लखनऊ: आयोग ने कहा, सिर्फ मुकदमे से नहीं रुकेगी कार्यवाही

Amrit Vichar Network
Edited By Amrit Vichar
On

लखनऊ। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) सहित बिजली दर प्रस्ताव व स्लैब परिवर्तन के लिए विद्युत नियामक आयोग में मध्यांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा दाखिल याचिका पर सोमवार को आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई हुई। सुनवाई आयोग चेयरमैन आरपी सिंह सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की उपस्थित …

लखनऊ। प्रदेश की बिजली कम्पनियों द्वारा दाखिल वार्षिक राजस्व आवश्यकता (एआरआर) सहित बिजली दर प्रस्ताव व स्लैब परिवर्तन के लिए विद्युत नियामक आयोग में मध्यांचल व पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम द्वारा दाखिल याचिका पर सोमवार को आम जनता की सार्वजनिक सुनवाई हुई।

सुनवाई आयोग चेयरमैन आरपी सिंह सदस्य केके शर्मा व वीके श्रीवास्तव की उपस्थित में वीडियो कान्फ्रेन्सिंग के माध्यम से सम्पन्न हुई। जिसमें सैंकड़ों की संख्या में उपभोक्ताओं व सम्बन्धित कम्पनी के प्रबन्ध निदेशक व निदेशक सहित अभियन्ता शामिल हुए। दोनों बिजली कम्पनियों द्वारा अपनी-अपनी कम्पनी का ब्योरा दिया गया।

प्रदेश के विद्युत उपभोक्ताओं की तरफ से अपनी बात रखते हुये उप्र राज्य विद्युत उपभोक्ता परिषद के अध्यक्ष अवधेश कुमार वर्मा ने कहा कि विद्युत उपभोक्ताओं का बिजली कम्पनियों पर लगभग रूपया 13,337 करोड़ निकल रहा है जिसके आधार पर उपभोक्ताओं की बिजली दरों में 16 प्रतिशत की कमी किए जाने का प्रस्ताव दिया है। जिससे पावर कार्पोरेशन नाराज है। उसने दरों में कमी नहीं हो सके अपटेल में मुकदमा दाखिल कर मामले को उलझा दिया है।

उपभोक्तआ परिषद ने आगे पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम के निजीकरण पर कहा कि आयोग यहां बिजली दर की सुनवाई में कर रहा है। दूसरी ओर पूर्वांचल विद्युत वितरण निगम को बेचने की तैयारी हो रही है। उन्होंने कहा कि जब कार्पोरेशन ने पूर्वांचल डिस्काम में सुधार के लिये अगले पांच वर्षों में आठ हजार 801 करोड़ रूपया करने की योजना तैयार की है। फिर ऐसे में पूर्वांचल को बेचने की साजिश क्यों की जा रही है। जबकि टोरंट पावर कम्पनी की विफलता सबके सामने है।

सुनवाई के दौरान आयोग चेयरमैन आरपी सिंह ने कहा कि बिजली कम्पनियों द्वारा केवल अपटेल में मुकदमा दाखिल करने से कुछ नहीं होगा, जब तक कोई फैसला नहीं आता आयोग अपने हिसाब से कार्यवाही करेगा। चेयरमैन नियामक आयोग ने निजीकरण पर उपभोक्ता परिषद के सवाल पर कहा कि विद्युत अधिनियम 2003 की धारा 17(3) के तहत दी गयी व्यवस्था में बिजली कम्पनियों को कोई भी निर्णय लेने से पहले आयोग के सामने आना होगा। आयोग कंपनियों की गतिविधियों पर नजरें बनाए हुए हैं। सभी उपभोक्ताओं द्वारा उठाई गयी आपत्तियों व सुझावों पर गम्भीरता से विचार करने के बाद आयोग बिजली दर पर अन्तिम निर्णय लेगा।

उपभोक्ता परिषद ने आगे सुनवाई में अपनी बात रखते हुये मध्यांचल कम्पनी पर करारा हमला बोलते हुुये कहा कि मध्यांचल कम्पनी ने स्वतंत्र रिपोर्ट में लिखा है कि वर्ष 2018-19 में मध्यांचल कम्पनी के अभियन्ताओं द्वारा राजस्व बढ़ाने के लिए 501 करोड़ फर्जी बुकिंग की गयी जो अपने आप में बड़ा मामला है।

मध्यांचल के स्वतंत्र आडिटर ने कहा कि बिजली कम्पनी का वर्ष 18-19 में कुल घाटा 11 हजार 967 करोड़ था, इसके पहले पावर कार्पोरेशन ने माननीय अपटेल सहित आयोग को अवगत कराया था, कि 31 मार्च 2016 तक मध्यांचल का कुल घाटा 13 हजार 220 करोड़ है, यह अपने में गोलमाल को साबित करता है। इसी तरह लाईन हानियों के बारे में भी गलत आकड़े दिये गये हैं।

उन्होंने सभी कम्पनियों के एआरआर में विभागीय उपभोक्ताओं से राजस्व का जो ब्रेकप फिक्स चार्ज व ऐनेर्जी चार्ज का अलग-अलग दिया गया है जिसमें एनर्जी चार्ज बहुत अधिक दिखाया गया है। जब उपभोक्ताओं के यहां मीटर ही नहीं लगा तो उनका मीटर यहां तेज कैसे चल रहा है।

संबंधित समाचार