पीलीभीत: नगर पालिका का 38 लाख से अधिक टैक्स दबाए बैठे 10 सरकारी विभाग

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Edited By Amrit Vichar
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सालों से जमा नहीं कर रहे थे टैक्स, अब रिवाइज कराकर जमा करने के निर्देश

पीलीभीत, अमृत विचार:  नगर पालिका व्यापारियों और आवासीय लोगों से कर वसूलने के लिए सख्ती कर रही है। जबकि सरकारी विभागों पर कोई जोर नहीं चल पा रहा। अधिकांश सरकारी कार्यालय की ओर से  टैक्स जमा नहीं किया जा रहा है। विभागों पर टैक्स का लाखों रुपये का बकाया है।

आलम ये है कि आमदनी कम होने के कारण नगर पालिका आत्मनिर्भर नहीं बन पा रही है। जिसकी वजह से पालिका नए-नए प्रोजेक्ट तो बनाती है लेकिन बजट के अभाव में वह धरातल पर नहीं उतर पा रहे। इसे लेकर अब नगरपालिका ने सरकारी कार्यालयों से वसूली की रणनीति बनाई है। शहर के दस प्रमुख कार्यालयों पर 38  लाख रुपये से अधिक की बकायेदारी चल रही है। जिसको वसूलने के लिए सभी को नोटिस जारी कर दिए गए हैं।  

शहर के चारों ओर लगभग पांच किलोमीटर का एरिया है। इसमें 26 हजार 500 आवासीय मकान हैं। इसके अलावा शहर के भीतर अस्पताल, होटल, रेस्टोरेंट मिलाकर करीब 800 कमर्शियल संपत्ति है। नगर पालिका इनको को मूलभूत सुविधाएं देने के बदले गृहकर और जलकर टैक्स वसूलती है।

टैक्स वसूलने के लिए टीम बनी हुई, लेकिन इसके बाद भी शहर के तिहाई हिस्से से टैक्स की वसूली नहीं हो पा रही थी। जिसके चलते कई सालों से टैक्स डूबा चल रहा। इनमें आमजन मानस के साथ सरकारी विभाग भी शामिल है। जिन्होंने अपना पालिका में गृहकर और जलकर जमा नहीं किया है। शहर में कुल 110 सरकारी भवन संचालित हो रहे हैं। उन्होंने दशकों से नगर पालिका का टैक्स नहीं दिया है। न ही कई विभागों का टैक्स निर्धारण हो सका है।  

इस वजह से नगर पालिका कर्ज में डूबी चल रही है। वह अपने कर्मचारियों का भुगतान हो या फिर आउटसोर्सिंग कर्मचारियों का वेतन समय पर नहीं दे पा रही है। हांलाकि इस बार शासन ने लांबित भुगतान के लिए 3.79 करोड़ का बजट आवंटित किया है। मगर डूब टैक्स को सरकारी विभागों से वसूलने के लिए नगरपालिका की ओर से कर्जदारों की टॉपटेन सूची बनाई गई है। जिसमें 38 लाख 59 हजार 640 रुपये से अधिक की बकायेदारी चल रही है।

इसमें सर्वाधिक कर्ज जिला महिला अस्पताल,बेसिक शिक्षा विभाग के संपत्ति विभाग पर बकायेदारी चल रही है। जिन पर पांच लाख की बकायेदारी है। इन सभी पर सख्ती करते हुए साल 2024 तक का टैक्स रिवाइज कर टैक्स वसूलने की कार्रवाई शुरु कर दी गई है। इन्हें एक माह के भीतर अपना भुगतान करने को कहा गया है। अन्यथा कार्रवाई की जाएगी। इसके लिए टीमें बना दी गई है। जिनका लक्ष्य निर्धारित कर दिया गया है।

यह बड़े बकायेदार (रुपये में)
- जिला महिला चिकित्सा अधिकारी          - 5,53,000
- जिला पशु चिकित्साधिकारी पीलीभीत    -16,16,000
- मुख्य चिकित्साधिकारी पीलीभीत           - 2,12,131
- परियोजना अधिकारी रेशम विभाग         -  1,62,170
-  संपत्ति जिला परियोजना बेसिक शिक्षा    - 5,57,954
- भारत संचार निगम टेलीफोन                  -1,82,273
- टेलीफोन उपमंडलीय अधिकारी               - 64,860
- विकास भवन बैंक आफ बड़ौदा                -1,48,975
-अधिशासी अभियंता सिंचाई विभाग             - 3,62,277

इन कार्यालयों पर सबसे अधिक बकायेदारी चल  रही है। कई बार नोटिस जारी हो चुका है। मगर अभी तक भुगतान नहीं किया गया है। वित्तीय वर्ष 2024 का टैक्स रिवाइज कर उन्हें नोटिस जारी किया गया है। कि वह अपने कार्यालय का टैक्स जमा करा दें--- डॉ. आस्था अग्रवाल चेयरमैन नगरपालिका।

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