कम खपत वृद्धि की चुनौती
भारत एक बड़ी और जटिल अर्थव्यवस्था है। देश 1.3 बिलियन से अधिक की आबादी और 2.7 ट्रिलियन डॉलर से अधिक की जीडीपी के साथ दुनिया की सबसे तेजी से विकास करती अर्थव्यवस्थाओं में से एक है। तीव्र आर्थिक विकास के बावजूद ग्रामीण और शहरी दोनों क्षेत्रों में बेरोजगारी एक गंभीर समस्या बनी हुई है।
रविवार को इंडिया रेटिंग्स एंड रिसर्च के मुख्य अर्थशास्त्री देवेंद्र कुमार पंत ने कहा कि इन दिनों भारतीय अर्थव्यवस्था कम खपत वृद्धि की चुनौती का सामना कर रही है, क्योंकि उच्च मुद्रास्फीति निम्न आय वर्ग के लोगों को प्रभावित कर रही है। मुद्रास्फीति के अधिक होने का मतलब है आवश्यक वस्तुओं के दामों में बढ़ोतरी हो रही है।
बढ़ती मंहगाई को नियंत्रित करने के लिए सरकार और रिजर्व बैंक समय-समय पर कुछ ऐसे उपाय करते हैं जिससे मुद्रास्फीति की दर को निम्न स्तर पर लाया जा सके। निचले 50 प्रतिशत वर्ग के लोगों को शीर्ष 50 प्रतिशत आबादी की तुलना में अधिक मुद्रास्फीति का सामना करना पड़ता है।
मुख्य रूप से निचले हिस्से के लोगों द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की कीमतें ऊपरी स्तर द्वारा उपभोग की जाने वाली वस्तुओं और सेवाओं की तुलना में तेजी से बढ़ रही हैं। नवंबर में खुदरा या उपभोक्ता मूल्य सूचकांक आधारित मुद्रास्फीति बढ़कर तीन महीने के उच्चस्तर 5.55 प्रतिशत पर पहुंच गई है जिसका मुख्य कारण खाद्य कीमतों में वृद्धि है।
हालांकि देश की अर्थव्यवस्था अब सामान्य से कम मानसून और उच्च वैश्विक तेल कीमतों के दोहरे झटके से निपटने की जुझारू क्षमता रखती है, लेकिन चुनौती मुद्रास्फीति को नीचे लाने की है, ताकि लोगों के हाथ में खर्च के लिए अधिक पैसा हो। देश ने अपनी चुनौतियों का समाधान करने और अवसरों का लाभ उठाने के लिए विभिन्न सुधार किए हैं।
विश्लेषक वर्ष 2025 तक भारत को पांच ट्रिलियन डॉलर की अर्थव्यवस्था बनाने के लक्ष्य पर विशेष रूप से ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, लेकिन जब तक निजी कंपनियों का निवेश शुरू नहीं होता और सरकार अपने द्वारा किए जा रहे कुछ निवेश को वापस नहीं लेती है, तब तक अर्थव्यवस्था स्थिर वृद्धि की राह नहीं पकड़ेगी।
वित्त वर्ष 2022-23 में भारतीय अर्थव्यवस्था 7.2 प्रतिशत की दर से बढ़ी थी। सरकार का अनुमान है कि चालू वित्त वर्ष में वृद्धि दर 7.3 प्रतिशत रहेगी। वास्तव में यदि भारत अपनी आर्थिक चुनौतियों को दूर कर सके और आर्थिक सुधारों को बनाए रख सके तो वैश्विक नेता बनने की क्षमता रखता है। इसके लिए बड़े पैमाने पर उच्च-मूल्य रोजगार सृजन, विनिर्माण एवं सेवा दोनों क्षेत्रों में संयुक्त प्रयास करने की आवश्यकता है।
