साइक्लोनिक सर्कुलेशन और ओसांक का तापमान शून्य होने से बिगड़ा मौसम
बारिश और ओलावृष्टि की बनी रहती संभावना, घना कोहरा होने के साथ हो रही कड़ाके की सर्दी
रायबरेली, अमृत विचार। पाकिस्तान में बने साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने उत्तर भारत का मौसम बदल दिया है। राजस्थान से आ रही हवा और पश्चिम विक्षोभ सक्रिय होने से उत्तर भारत में घना कोहरा होने के साथ बारिश हो रही है। उत्तर प्रदेश में इस सर्कुलेशन का असर होने से प्रदेश के की जिलों बारिश के साथ ओलावृष्टि हुई है तो पश्चिमी हिस्से में कड़ाके की सर्दी पड़ रही है। साथ ही ओसांक तापमान शून्य होने से कोहरा होने के साथ बारिश और ओलावृष्टि की संभावना बनी हुई है। इस असंतुलन का असर रायबरेली पर भी पड़ा है। मौसम विभाग का कहना है कि इस बार कई कारक मौसम को प्रभावित कर रहे हैं। प्रदूषण के साथ हवा में असमान्य परिवर्तन सर्दी के मौसम को तल्ख बनाए हुए है।
पहाड़ों पर बर्फबारी के साथ पाकिस्तान के साइक्लोनिक सर्कुलेशन और पश्चिमी विक्षोभ एक साथ सक्रिय होने से जिले में सर्दी ने लोगों को हिलाकर रख दिया है। वहीं मौसम असामान्य होने से औसत तापमान में उतार-चढ़ाव रहती है जो शीतलहर को तल्ख किए हुए है। बीच-बीच में बारिश होने से रात के समय पाला पड़ने से गलन अधिक हो रही है।
कोहरा पड़ने और बदली से तापमान में भी लगातार उतार-चढ़ाव दिख रहा है। हाल यह है कि धूप न निकलने से सर्दी से राहत नहीं मिल रही है। वहीं घरों के कमरे एसी सरीखे ठंडे हो गए हैं। सुबह से ही गलन तेज हो जाती है और रात में पाला पड़ने के साथ कोहरा होने से सर्दी का तल्ख चेहरा सामने आया है। बीते चार दिनों से मौसम खुल नहीं रहा है। सुबह घना कोहरा पड़ रहा है तो दोपहर में धुंध छाई रहती है। साथ ही बदली भी बनी हुई है। ऐसे में लोगों को सर्दी सितम सरीखी लग रही है। साथ ही बारिश भी हो रही है। रायबरेली जिले में अब तक 8 एमएम बारिश हो चुकी है। वहीं अधिकतम और न्यूनतम तापमान के बीच का ग्रास रेट कम है जिस कारण सर्दी अधिक पड़ रही है। गलन बहुत अधिक बढ़ गई है। नमी का प्रतिशत तेजी से बढ़ रहा है। रात में पाला पड़ने से भोर पहर की सर्दी जानलेवा हो गई है।

ओसांक के तापमान में असंतुलन
जिस तापमान पर जल-वाष्प संघनित होकर जल (द्रव) रूप में बदल जाती है, उसे ओसांक कहते हैं। ओसांक कई बातों पर निर्भर करता है, दाब, आपेक्षिक आर्द्रता। जनवरी शुरू होने के बाद से ओसांक के तापमान में बड़ा अंतर आया है। जनवरी के तीन दिन न्यूनतम और अधिकतम तापमान औसत से अधिक रहे लेकिन इसके बाद कभी अधिकतम तो कभी न्यूनतम में अधिक गिरावट हुई जिस कारण नमी के साथ हवा के दाब पर असर पड़ा और ओसांक का तापमान शून्य तक पहुंच गए जिस कारण 4 जनवरी से हल्की बारिश हुई तो साथ ही कोहरा और घना हो गया। दोपहर में हल्की धूप निकली लेकिन बदली होने से शीतलहर का प्रकोप बढ़ गया।
पिछले साल भी पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन ने बिगाड़ा मौसम
वर्ष 2023 में पश्चिमी विक्षोभ और साइक्लोनिक सर्कुलेशन का असर बना रहा। इसका नतीजा यह रहा कि 16 जनवरी तक कड़ाके की सर्दी पड़ी और उसके बाद बारिश हुई जिसके चलते हवा की रफ्तार हो गई और फरवरी के दूसरे सप्ताह से गर्मी का असर दिखने लगा। मार्च में मौसम सामान्य से अधिक रहा तो अप्रैल में तो पहले सप्ताह में ही गर्मी ने रिकार्ड तोड़ दिया था। हालांकि मई में चक्रवात सक्रिय हुआ तो मौसम पूरे माह सामान्य से कम रहा। गर्मी मई में अन्य वर्ष की तुलना में कम पड़ी लेकिन जून में गर्मी ने जोर पकड़ना शुरू किया और फिर सामान्य सामान्य से अधिक बना रहा जिसका नतीजा यह रहा कि जुलाई में औसत से 40 फीसदी कम बारिश हुई तो अगस्त में सूखा रहा। सितंबर में बादल बरसे लेकिन वह औसत से 70 फीसदी कम रहे। अक्टूबर और नवंबर में भी तापमान सामान्य से अधिक रहा।
इन दो माह में महज 8 दिन तापमान सामान्य से कम रहा तो इसी तरह दिसंबर में 7 दिन तापमान सामान्य से कम रहा। मौसम विभाग का कहना है कि अचानक पश्चिमी विक्षोभ सक्रिय होते रहे और साथ ही साइक्लोनिक सर्कुलेशन बनता रहा जिस कारण वर्ष 2023 गर्म साल माना जाएगा। प्रदूषण के बढ़ते प्रभाव के कारण ऐसा हो रहा है। पहाड़ों और हिमालय की श्रेणी में तापमान कम होने की जगह औसत से बढ़ रहा है। यही कारण रहा कि अक्टूबर और नवंबर में धुंध और मिस्ट फॉग होने से आंखों का संक्रमण सामने आया था।
वर्जन-
मौसम तकनीकि विशेषज्ञ अजय मिश्रा के मुताबिक पाकिस्तान के तटीय क्षेत्रों में साइक्लोनिक बन रहा है जिससे राजस्थान से आ रही हवा में बदलाव है और साथ ही पश्चिमी विक्षोभ भी सक्रिय हो गया है जिस कारण मौसम बिगड़ा हुआ है। पिछले साल की तरह इस बार औसत तापमान में अधिकता दिखी है लेकिन हवा और कोहरा का घनत्व अधिक होने से धूप नहीं निकली रही है। ओसांक तापमान शून्य तक पहुंचा है जिस कारण शीतलहर का प्रकोप बना हुआ है। साथ ही बारिश और ओलावृष्टि की भी संभावना बनी हुई है।
