बदायूं: सरकार से अनुदान पर लेकर ड्रोन उड़ाएंगी महिलाएं 

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Edited By Amrit Vichar
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महिलाओं को ड्रोन खरीदने पर सरकार की ओर से मिलेगा अनुदान

बदायूं, अमृत विचार: समूह की महिलाओं के नाम एक और उपलब्धि जुड़ जाएगी। अब वह ड्रोन सखी के नाम से जानी जाएंगीं। महिलाएं पहली बार ड्रोन चलाती दिखेंगी। इसके लिए उन्हें अनुदान पर ड्रोन उपलब्ध कराया जाएगा। साथ ही इसके संचालन का प्रशिक्षण भी दिया जाएगा। ड्रोन को किराए पर देकर न सिर्फ उनकी आय में वृद्धि होगी बल्कि खुद के खेतों में भी रसायनिक उर्वरकों का छिड़काव करेंगी।

जिले में 19 हजार से महिलाओं के समूह गठित हैं। महिलाओं की आय में वृद्धि हो सके इसके लिए राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन (एनआरएलएम) की ओर से समय समय पर योजनाओं की जानकारी दिये जाने के साथ ही उन्हें प्रशिक्षित किया जाता है। विभाग द्वारा मिल रही सहायता के सहारे जिले की महिलाएं जरी जरदोरी, पेंटिंग के साथ ही गोबर से पेंट बना रही हैं।

उनके द्वारा बाल विकास के आंगनबाड़ी केंद्रों पर बच्चों और महिलाओं को दिये जाने वाले पोषाहार को भी बनाया जा रहा है। इसके लिए जिले में छह स्थानों पर प्लांट संचालित हो रहे हैं। महिलाओं को आगे बढ़ाने के लिए विभाग द्वारा एक और कदम आगे बढ़ाया गया है।

अब महिलाओं को अनुदान पर ड्रोन दिलाया जाएगा। एक ड्रोन की कीमत पांच से छह लाख होने की दशा में महिलाओं का कलस्टर बनाकर उन्हें उपलब्ध कराया जाएगा। उसका संचालन करने के लिए उन्हें प्रशिक्षण दिया जाएगा। ड्रोन प्राप्त करने के बाद महिलाएं उसका किराए पर संचालन करेगीं। साथ ही स्वयं के खेती कार्याों में भी इस्तेमाल कर सकेंगीं।

ड्रोन सखियां करेंगी ये खास काम
एनआरएलएम से जुड़ी महिला स्वरोजगार समूहों की महिलाएं ड्रोन सखियां कहलाई जाएगीं। ड्रोन के माध्यम से फसलों पर उर्वरकों और दवाओं का छिड़काव करेंगी। इससे किसानों का समय बचेगा। उन्हें अनावश्यक रूप से फसलों में खाद और दवा छिड़काव के लिए चार से पांच घंटे का वक्त बर्बाद नहीं करना पड़ेगा।

हर ग्राम पंचायत से महिलाओं का होगा चयन
डीसी उपायुक्त बृजेश शुक्ल ने बताया कि जिले की सभी ग्राम पंचायतों के लिए ड्रोन सखी तैयार करने की योजना पर काम चल रहा है। दस-दस ग्राम पंचायतों का एक-एक क्लस्टर बनाकर महिलाओं को प्रशिक्षित कर फसलों पर उनसे दवाओं और उर्वरक का छिड़काव कराया जाएगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी।

एनआरएमलएम के जिला मिशन प्रबंधक सुरेश कुमार ने बताया कि स्वयं सहायता समूह की महिलाओं को ड्रोन सखी बनाने के क्रम पर काम चल रहा है। अभी यह योजना मॉडल के तौर पर बनारस में संचालित हुई है। इसे जल्द ही प्रदेश अन्य जनपदों में भी लागू किया जाना है। इसके लिए शासन स्तर से आदेश प्राप्त हो गये हैं। फिलहाल महिलाओं के कलस्टर बनाने को कहा गया है। शासन से आदेश प्राप्त होने के बाद महिलाओं को ड्रोन की खरीद कराने के साथ ही प्रशिक्षण दिलाने का काम शुरू कर दिया जाएगा।

खेतों में तरल रसायिनक उर्वरकों के प्रयोग करने पर जोर दिया जा रहा है। इसी तहत इफको द्वारा जिले में ड्रोन के माध्यम से फसलों पर रसायनिक उर्वरकों पर छिड़काव कर प्रदर्शन किया जा रहा है। प्रदर्शन के दौरान अधिक  से अधिक से जानकारी महिलाओं को दी जाती है। स्वता रोजगार विभाग के माध्यम से समूह की महिलाओं को ड्रोन दिलाया जाएगा। इससे उनकी आय में वृद्धि होगी। साथ ही वह अपने कार्य भी स्वयं कर सकेंगी---डीके सिंह, जिला कृषि अधिकारी।

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