विधवा पेंशन फर्जीवाड़ा: तत्कालीन डीपीओ, बीडीओ समेत नौ अधिकारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि
बरेली, अमृत विचार। रामनगर ब्लॉक के गोठा खंडुआ गांव में 46 विवाहित महिलाओं को विधवा पेंशन देने का फर्जीवाड़ा नीचे से ऊपर तक अफसरों की साठगांठ या अनदेखी की वजह से ही हो रहा था।
शुक्रवार को इस मामले में तत्कालीन डीपीओ और बीडीओ समेत नौ सरकारी कर्मचारियों को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि दे दी गई। इनमें से रामनगर ब्लॉक के तत्कालीन पटल सहायक और एक सचिव को प्रतिकूल प्रविष्टि के साथ एक साल का वेतन भी रोका गया है। जिला प्रोबेशन कार्यालय में संविदा पर तैनात कंप्यूटर सहायक की सेवाएं खत्म कर दी गई हैं।
गोठा खंडुआ गांव में जिन विवाहित महिलाओं को सितंबर में विधवा पेंशन दिए जाने का खुलासा हुआ था उनमें से ज्यादातर 25 से 30 साल की नवविवाहित थीं। पहले इस बारे में संपूर्ण समाधान दिवस में शिकायत की गई, लेकिन तहसीलस्तरीय अफसरों ने उसकी अनदेखी कर दी। बाद में यह मामला अमृत विचार की सुर्खियां बना तो तत्कालीन डीएम शिवाकांत द्विवेदी ने जांच का आदेश दिया।
उनके निर्देश पर एक जांच एसडीएम आंवला ने कराई, जबकि दूसरी तत्कालीन डीपीओ के स्तर से हुई। दोनों जांच लंबी खिंची, इस बीच इस मामले में कुछ अफसर भी फंसने लगे तो जांच की दिशा बदल गई। आखिर में ग्राम प्रधान के पति विवेक शर्मा, पंचायत सहायक के पति राहुल कुमार और गांव के ही दो दलाल गंगा दयाल और आसिफ के खिलाफ धोखाधड़ी की रिपोर्ट दर्ज कराकर मामला रफादफा कर दिया गया।
अक्टूबर में रविंद्र कुमार जिले के नए डीएम बने। उनकी जानकारी में यह मामला आया तो उन्होंने नए सिरे से जांच का निर्देश दिया और सीडीओ जगप्रवेश और पीडी डीआरएडीए तेजवंत सिंह को भी जांच करने वाली टीम में शामिल किया। जांच में दोषी साबित हुए अधिकारियों और कर्मचारियों से जवाब मांगा गया। कुछ दिन पहले सीडीओ ने इन सभी पर दंड निर्धारित करते हुए डीएम को रिपोर्ट सौंप दी थी। डीएम ने इसके बाद सभी आरोपियों को जवाब देने के लिए तीन दिन का समय दिया था। जवाब मिलने के बाद शुक्रवार को उनके खिलाफ कार्रवाई का आदेश जारी कर दिया गया।
ग्राम पंचायत सचिव ने जवाब ही नहीं दिया
तत्कालीन डीपीओ नीता अहिरवार और बीडीओ आशीष पाल समेत आठ आरोपियों ने अपने बचाव में अंतिम जवाब दिया लेकिन ग्राम पंचायत सचिव विपिन कुमार सक्सेना ने कोई स्पष्टीकरण ही नहीं दिया। हालांकि डीएम ने किसी के भी स्पष्टीकरण को संतोषजनक नहीं माना। आदेश में कहा गया है कि आरोपी अधिकारियों और कर्मचारियों ने अपने पदीय दायित्वों का सही निर्वहन नहीं किया और शासकीय कार्याें में घोर लापरवाही बरती गई।
दोषियों पर हुई ये कार्रवाई
-तत्कालीन डीपीओ और अब उप मुख्य परिवीक्षा अधिकारी के पद पर तैनात नीता अहिरवार को विशेष प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टि।
-रामनगर ब्लॉक के तत्कालीन बीडीओ आशीष पाल को विशेष प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टि।
-रामनगर ब्लॉक में तत्कालीन पटल सहायक अनुज कुमार वर्मा को विशेष प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टि, अस्थाई रूप से एक साल का वेतन भी रोका गया।
-जिला प्रोबेशन कार्यालय में संविदा पर तैनात चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी अभिषेक सारस्वत की सेवाएं समाप्त।
-ग्राम पंचायत विकास अधिकारी सुरेंद्र कुमार, कुलदीप, करन सिंह, सिद्धार्थ त्रिपाठी और सुगम कुमार को भी विशेष प्रतिकूल चरित्र प्रविष्टि।
-ग्राम पंचायत अधिकारी विपिन कुमार सक्सेना को विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि, एक साल का वेतन भी रोका गया।
भ्रष्टाचार के आरोपी अफसरों पर पूरी मेहरबानी दिखा गए तत्कालीन डीएम
नए सिरे से हुई जांच में यह भी साफ हो गया कि विवाहित महिलाओं को विधवा पेंशन देने के मामले में स्पष्ट रूप से बीडीओ से लेकर डीपीओ के अलावा उनके कार्यालय के कर्मचारियों की भी खुले तौर पर साठगांठ थी। प्रशासन के सूत्रों के मुताबिक एसडीएम आंवला ने पहली बार में जांच करके जो रिपोर्ट तत्कालीन डीएम को दी थी, उसमें इसका स्पष्ट जिक्र था लेकिन तत्कालीन डीएम ने यह रिपोर्ट लौटा दी और दोबारा जांच का आदेश दे दिया।
दूसरी जांच में सिर्फ चार गैरसरकारी लोग फंसाए गए। तत्कालीन डीएम की डीपीओ रहीं नीता अहिरवार को इस कदर मेहरबानी हासिल थी कि ट्रांसफर होने के बाद चार्ज छोड़ने से पहले उन्होंने उन्हें एक दूसरे मामले में दी गई विशेष प्रतिकूल प्रविष्टि भी खत्म कर दी थी।
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