कासगंज : 12 करोड़ की लागत से बदली जाएगी गंगा की धार, हर साल तराई में तबाही मचाती है बाढ़, शासन से मिली हरी झंडी

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Edited By Amrit Vichar
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कासगंज, अमृत विचार। हर साल बाढ़ आती है। तबाही मचती है। तराई के लोग एक दूसरे की ओर झांकते है। भले ही सिंचाई विभाग अपने हद में काम करने का दावा कर रहा हो, लेकिन कासगंज जिला प्रशासन के अधीन बदायूं के सिंचाई विभाग के गांव मूलभूत सुविधाओं से वंचित हैं और बाढ़ का दंश झेल रहे हैं। इस बीच अब शासन ने कासगंज जिले को सौगात दी है।  12 करोड़ की लागात से तैयार होने वाले इस रोड की तस्वीर बदली जाएगी।

WhatsApp Image 2023-12-30 at 6.50.42 PMकासगंज के गांव बरौना क्षेत्र में आई बाढ़ का फाइल फोटो

पिछले वर्ष बाढ़ और कटान की तबाही में सैंकड़ों बीघा जमीन गवां चुके बरौना गांव के किसानों को अब गांव के अस्तित्व के बचने की उम्मीद जगी है। शासन ने 7 करोड़ रुपये से बरौना को बचाने के लिए किए जाने वाले कार्यों की कार्य योजना को मंजूरी दे दी है। सिंचाई विभाग गंगा की धारा को गांव के पास परिवर्तित करके गांव के अस्तित्व को नया जीवन देने की राह पर काम करेगा।

गांव के अस्तित्व को बचाने की होती रही जद्दोजहद
पिछले वर्ष इस गांव पर गंगा की धारा कहर बनकर टूटी। गंगा की तीव्र धारा ने किसानों की जमीनों को महज एक माह में ही काट लिया। इसके बाद गांव की सड़क भी गंगा के निशाने पर आ गई और पक्की सड़क भी कट गई। सड़क कटने के बाद भी गांव के अस्तित्व को बचाने की जद्दोजहद होती रही।

गांव के काली मंदिर तक गंगा ने कर दिया कटाव
आबादी के पास तक गंगा की धारा पहुंच गई। गंगा की धारा ने गांव के काली मंदिर के पास तक कटान कर दिया और किसान भूरे के मकान की नींव तक खोखली कर दी। बरौना गांव की पांच हजार की आबादी है। इस गांव को तबाह होता देख आस पास के गांव के लोग भी चिंतित हो गए।

मुख्यमंत्री के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने शासन को भेजा प्रस्ताव
जिलाधिकारी के पत्र पर सिंचाई विभाग के प्रदेश के अफसरों ने यहां पहुंचकर गांव बचाने की मुहिम युद्धस्तर पर जारी रखी। जैसे तैसे गांव बच सका, लेकिन गांव बचाने एवं अन्य तीन काम कराने के स्थायी प्रस्ताव को सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने तैयार किया। इस प्रस्ताव को शासन ने मंजूरी दी है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के निर्देश पर सिंचाई विभाग ने शासन को प्रस्ताव भेजा। जिसे अब स्वीकृति मिल गई है।

72 किलोमीटर तक बहती है गंगा की धार
जिले की सीमा में 72 किलोमीटर तक गंगा की धार बहती है। जिससे इलाके बाढ़ से प्रभावित होते है। मानूसन सत्र में जब भी बाढ़ आती है लोगों को समस्या का सामना करना पड़ता है। अब 12 करोड़ की लागत से तराई क्षेत्र में चार तट बंध बनाएगा। जिससे गंगा की धार कटान न कर सके। - अरुण कुमार, अधिशासी अभियंता, सिंचाई  

तो बदली जाएगी गंगा की धार 
गंगा नदी की धार से बाढ़ के दौरान कटान न हो, गांव पानी में न डूबे, ऐसे में सुरक्षा की मजबूत दीवार तैयार कर गंगा की धार का रुख बदलने का प्रयास किया जाएगा। इसके लिए अभी से तैयारी शुरू कर दी गई है।

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