संतकबीरनगर में लगा कोल्ड कर्फ्यू, घरों में दुबके लोग
संतकबीरनगर, अमृत विचार। भीषण शीतलहर और हाड़ कंपाऊ ठंड के चलते जन जीवन बेहाल है। सड़कों पर सन्नाटा है और लोगों के जरूरी कामकाज भी प्रभावित हो रहे हैं। पिछले एक सप्ताह से सूर्य भगवान का दर्शन न होने से बुरा हाल होता जा रहा है। आलम यह है कि हर दिन ठंड का नया रेकॉर्ड बनता जा रहा है। बताते चलें कि विगत एक सप्ताह से मौसम ने ऐसी करवट लिया है कि जन जीवन अस्त ब्यस्त हो चुका है। लगातार गिरता तापमान रोज नया रेकॉर्ड बना रहा है। दिन में 10 बजे तक घना कोहरा और उसके बाद बर्फीली हवाओं ने लोगों का जीना हराम कर दिया है। आलम यह है कि सड़कों पर कोल्ड कर्फ्यू जैसे हालात हैं तो वहीं पशु पंछी भी अपने घोंसलों में दुबकने को मजबूर हैं। शाम 5 बजते ही कस्बों बाजारों और सड़कों पर सन्नाटा पसर जा रहा है। एक सप्ताह से सूर्य देवता का दर्शन नहीं होने से जनजीवन के साथ ही फसलों पर भी विपरीत असर दिखाई देने लगा है।
अलाव व्यवस्था में भी हो रहा खेल
भीषण ठंड में प्रशासनिक अमला ग्रामीण क्षेत्रों में अलाव जलाने में भी खेल तमाशा करने में जुटा है। आलम यह है कि ग्रामीण क्षेत्रों के दर्जनों चौराहों और सार्वजनिक स्थलों को चिन्हित कर तहसील प्रशासन ने अलाव जलाने की व्यवस्था कराई है। लेकिन किसी भी स्थान पर अलाव की लकड़ियां नहीं पहुंच रही हैं। आलम यह है कि जहां भी लोग लकड़ियां खरीद कर अलाव जला रहे हैं हल्का लेखपाल उसकी फोटो खींचकर प्रशासनिक अधिकारियों को भेज दे रहे हैं। कुल मिलाकर सरकारी अलाव सिर्फ कागजों में ही जल रहे हैं।

दिहाड़ी मजदूरों की रोजी-रोटी पर लगा ग्रहण
ठंड का सर्वाधिक दुष्परिणाम दिहाड़ी मजदूरों को भुगतना पड़ रहा है। भीषण ठंड के चलते एक तो उन्हें काम मिलने में कठिनाई हो रही है दूसरे अगर कहीं काम मिल भी गया तो ठंड से कांपते हाथों से काम नहीं हो पा रहा है। जिससे चलते दिहाड़ी मजदूरों के सामने रोजी-रोटी का संकट खड़ा हो गया है। खलीलाबाद के मेंहदावल चौक पर लगने वाली लेबर मण्डी सुनसान पड़ी है। दिहाड़ी मजदूरों का कहना है कि सरकार द्वारा उन्हें प्रति यूनिट पांच किलो नि:शुल्क खाद्यान्न तो मिल रहा है। लेकिन इससे परिवार का भरण पोषण सम्भव नहीं हो पा रहा है। सब्जी, दाल, तेल, मशाला आदि तो खरीद कर ही खाना पड़ता है। मौसम में सुधार हुए बगैर रोजी-रोटी का जुगाड हो पाना सम्भव नहीं लग रहा है।
