बाराबंकी : वर्मीकंपोस्ट से मिट्टी में ही नियंत्रित होगा जहरीला आर्सेनिक, शोध में बड़ा खुलासा

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Published By Deepak Mishra
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हैदरगढ़/बाराबंकी, अमृत विचार। मानव जीवन के लिए घातक जहरीले तत्व आर्सेनिक को अब वर्मीकंपोस्ट के माध्यम से मिट्टी में ही स्थिर किया जा सकता है। इससे फसलों के माध्यम से मानव शरीर में पहुंचने वाले आर्सेनिक के खतरे को काफी हद तक कम किया जा सकेगा। यह खुलासा डॉ. अभय प्रकाश रावत, असिस्टेंट प्रोफेसर पर्यावरण विज्ञान विभाग, श्री बैजनाथ शिव कला स्नातकोत्तर महाविद्यालय मंगलपुर, बाराबंकी एवं उनकी शोध टीम द्वारा किए गए शोध में हुआ है।

डॉ. अभय रावत के साथ इस शोध में डॉ. विनय कुमार, प्रभागीय निदेशक कार्यालय वन विभाग रायबरेली सहित अन्य शोधकर्ता शामिल रहे। शोध में बताया गया कि रासायनिक उर्वरकों के स्थान पर वर्मीकंपोस्ट के उपयोग से आर्सेनिक जैसे घातक तत्वों को मिट्टी में ही स्थिर कर फसलों में जाने से रोका जा सकता है।

यह शोध यूके की प्रतिष्ठित जर्नल कंपोस्ट साइंस एंड यूटिलाइजेशन में प्रकाशित हुआ है, जिसे टेलर एंड फ्रांसिस प्रकाशक द्वारा जारी किया जाता है। शोध के लिए आर्सेनिक प्रभावित लखीमपुर जनपद की दोमट व बलुई दोमट मिट्टी का चयन किया गया, जिसमें वर्मीकंपोस्ट दोनों ही प्रकार की मिट्टी में प्रभावी पाया गया।

डॉ. अभय ने बताया कि वर्मीकंपोस्ट सस्ता, आसानी से उपलब्ध और पोषक तत्वों से भरपूर होता है। इसके उपयोग से न केवल फसलों की पैदावार बढ़ेगी, बल्कि आर्सेनिक से होने वाली बीमारियों और भूगर्भीय जल प्रदूषण को भी नियंत्रित किया जा सकेगा। उन्होंने बताया कि यूनीसेफ के सहयोग से कराए गए सर्वेक्षण में उत्तर प्रदेश के 20 से अधिक जिलों का भूगर्भीय जल आर्सेनिक युक्त पाया गया है, ऐसे में वर्मीकंपोस्ट का उपयोग मानव स्वास्थ्य और पर्यावरण दोनों के लिए बेहद लाभकारी सिद्ध हो सकता है।

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