीस मंसूरी ने सभी को अल्पसंख्यक
अधिकार दिवस की बधाई दी।
इसके साथ ही उन्होंने कहा कि अल्पसंख्यक अधिकार दिवस भाषाई, धर्म, जाति और रंग के आधार पर अल्पसंख्यक समुदाय से संबंधित लोगों के अधिकारों को बढ़ावा और संरक्षित करने के लिए एक महत्वपूर्ण दिन है। वहीं इस अवसर पर शाहिद कस्सार, हाजी नसीम अहमद, एजाज अहमद राईनी, मौलाना इलियास मंसूरी, हाजी शब्बन, शब्बीर अहमद मंसूरी के अलावा कई अन्य लोग मौजूद रहे।
उन्होंने कहा कि भारत में बहुमत-अल्पसंख्यक मुद्दों पर अक्सर असहमति और चर्चा, धार्मिक और राजनीतिक असंतोष पैदा करने के लिए उभरती है। भले ही भारतीय संविधान हमेशा अल्पसंख्यकों समेत सभी समुदायों को समान और न्यायपूर्ण अधिकार हो लेकिन अल्पसंख्यकों के अधिकारों से संबंधित कुछ मुद्दे अभी भी जीवित हैं।
उन्होंने आगे कहा कि अल्पसंख्यक समाज को बढ़ावा देने के लिए सरकार कई योजनाएं चलाती हैं। लेकिन मुस्लिम समाज को उनका अधिकार और योजनाओं के लाभ से वंचित किया जाता है। साल 1992 में राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग का गठन किया गया था। लेकिन जब किसी मुस्लिम को समस्या होती है तो दर दर धक्के खाता है उसे मदद नहीं मिलती।
अनीस मंसूरी ने कहा कि मुस्लिम समाज को अल्पसंख्यक कहकर अपमानित किया जाता है। हम इस देश के मूल निवासी हैं। आज के समय में मुस्लिम समाज के साथ भेदभाव किया जा रहा है। जो कि गलत है। अल्पसंख्यक समाज में मुस्लिम के अलावा सिख, पारसी, जैन, ईसाई, बौद्ध धर्म के लोग भी आते हैं।
लेकिन लोगों को लगता है कि अल्पसंख्यक सिर्फ मुस्लिम होता है। ऐसे में आज के समय हमारी तादाद ज्यादा है और जब भी कुछ होता है तो मुसलमानों को टारगेट किया जाता है और परेशान किया जाता है। हमारी सरकार से सिर्फ एक मांग है कि इस देश के अंदर अल्पसंख्यक समाज के लोग सुरक्षा चाहते हैं और भेदभाव न करने की गारंटी दी जाए। आम मुसलमान और पसमांदा मुस्लिम सरकार से सिर्फ सुरक्षा और सम्मान की मांग करता है।
यह भी पढ़ें-मीरजापुर की बेटी प्रज्ञा को BHU में मिला एक साथ मिला पांच Gold Medal, क्षेत्र में हर्ष
