Video: केजीएमयू में नर्सों की दिहाड़ी मजदूरों जैसी हालत, कहा- ठेला लगा लेंगे पर काम नहीं करेंगे

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Edited By Amrit Vichar
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लखनऊ, अमृत विचार। किंग जार्ज चिकित्सा विश्वविद्यालय में आउटसोर्सिंग पर तैनात नर्सों की हालत चिंताजनक है। यह हम नहीं कह रहे हैं बल्कि आज प्रदर्शन में शामिल नर्सों ने खुद कहा है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के साथ प्रदर्शन में शामिल नर्सों ने समान कार्य समान वेतन की मांग की है। नर्सों को इस महीने में महज 14 हजार रूपयें वेतन के रूप में मिला है। जबकि उनकी तनख्वाह 19 हजार के करीब थी। करीब पांच हजार की कटौती होने से नर्सों का गुस्सा बुधवार को फूट पड़ा। यही हालत अन्य आउटसोर्स कर्मचारियों का भी रहा। इस महीने में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को वेतन काट कर दिया गया है। आरोप है कि एजेंसी तानाशाही पर उतर आई है। केवल वेतन ही नहीं काट रही है बल्कि इस बार बोनस में भी रूपयों की कटौती हुई है।

दरअसल, बुधवार को वेतन कटौती से नाराज और समान कार्य समान वेतन की मांग को लेकर किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी में आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने प्रदर्शन शुरू कर दिया है। आरोप है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को इस महीने का वेतन काट कर दिया गया है। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों में 600 से अधिक स्टाफ नर्स भी शामिल हैं। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों ने ओपीडी से लेकर ट्रामा सेंटर तक जमकर प्रदर्शन और नारेबाजी किया है। इस दौरान केजीएमयू ट्रामा सेंटर के गेट पर पहुंच कर कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया। जिसके चलते ट्रामा सेंटर का मुख्य दरवाजा बंद कर दिया गया और मरीजों की भर्ती दूसरे गेट से शुरू की गई। पुलिस और केजीएमयू प्रशासन ने आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को समझाने की कोशिश की, लेकिन वह नहीं माने काफी देर तक ट्रामा सेंटर के मुख्य दरवाजे पर खड़े होकर नारेबाजी करने लगे।

बताया जा रहा है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के प्रदर्शन शुरू करने से ओपीडी सेवाएं बाधित हुई। साथ ही ट्रामा सेंटर के कुछ काउंटर से भी कर्मचारियों ने काम बंद कर दिया था। कुछ काउंटर को छोड़कर आउटसोर्सिंग कर्मचारी प्रदर्शन में शामिल हो गए थे। आउटसोर्सिंग कर्मचारियों को 1 महीने में मिलने वाली चार छुट्टियां का पैसा भी काट लिया गया है। जिससे आउटसोर्सिंग कर्मचारी नाराज हैं। करीब 5000 कर्मचारियों ने काम बंद करने का फैसला लिया। शाम को कर्मचारियों को केजीएमयू प्रशासन ने वार्ता के लिए बुलाया है।

ट्रामा सेंटर पर प्रदर्शन कर रही नर्सों ने कहा है कि यह आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का उत्पीड़न है। बायोमेट्रिक अटेंडेंस की वजह से जो डर कर्मचारियों में पैदा हुआ था, वह आज दिखाई पड़ रहा है। आउटसोर्सिंग कर्मचारी के लिए राजपत्रित और साप्ताहिक अवकाश लेना काफी कठिन होता जा रहा है, अवकाश लेने पर वेतन से पैसे कटने का डर हमेशा बना रहता था। उन्होंने बताया कि इससे पहले भी कर्मचारियों ने प्रदर्शन किया था और उनकी मांगों को केजीएमयू प्रशासन ने मान भी लिया था, लेकिन ऐसा होता नहीं दिख रहा है। हम लोगों के साथ बंधुआ मजदूरों की तरह बर्ताव हो रहा है।

किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी के एमएस डॉक्टर डी हिमांशु ने बताया है कि आउटसोर्सिंग कर्मचारियों के प्रदर्शन से स्वास्थ्य सेवाओं पर कोई फर्क नहीं पड़ा है। ट्रामा सेंटर में मरीजों की भर्ती की जा रही है।

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