श्रीराम जन्मभूमि आंदोलन... मझोला से पूर्व चेयरमैन भी हुए थे गिरफ्तार, बोले- जेल में किए जाते थे राम भजन
फोटो पूर्व चेयरमैन रामऔतार अग्रवाल।
पीलीभीत, अमृत विचार: वर्ष 1980-90 के दशक में श्री राम जन्मभूमि आंदोलन को लेकर जनपद वासियों द्वारा दिया गया योगदान भी अतीत के पन्नों में दर्ज होगा। अपने आराध्य प्रभु श्री राम के मंदिर निर्माण को लेकर जिले के राम भक्तों ने भी आंदोलन में बढ़चढ़कर हिस्सेदारी की थी।
हालांकि आंदोलन में भागीदारी करने पर इन राम भक्तों को तमाम यातनाएं सहने के साथ जेल की सलाखों के पीछे भी रहना पड़ा, लेकिन उस दौरान उनका हौसला कम नहीं हुआ। इस आंदोलन को लेकर जनपद से पहली तीन गिरफ्तारियां मझोला से हुई थीं। इधर अनवरत 500 सालों के संघर्ष के बाद अब अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की जा रही है, तो उस दौरान आंदोलन का हिस्सा बने यह रामभक्त आज खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं।
श्री राम जन्म भूमि आंदोलन की शुरूआत वर्ष 1984 में हुई थी। उस दौरान श्री राम ज्योति, प्रभातफेरी, श्री राम शिला पूजन समेत आंदोलन और जन जागरण के हर चरण में गांव-गांव तक अलख जगाने और जन मानस को इस आंदोलन में शामिल होने के लिए तैयार करने के लिए एक के बाद एक कार्यक्रम चलते रहे और बड़ी संख्या में लोग इसमें जुड़ते चले गए।
90 के दशक में जन्मभूमि आंदोलन को लेकर राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के अनुसांगिक संगठन धर्म जागरण मंच द्वारा रथयात्रा निकाली गई थी। इस रथयात्रा में देश भर से आए रामभक्तों ने हिस्सा लिया था। रथयात्रा में शामिल होने के लिए जनपद के मझोला कस्बे से भी बड़ी संख्या में राम भक्त बसों में भरकर पहुंचे थे।
इन राम भक्तों को रथयात्रा में शामिल होने के लिए प्रेरित करने वालों में मझोला कस्बे के तीन व्यक्तियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी। उस दौरान आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाले मझोला के पूर्व चेयरमैन राम औतार अग्रवाल ने बताया कि रथयात्रा के बाद विश्व हिंदू परिषद द्वारा अयोध्या में 1990 में जब कार सेवा की घोषणा की थी। आंदोलन को दबाने के कई प्रयास किए गए।
आंदोलन को विफल करने के उद्देश्य से बड़े पैमाने पर राम भक्तों की गिरफ्तारियां शुरू की गई। जिले से रामभक्तों की गिरफ्तारियां का सिलसिला शुरू हो गया था। वर्ष 1990 में 29/30 सितंबर की रात सबसे पहली तीन गिरफ्तारियां मझोला कस्बे से ही हुई थीं।
तत्कालीन सीओ जहानाबाद ने पुलिस फ़ोर्स के साथ मझोला में मेरे घर के अलावा भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता और संघ के सबसे पुराने स्वयंसेवकों में एक रामानंद सिंह और राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के शाहजीपुर विभाग के गौ सेवा प्रशिक्षण गतिविधि प्रमुख राम सिंह चौहान के घर दबिशें दी और हम तीनों को गिरफ्तार कर लिया था।
गिरफ्तारी के बाद सभी को बदायूं जेल में भेज दिया। जेल में 1500 से भी अधिक रामभक्त थे और सभी के प्रति स्थानीय लोगों की इतनी आस्था और प्रेम उमड़ रहा था कि कभी लगा ही नहीं कि वे लोग जेल में हो। एक माह जेल में रहने के बाद सभी को रिहा किया था।
इधर 500 साल के अनवरत संघर्ष के बाद अयोध्या में श्री रामलला की प्राण प्रतिष्ठा की घड़ी आ चुकी है, वही आज यह राम भक्त अपने अतीत को याद कर खुद को गौरवान्वित महसूस कर रहे हैं। अपने बीते पलों को याद करते हुए पूर्व चेयरमैन राम औतार अग्रवाल बताते हैं कि उस समय मन में हर समय बस एक ही धुन रहती थी कि चाहे कोई भी जतन करना पड़े, प्रभु श्री राम को उनके घर में वापस लाना ही है। आज श्रीराम का भव्य मंदिर बन गया है और भगवान अपने घर आ रहे हैं। मैं इस महान क्षण का साक्षी बन रहा हूं। यह मेरे जीवन की सबसे अनमोल उपलब्धि है।
यह भी पढ़ें- पीलीभीत: बढ़ते कोहरे में जिम्मेदारों का सुधार ही बना मुसीबत, हादसे का खतरा... जानिए पूरा मामला
