UP में 10 अप्रैल को जारी होगी अंतिम मतदाता सूची... वाराणसी में बोले मुख्य निर्वाचन अधिकारी रिणवा, SIR प्रक्रिया जारी

Amrit Vichar Network
Published By Anjali Singh
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वाराणसी। उत्तर प्रदेश के मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा सोमवार को काशी पहुंचे। चौका घाट स्थित सांस्कृतिक संकुल में उन्होंने विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के संबंध में विस्तार से चर्चा की। उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में एसआईआर प्रक्रिया पूरी होने के बाद 10 अप्रैल को अंतिम मतदाता सूची जारी की जाएगी। कुछ लोगों में इस बात को लेकर स्पष्टता नहीं है कि एसआईआर अभी हुआ नहीं है। कई लोग कह रहे हैं कि एसआईआर हो गया, जबकि अभी दावा-आपत्ति, नोटिस जारी करने और सुनवाई का चरण ही चल रहा है।

रिणवा ने कहा, "ड्राफ्ट सूची प्रकाशित होने से पारदर्शिता आई है। फॉर्म-7 कोई भी भर दे और किसी का नाम कट जाए, ऐसा नहीं होता। पूरी प्रक्रिया व्यवस्थित और पारदर्शी तरीके से चल रही है।" उन्होंने बताया कि सोमवार को राजनीतिक दलों के साथ बैठक हुई, जिसमें सभी के सुझाव सुने गए। ब्लॉक-स्तरीय अधिकारी (बीएलओ) के अनुभव भी लिए जा रहे हैं ताकि फील्ड में आने वाली दिक्कतों और कठिनाइयों का समाधान किया जा सके। 

कुछ दिनों पूर्व भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) के मंत्री रविंद्र जायसवाल ने नौ हजार से अधिक डुप्लीकेट वोटर अपने उत्तर विधानसभा क्षेत्र में होने का आरोप लगाते हुए इसे 'वोट जिहाद' का नाम दिया था। इस संबंध में पूछे जाने पर मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने कहा, "मुझे इसकी विस्तृत जानकारी नहीं है, जिला निर्वाचन अधिकारी सत्येंद्र कुमार इससे बेहतर बता सकते हैं।" 

इस पर जिला निर्वाचन अधिकारी सत्येंद्र कुमार ने बताया कि पहले चरण में प्राप्त 4,300 लोगों की सूची में से केवल 8 वोटर डुप्लीकेट पाए गए हैं। शेष दूसरी सूची का सत्यापन कराया जा रहा है। रिणवा ने आगे बताया कि भारत निर्वाचन आयोग ने 27 अक्टूबर 2025 को विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) शुरू करने की घोषणा की थी। 4 नवंबर से इसका पहला चरण शुरू हुआ। उत्तर प्रदेश के सभी मतदाताओं को 27 अक्टूबर 2025 तक की मतदाता सूची के आधार पर गणना फॉर्म छपवाकर बीएलओ के माध्यम से घर-घर पहुंचाया गया। 

मतदाताओं ने फॉर्म भरकर हस्ताक्षर किए। यह चरण 26 दिसंबर तक चला। छह जनवरी 2026 को उत्तर प्रदेश की ड्राफ्ट मतदाता सूची प्रकाशित की गई, जिसमें लगभग 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार नाम शामिल हुए। गणना शुरू होने पर कुल 15 करोड़ 44 लाख के करीब नाम थे।

इस प्रकार ड्राफ्ट सूची से करीब 2 करोड़ 88 लाख नाम हटाए गए। ये नाम विभिन्न कारणों से हटाए गए, जैसे मृत्यु हो जाना, एक से अधिक स्थान पर नाम दर्ज होना, घर बदलकर कहीं और चले जाना या संपर्क न होने पर 'लापता' श्रेणी में रखा जाना। छह जनवरी से दावा-आपत्ति का चरण शुरू हुआ। 

ड्राफ्ट सूची अंतिम नहीं होती, बल्कि बीएलओ द्वारा तैयार की गई सूची को पारदर्शिता के लिए प्रकाशित किया जाता है ताकि जनता और राजनीतिक दल जांच सकें। नाम न होने पर फॉर्म-6, मृतक/डुप्लीकेट नाम हटाने के लिए फॉर्म-7 तथा सुधार (नाम, लिंग, संबंध, पता आदि) के लिए फॉर्म-8 भरा जाता है।

दावा-आपत्ति की अंतिम तिथि 6 मार्च है। इस बार एसआईआर में एक नई व्यवस्था लागू की गई। 6 जनवरी की ड्राफ्ट सूची में आए 12 करोड़ 55 लाख 56 हजार नामों में से लगभग 1 करोड़ 4 लाख ऐसे मतदाता सामने आए जिन्होंने पिछले एसआईआर के गणना फॉर्म से 'मैपिंग' (मिलान) नहीं किया।

इन्हें नोटिस जारी किए गए हैं। इसी तरह 2 करोड़ 22 लाख नाम ऐसे थे जिनमें तार्किक विसंगति (नाम मिसमैच, माता-पिता की आयु आदि) पाई गई। इनसे भी दस्तावेज मांगे गए हैं। अब तक 86 लाख से अधिक मामलों की सुनवाई पूरी हो चुकी है। 

रिणवा ने स्पष्ट किया कि किसी भी बीएलओ को स्वतंत्र रूप से नाम काटने का अधिकार नहीं है। डुप्लीकेट नाम होने पर कार्रवाई संभव है, लेकिन यह जानबूझकर गलत तरीके से किया जाए तभी संभव है। जनता प्रक्रिया के प्रति जागरूक है। अभी तक फॉर्म-6 के माध्यम से साढ़े तीन करोड़ लोगों के नाम जुड़ने की संभावना है, जिसमें से करीब 53 लाख फॉर्म प्राप्त हो चुके हैं। 

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