मुनाफाखोरी का खेल : मंडी से दोगुने दाम पर फुटकर बाजार में बिक रहा प्याज
मुरादाबाद, अमृत विचार। बेलगाम बाजार और बेहिसाब महंगाई की झलक देखनी हो तो प्याज की दुकान पर आ जाइए। थोक मंडी से फुटकर बाजार तक आते-आते प्याज की कीमतें दोगुनी हो जा रही हैं। सच यह है कि अब प्याज किचन का गणित बिगाड़ रहा है और इसे काटने से पहले ही खरीदारों को आंसू …
मुरादाबाद, अमृत विचार। बेलगाम बाजार और बेहिसाब महंगाई की झलक देखनी हो तो प्याज की दुकान पर आ जाइए। थोक मंडी से फुटकर बाजार तक आते-आते प्याज की कीमतें दोगुनी हो जा रही हैं। सच यह है कि अब प्याज किचन का गणित बिगाड़ रहा है और इसे काटने से पहले ही खरीदारों को आंसू निकल रहे हैं। जो प्याज मंडी में बीस से तीस रुपये प्रति किलो उपलब्ध है, वही फुटकर बाजार में पचास से साठ रुपए प्रतिकिलो तक बेचा जा रहा है। मुनाफाखोरी के इस खेल को रोकने में प्रशासन नाकाम साबित हो रहा है।
लाकडाउन ने प्याज के बाजार को पहले ही प्रभावित किया था। जानकार इसके पीछे प्याज की अधिक उपज को भी अहम कारण बता रहे थे। अब बाजार खुल गए हैं। आयोजन भी हो रहे हैं और होटलों में भी इसकी खपत बढ़ गई है। शायद इसी वजह से प्याज का बाजार उछलता जा रहा है। मध्यम वर्ग को प्याज की कीमत रुला रही है। मंडी से बाजार और घर के इस सफर में प्याज की कीमत के दोगुना होने के पीछे की कहानी पर जिम्मेदार कुछ भी बोलने को तैयार नहीं हैं।
मंडी सचिव अशोक कुमार का कहना है कि कीमत पर सरकार का नियंत्रण नहीं है। मंडी शुल्क भी माफ हो गया है। उधर, बाजार के बोल कुछ यू हैं। लाइनपार में राहुल यादव ने ठेले से प्याज पचास रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खरीदा। बुद्धिविहार और मानसरोवर कोलानी में ठेले पर प्याज भी पचास के पार बिका। रामंगगा विहार, बुध बाजार, गलशहीद, करूला और जामा मस्जिद इलाके में प्याज की कीमत अलग-अलग रही। फुटकर में प्याज 50, 55 और 60 रुपये प्रति किलो तक बिका।
रविवार को थोक बाजार 25, 31 और 33 रुपये प्रति किलोग्राम के हिसाब से खुला। एक हजार बोरी यानी की पांच सौ क्विंटल प्याज की खेप आई और बाजार में चली गई। यानी प्याज के बाजार में लूट मची है। आम लोगों का जायका खराब हो रहा है और प्रशासन कीमत के मुद्दे पर शांत है।
अगले महीने कम हो सकते हैं दाम : मनीष शंखधार
आढ़ती मनीष शंखधार सोनू कहते हैं कि दस सितंबर के बाद से बाजार चढ़ा है। लाकडाउन के दौरान तो प्याज का धंधा पूरी तरह मंदा रहा। संभव है कि अगले महीने प्याज की कीमत में गिरावट आए। अभी नासिक और भोपाल से खेप आ रही है। अगले महीने में अलवर राजस्थान की नई प्याज आ जाएगी। थोक दुकानदार दिनेश सैनी का कहना है कि थोक बाजार बहुत सही नहीं चल रहा है। यह जरूर है कि बारिश की वजह से खेप आने में देर हो रही है। लोकल प्याज खत्म हो गई है, इस वजह से कुछ बाजार चढ़ा है। बीते साल हर दिन चार ट्रक आते थे। अब दो गाड़ी का ही माल आ रहा है। एक हजार बोरी प्याज की बिक्री है।
यह तो सरेआम डाका है भाई
मुरादाबाद। कोरोना से बाजार का उतार-चढ़ाव अब लोगों को तनाव दे रहा है। बाजार पर किसी का नियंत्रण ही नहीं दिख रहा। गली, मोहल्ले और ठेले के बाजार का अपना मिजाज है। जो चाहें कीमत वसूल लें। ‘अमृत विचार’ ने जब प्याज की महंगाई को लेकर लोगों से सवाल किए तो उन्होंने इन हालातों के लिए प्रशासन को ही जिम्मेदार ठहराया। संभल रोड निवासी फुरकान पाशा कहते हैं कि अचानक प्याज के भाव चढ़े हैं। जैसा बाजार वैसी कीमत ली जा रही है। अधिवक्ता महावीर प्रसाद मौर्य का कहना है कि दाम को लेकर सरकार की रवैया ठीक नहीं है। यह तो मनमानी है। दुकानों पर प्याज के दाम पचास रुपए प्रति किलो के पार पहुंच गए हैं।
वहीं, सामजिक कार्यकर्ता रंजीत कौर का कहना है कि इस दौर में घर चलाना बहुत भारी पड़ रहा है। खाने के सामान महंगे हो गए हैं। प्याज तो किचन की जरूरत है लेकिन कीमत की वजह से सभी को प्याज खरीदना भारी पड़ रहा है। प्रधान उवैस का कहना है कि बड़ी विडंबना है। जब हमारे खेत में प्याज की फसल रहती है तो दाम ही नहीं मिलता। अब बाहर का प्याज आया है तो आम लेागों को खरीदना भारी पड़ रहा है।
