बरेली: सब्जी में सोयाबीन की मात्रा कम तो कहीं बच्चे घर के टिफिन का खाना खाते मिले

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Edited By Amrit Vichar
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नगर के परिषदीय स्कूलों में परखा मिड-डे-मील का हाल

बरेली, अमृत विचार। मिड-डे-मील योजना पर करोड़ों रुपये फूंके जा रहे हैं, मगर इसके बाद भी बच्चों को मानक अनुरूप खाना नहीं मिल पा रहा है। सोमवार को नगर क्षेत्र के चार परिषदीय स्कूलों में मिड-डे-मील की स्थिति परखी तो सब्जी में सोयाबीन की मात्रा कम मिली तो कहीं बच्चे घर के टिफिन का खाना खाते मिले। उनसे पूछा कि स्कूल का खाना क्यों नहीं खाते हो तो उनका जवाब था कि रोटी का स्वाद अजीब लगता है। इसलिए घर से टिफिन लेकर आते हैं। नगरीय क्षेत्र के स्कूलों में एनजीओ के माध्यम से भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है।

कटरा चांद खां स्थित बालजती प्राथमिक स्कूल में इंटरवेल के समय अधिकतर छोटी कक्षा के बच्चे ही खाना खा रहे थे, जबकि कक्षा छह से आठवीं तक के बच्चे घर से टिफिन लेकर आए थे। कुछ बच्चे बाहर से मिलने वाले समोसे खा रहे थे। पूछने पर बच्चों ने बताया यहां का खाना अच्छा नहीं लगता, रोटी का स्वाद अजीब है इसलिए नहीं खाते। रोटी में बटर नहीं लगा था। खाना देते समय किसी शिक्षक और कर्मचारी ने भी खाना को नहीं चखा, ताकि खाने की गुणवत्ता पता लगाया जा सके।

खुर्रम गौटिया स्थित प्राथमिक विद्यालय में हेडमास्टर अनुपस्थित मिलीं।जहां सब्जी में सोयाबीन की मात्रा काफी कम थी। सूफीटोला प्राथमिक विद्यालय और काजी टोला प्राथमिक विद्यालय में भी सब्जी में सोयाबीन की मात्रा कम थी, लेकिन रोटियों पर बटर लगा था। शिक्षकों ने बताया कि केले का वितरण छुट्टी के समय किया जाता है।

खाना दिल्ली के बाल विकास एनजीओ से आता है। खाना ठीक है, लेकिन मैं खुद नहीं खाती हूं, क्योंकि शुगर की मरीज हूं- शालिनी गुप्ता, हेडमास्टर, सूफीटोला प्राथमिक विद्यालय।

खाना ठीक-ठाक रहता है। अधिकांश बच्चे खाते हैं। कुछ नहीं खाते हैं- महेश शर्मा, हेड मास्टर, बालजती स्कूल

अभी रोटी में बटर लगकर आ रहा है। बीच में खाने गुणवत्ता अच्छी नहीं थी, लेकिन अब ठीक है- सुनीता आर्या, हेडमास्टर, काजी टोला, प्राथमिक विद्यालय।

मिड-डे-मील बच्चों की बातचीत
मुझे स्कूल का खाना अच्छा नहीं लगता है, इसलिए घर से लेकर आता हूं- नीतेश, छात्र, बालजती स्कूल।

रोटी का स्वाद अजीब लगता है। काफी समय से मैंने यहां का खाना नहीं खाया है- यश, छात्र बालजती स्कूल।

विद्यालय का खाना अच्छा नहीं लगता। अधिकतर छोटी कक्षाओं के बच्चे ही यहां का खाना खाते हैं- रोहित, छात्र, बालजती स्कूल।

आज सब्जी में सोयाबीन की बरी बहुत कम थीं लेकिन स्वाद ठीक था- अजहर, छात्र, सूफीटोला प्राथमिक विद्यालय।

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