IIT Kanpur: पुलिस कमिश्नर ने घटनास्थल का किया निरीक्षण, M.Tech छात्र ने किया था सुसाइड...छह सालों से आ रहे निरंतर ऐसे मामले..

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Edited By Amrit Vichar
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कानपुर आईआईटी में पुलिस कमिश्नर छात्र सुसाइड मामले में घटनास्थल पर पहुंचे।

कानपुर आईआईटी में पुलिस कमिश्नर छात्र सुसाइड मामले में घटनास्थल पर पहुंचे और छात्रों से मिलकर मामले के बारे में बातचीत की।

कानपुर, अमृत विचार। कल्याणपुर थानाक्षेत्र में स्थित आईआईटी में एयरोस्पेस इंजीनियरिंग से एमटेक सेकेंड ईयर के छात्र विकास कुमार मीणा की फांसी लगाकर जान देने के मामले में सूचना पर पहुंचे पिता नेमचंद्र मीणा और चाचा अनिल कुमार मीणा ने आईआईटी प्रशासन पर लापरवाही का आरोप लगाया।

उनका कहना था कि अगर उसे बर्खास्त भी किया गया था तो इसकी सूचना परिजनों को आखिर क्यों नहीं दी गई। आरोप लगाया कि उसके बर्खास्त किए जाने पर वह अवसाद में चल गया। इसी कारण पांच दिन तक घुट-घुटकर उसने जिंदगी से मुंह मोड़ लिया।

परिजनों का आरोप था कि पुलिस दबी जुबां सुसाइड नोट छात्रों के पास होने की बात कह रही है, लेकिन छात्र एक दूसरे के पास होना बता रहे हैं। घटना के 24 घंटे बाद तक चोरी हुआ सुसाइड नोट पुलिस नहीं ढूंढ पाई। 

 जिला मेरठ के सरधना जाफरनगर बेगमाबाद थाना कंकरखेड़ा निवासी आरएमएस से सेवानिवृत्त ऑफिस सुप्रीटेंडेंट नेम चंद्र मीणा ने बताया कि उनका इकलौता बेटा विकास कुमार मीणा ने पंजाब यूनिवर्सिटी से बीटेक करने के बाद वर्ष 2021 में आईआईटी में दाखिला लिया था।

उन्होंने बताया कि यहां बेटे की लगातार बैक आने पर उसे चार जनवरी को बर्खास्त कर दिया गया था। लेकिन आईआईटी प्रशासन ने परिजनों को भी इसकी जानकारी नहीं दी थी। अगर परिजनों को बताते तो शायद बेटा सुसाइड नहीं करता। इस घटना के बाद आईआईटी में हड़कंप मच गया।

परिजनों का कहना था कि उन लोगों को एचओडी की ओर से रात 10 बजे सूचना दी गई। घटना के बाद विकास का पोस्टमार्टम केपीएम के डॉक्टर रमेश कुमार, डॉ मनोज कुमार राव ने पैनल और वीडियाग्राफी के बीच किया। इसके बाद शव को शाम चार बजे परिजन लेकर मेरठ के लिए रवाना हो गए।   

सुसाइड नोट हुआ चोरी, पुलिस कमिश्नर पहुंचे आईआईटी 
आईआईटी में सुसाइड के बाद छात्रों ने ही दरवाजा तोड़ा और उसे हॉस्पिटल ले गए थे। जहां जांच के बाद डॉक्टरों ने एमटेक छात्र विकास को मृत घोषित कर दिया था।

इस दौरान छात्र के कमरे से एक सुसाइड नोट भी मिला था, कई छात्रों ने इसे देखा ओर पढ़ा था, लेकिन पुलिस के आने से पहले ही वह गायब हो गया।

सुसाइड नोट चोरी होने की जानकारी मिलते ही गुरुवार को कल्याणपुर प्रभारी निरीक्षक धनंजय पांडेय, एसीपी अभिषेक पांडेय फोर्स के साथ पहुंचे और छात्रों से पूछताछ और जांच-पड़ताल शुरू कर दी। सुसाइड नोट बरामद करने के लिए छात्रों की तलाशी और पूछताछ की गई।

उधर पुलिस कमिश्नर अखिल कुमार भी आईआईटी कैंपस पहुंचे और पूरे मामले की जानकारी ली। सुसाइड नोट चोरी होने की जानकारी मिलने के बाद पुलिस कमिश्नर ने भी इसे गंभीरता से लेते हुए जांच का आदेश दिया है।

इकलौते भाई की मौत से परिवार के हाल बेहाल

बेटे के मौत की खबर मिलते ही मां भुवनेश्वरी अचेत हो गईं। इसके साथ ही मुंबई में रहने वाली बहन मौसम वैज्ञानिक मीनू और दूसरी बहन नीलम भी रो-रो कर बेहाल हो गईं। दोनों बहनें भाई के मौत की खबर मिलते ही आनन-फानन में मेरठ के लिए रवाना हो गईं। उधर सुसाइड की जानकारी मिलते ही पिता नेम चंद्र मीना, चचेरा भाई अनिल कुमार मीना, अजय कुमार मीना, लेखराज मीना, सुदेश चंद्र मीना समेत परिवार के अन्य लोग कानपुर पहुंचे। 

अमेरिका से आए मामा से मिलने आया था घर

पिता ने बताया कि विकास के मामा नेत्रपाल मीना अमेरिका में वैज्ञानिक हैं। कुछ दिन पहले घर आए थे, इसके चलते वह मामा और परिवार से मिलने पांच जनवरी को घर आया था, लेकिन उसने परिवार को इस बात की कोई जानकारी नहीं दी थी। बर्खास्त होने के बाद भी उसके आचरण में भी किसी प्रकार का कोई बदलाव नहीं था।  

खिड़की से झांके तो हुई जानकारी 

बरेली में रेलवे में लोको इंस्पेक्टर चाचा अनिल कुमार मीणा ने बताया कि बुधवार शाम को उसके कमरे में कोई हलचल नहीं होने पर रात आठ बजे साथी छात्रों ने खिड़की से झांककर देखा तो विकास का शव पंखे से फांसी के फंदे पर लटक रहा था। सूचना पर आईआईटी के प्रशासनिक अफसर और कल्याणपुर थाने की पुलिस मौके पर पहुंची थी। गुरुवार को परिवार के लोग आईआईटी के बाद पोस्टमार्टम हाउस पहुंचे थे। 

इंजीनियर बनो चाहे नहीं चिंता न करना 

पिता नेमचंद्र मीना ने अमृत विचार से अपना दर्द साझा किया कि उन्होंने बेटे से तनाव नहीं लेने की बात कही थी। कहा था कि वह इंजीनियर बने चाहे नहीं कतई चिंता नहीं करना और भी बहुत से काम हैं, वो करा दिए जाएंगे। बताया कि पता नहीं प्रभु को क्या मंजूर था। बताया कि उसकी कई विषयों में बैक लगी थी। आईआईटी सूत्रों ने बताया कि 28 में से 21 में उसकी बैक लगी थी। इस कारण प्रशासन ने उसे बर्खास्त कर दिया। वह अंदर ही अंदर पांच दिन तक परिवार में सभी को सफल देखने के बाद घुटता रहा होगा। इसके बाद उसने जान देना ही ठीक समझा। 

लोडर करके मेरठ गया सामान 

पिता ने रुंधे गले से कहा कि आईआईटी में कमरे में विकास का सामान रखा है, वो लोडर करके मेरठ ले चलो। इस पर आईआईटी प्रशासन और पुलिस से बातचीत हो गई है। उन्होंने कहा कि वह बार-बार नहीं आएंगे, जहां उनके बेटे की जान चली गई। इस दौरान विकास के कई साथी छात्र और छात्राएं पोस्टमार्टम हाउस में मौजूद रहे। पंचनामे के दौरान उसका शव देखकर रोने बिलखने लगे। 

पहले भी आईआईटी में हुए सुसाइड 

1- 20 दिसंबर 2023 को प्रोजेक्ट एग्जीक्यूटिव डॉक्टर पल्लवी ने फांसी लगाकर जान दे दी थी।

2- 7 सितंबर 2022 को वाराणसी निवासी पीएचडी छात्र प्रशात सिंह ने कासी लगाकर आत्महत्या की थी।

3- 12 मई 2021 को संस्थान में असिस्टेंट रजिस्ट्रार सुरजीत दास में फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।

4- 09 जुलाई 2020 को आईआईटी के कंप्यूटर सइस एंड इंजीनियरिंग विभाग के प्रोफेसार प्रमोद सुब्रमण्यन ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।

5- 30 दिसंबर 2019 को संस्थान में सिक्योरिटी गार्ड आलोक श्रीवास्तव ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी।

6- 19 अप्रैल 2018 को फिरोजाबाद निवासी पीएचडी छात्र भीम रिव्ह ने फांसी लगाकर आत्महत्या की थी। 
 
छह सालों में आईआईटी में छह ने लगाई फांसी 

आईआईटी कानपुर में हर साल एक व्यक्ति फांसी लगाकर जान दे देता है। पिछले छह वर्षों से यह क्रम लगातार चल रहा है। कभी प्रोफेसर तो कभी असिस्टेंट रजिस्ट्रार तो कभी छात्र तो अब इंजीनियरिंग छात्र। आईआईटी प्रशासन ने छात्र के निधन पर शोक व्यक्त किया है।

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